1.63 करोड़ की ठगी का मामला: पेस्टीसाइड कंपनी के MD-डायरेक्टर समेत 12 पर केस, फर्जी ई-मेल और जाली बिल से लगाया चूना

फतेहाबाद के रतिया में पेस्टीसाइड कंपनी नागार्जुन NACL के एमडी-डायरेक्टर समेत 12 अधिकारियों पर 1.63 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का केस दर्ज हुआ है। आरोप है कि फर्जी ई-मेल और जाली बिल बनाकर डीलर को ठगा गया।

1.63 करोड़ की ठगी का मामला: पेस्टीसाइड कंपनी के MD-डायरेक्टर समेत 12 पर केस, फर्जी ई-मेल और जाली बिल से  लगाया चूना

फतेहाबाद में पेस्टीसाइड कंपनी के MD-डायरेक्टर समेत 12 पर FIR
रतिया के डीलर के 1.63 करोड़ रुपये हड़पने का आरोप
फर्जी ई-मेल, जाली बिल और नकली हस्ताक्षरों से धोखाधड़ी का केस


हरियाणा के फतेहाबाद जिले में एक बड़े आर्थिक घोटाले का मामला सामने आया है। रतिया सिटी थाना पुलिस ने तेलंगाना के हैदराबाद स्थित पेस्टीसाइड कंपनी नागार्जुन एनएसीएल इंडस्ट्रीज लिमिटेड (NACL) के एमडी, डायरेक्टर समेत 12 अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया है। यह कार्रवाई रतिया निवासी डीलर जसबीर सिंह की शिकायत पर की गई है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि कंपनी के अधिकारियों ने साजिश के तहत फर्जी ई-मेल आईडी बनाकर और जाली बिल जारी करके करीब 1.63 करोड़ रुपये की ठगी कर ली।

पुलिस के अनुसार इस मामले की पहले एएसपी कार्यालय रतिया द्वारा जांच की गई थी। जांच में प्रारंभिक तथ्यों के सामने आने के बाद अब सिटी थाना रतिया में आईपीसी की धारा 409, 420, 467, 468 और 471 के तहत मामला दर्ज किया गया है। आरोप है कि कंपनी के अधिकारियों ने डीलर की फर्जी ई-मेल आईडी तैयार की और उसी के नाम से बिल और कन्फर्मेशन मेल भेजकर माल की हेराफेरी की

इन अधिकारियों पर दर्ज हुआ केस

पुलिस ने कंपनी के एमडी पवन कुमार, डायरेक्टर व चेयरपर्सन लक्ष्मी राज, एनएसएम वीएन राजू, वीपी कानन उपाध्याय, एजीएम रघुचिंद्र उर्फ रघु, सुशील शर्मा, डॉ. गजेंद्र सिंह, डॉ. योगेश प्रताप सिंह, डिपो इंचार्ज सुखविंद्र सिंह, टीएम मनोज कुमार, किरन कैन्डे और जोनल मैनेजर कपिल बालयान के खिलाफ केस दर्ज किया है। शिकायतकर्ता डीलर का कहना है कि वह इन्हीं अधिकारियों के माध्यम से कंपनी से पेस्टीसाइड खरीदकर आगे रिटेल में बेचता था।

साल 2008 से कर रहा था कंपनी से कारोबार

रतिया में हरियाणा पेस्टीसाइड के संचालक जसबीर सिंह ने बताया कि वह साल 2008 से कंपनी के साथ बतौर डीलर जुड़ा हुआ था। शुरुआत में कंपनी ने सुरक्षा के तौर पर उसकी फर्म के 5 खाली साइन किए हुए चेक और 5 खाली लेटरपैड ले लिए थे। वह हर साल लगभग 50 से 60 लाख रुपये का पेस्टीसाइड रिटेल में बेचता था और कंपनी के पास एडवांस राशि जमा करवाता था। वर्ष 2019 तक कंपनी उस पर ब्याज भी देती रही

टारगेट पूरा करने के नाम पर शुरू हुआ खेल

जसबीर सिंह का आरोप है कि साल 2019 के बाद कंपनी के अधिकारियों ने टारगेट पूरा करने के नाम पर नई व्यवस्था शुरू की। अधिकारियों ने कहा कि वे कंपनी से माल दिलवा देंगे और आगे खुद ही उसे बेचवा देंगे। इसके बाद वे बताते थे कि किस नाम से और किस रेट पर बिल काटना है, जबकि क्रेडिट नोट और इंसेंटिव उसकी फर्म के खाते में जमा करने का आश्वासन दिया जाता था।

बिना ऑर्डर उसके नाम काटे जाते थे बिल

शिकायत के अनुसार अधिकारियों ने धीरे-धीरे बिना ऑर्डर लिए ही उसकी फर्म के नाम बिल काटने शुरू कर दिए। हालांकि माल उसकी दुकान पर नहीं पहुंचता था। सिर्फ व्हाट्सऐप के जरिए बिल भेज दिए जाते थे और आगे किस दुकानदार को बिल देना है यह बताया जाता था। उन दुकानदारों से जो भी भुगतान आता था, उसे कंपनी के खाते में जमा करवा दिया जाता था।

बैलेंस स्टेटमेंट से खुला पूरा मामला

जसबीर सिंह के मुताबिक 31 दिसंबर 2023 को कंपनी ने उसकी फर्म का बैलेंस स्टेटमेंट भेजा, जिसमें उससे 2 करोड़ 54 लाख 98 हजार 397 रुपये की मांग की गई। उसने इस पर आपत्ति जताई और कहा कि यह बकाया अमान्य है। जब उसने अपनी फर्म के रिकॉर्ड का मिलान किया तो पता चला कि कंपनी कर्मचारियों द्वारा बाहर बेचे गए माल और कंपनी के बिलों के बीच का क्रेडिट नोट उसके खाते में जमा ही नहीं किया गया था

फर्जी बिल बनाकर बेचा गया माल

आरोप है कि कंपनी के अधिकारियों ने उसकी फर्म के नाम बिल काटकर माल अन्य दुकानदारों को बेच दिया और उन बिलों पर फर्जी मोहरें और जाली हस्ताक्षर भी लगाए गए। जब उसने कंपनी में इसकी शिकायत की तो जांच में यह भी सामने आया कि कुछ बिल ऐसे थे जिनका माल अभी भी C&F के पास पड़ा हुआ था

फर्जी ई-मेल से भेजी गई करोड़ों की कन्फर्मेशन

शिकायतकर्ता का आरोप है कि कंपनी ने उसकी फर्म के नाम फर्जी ई-मेल आईडी बनाकर 2.25 करोड़ रुपये की बैलेंस कन्फर्मेशन मेल भेज दी। इसके अलावा करीब 47 लाख रुपये के बिल भी फर्जी तरीके से जारी किए गए। उसका कहना है कि वर्ष 2023-24 में उसकी फर्म ने कंपनी से कोई पेस्टीसाइड नहीं खरीदी, फिर भी लाखों रुपये के बिल दिखा दिए गए।

जसबीर सिंह का आरोप है कि जब उसने बार-बार शिकायत की तो कंपनी ने 19 जून 2024 को उत्तर प्रदेश के बिजनौर थाने में उसके खिलाफ ही केस दर्ज करवा दिया। अब पुलिस ने उसकी शिकायत के आधार पर पूरे मामले में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।