इंद्रप्रस्थ इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ ने रचा इतिहास: मरीज को होश में रखकर की ब्रेन टीबी की जटिल सर्जरी, दी नई जिंदगी              

IPIMS अस्पताल में डॉक्टरों की टीम ने जागते हुए मरीज की जटिल ब्रेन सर्जरी सफलतापूर्वक की। 18 महीने से दवा ले रही युवती को नई उम्मीद मिली।

इंद्रप्रस्थ इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ ने रचा इतिहास: मरीज को होश में रखकर की ब्रेन टीबी की जटिल सर्जरी, दी नई जिंदगी              

                                                                                                                                    

■ IPIMS में जागते हुए हुई ब्रेन सर्जरी, 18 महीने से दवा ले रही युवती को नई जिंदगी
■ न्यूरोसर्जन डॉ. सुमित दहिया और टीम ने चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन किया सफल
■ अब दिल्ली-चंडीगढ़ जाने की जरूरत नहीं, शहर में ही मिल रहा उन्नत इलाज


इंद्रप्रस्थ इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ (IPIMS) में डॉक्टरों की टीम ने एक ऐसी ब्रेन सर्जरी कर दिखाई, जिसने चिकित्सा क्षेत्र में नई मिसाल पेश कर दी। एक युवा महिला मरीज पिछले लगभग 18 महीने से ब्रेन टीबी की दवाइयां ले रही थी, लेकिन दवाइयों से बीमारी पूरी तरह खत्म नहीं हो रही थी। डॉक्टरों को शक हुआ कि यह दवाइयों के प्रति रेजिस्टेंट टीबी हो सकती है। ऐसे में बीमारी की सही पहचान के लिए दिमाग में बनी टीबी की गांठ का सैंपल निकालना जरूरी था। यही वह चुनौती थी, जहां से एक कठिन लेकिन ऐतिहासिक ऑपरेशन की शुरुआत हुई। जब सर्जरी के दौरान मरीज को बेहोश नहीं किया गया। होश में रखकर  ब्रेन की सर्जरी की और नई जिंदगी दी। 


यह था रिस्‍क
न्यूरोसर्जन Dr. Sumit Dahiya ने बताया कि यह सर्जरी बेहद जोखिम भरी थी। दिमाग के जिस हिस्से में टीबी की गांठ थी, वहां ऑपरेशन के दौरान लकवा, कमजोरी या अन्य जटिलताएं आने का खतरा था। ऐसे में डॉक्टरों ने फैसला किया कि मरीज को पूरी तरह बेहोश करने के बजाय होश में रखते हुए सर्जरी की जाए। इस दौरान मरीज से लगातार हाथ-पैर हिलाने और बातचीत करने के लिए कहा जाता रहा, ताकि अगर सर्जरी के दौरान किसी संवेदनशील हिस्से पर असर पड़े तो तुरंत पता चल सके। इस तरह की Awake Brain Surgery इस क्षेत्र में पहली बार की गई मानी जा रही है।

डॉक्टरों और टीमवर्क से मिली बड़ी सफलता
इस जटिल ऑपरेशन को सफल बनाने में एनेस्थीसिया विशेषज्ञ Dr. Yogesh Paliwal, ऑपरेशन थिएटर की पूरी टीम और नर्सिंग स्टाफ का महत्वपूर्ण योगदान रहा। सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति तेजी से सुधरी और कुछ ही दिनों में वह खुद चलकर डॉक्टरों से बातचीत करने लगी। डॉक्टरों के अनुसार अब मरीज जल्द ही सामान्य जीवन में लौट सकेगी। जांच रिपोर्ट आने के बाद मरीज को दूसरी पीढ़ी की टीबी दवाइयां (Second Generation Drugs) शुरू की जाएंगी, जिससे बीमारी का बेहतर इलाज संभव होगा।

अस्पताल प्रबंधन ने बताया गर्व का क्षण

अस्पताल के निदेशक Dr. J. S. Dalal ने कहा कि यह उपलब्धि पूरे संस्थान के लिए गर्व की बात है। उन्होंने बताया कि अपने लंबे मेडिकल अनुभव में उन्होंने कई ऑपरेशन देखे हैं, लेकिन मरीज को होश में रखकर इतनी जटिल ब्रेन सर्जरी करना बेहद बड़ी उपलब्धि है।
उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश के मरीजों को इलाज के लिए दिल्ली या बड़े शहरों की ओर नहीं जाना पड़ेगा, बल्कि वे बेहतर इलाज के लिए यहां आएंगे।

मरीज ने भी डॉक्टरों का जताया आभार
मरीज ने बताया कि वह करीब 20 महीनों से टीबी की दवाइयां ले रही थी, लेकिन ज्यादा राहत नहीं मिल रही थी। डॉक्टरों ने जब ऑपरेशन की सलाह दी तो उन्हें संभावित जोखिमों के बारे में भी बताया गया। इसके बावजूद डॉक्टरों की टीम और अस्पताल स्टाफ के सहयोग से ऑपरेशन पूरी तरह सफल रहा। मरीज ने कहा कि अब वह पहले से बेहतर महसूस कर रही है और अस्पताल के डॉक्टरों और स्टाफ का दिल से धन्यवाद करती है।

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यह सर्जरी सिर्फ एक सफल ऑपरेशन नहीं, बल्कि यह संदेश भी है कि अब उन्नत चिकित्सा सुविधाएं बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहीं। IPIMS जैसे संस्थान आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञ डॉक्टरों के साथ क्षेत्र के लोगों को बेहतर इलाज देने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।