हरियाणा में टायर पिघलाने वाली फैक्ट्री में भीषण धमाका: 4 श्रमिक जिंदा जले, सुरक्षा लापरवाही पर मालिकों के खिलाफ केस

करनाल के मधुबन क्षेत्र में टायर पिघलाकर फर्नेस ऑयल बनाने वाली फैक्ट्री में रिएक्टर मशीन का दरवाजा खोलते ही धमाका हो गया, जिसमें चार मजदूर गंभीर रूप से झुलस गए। सुरक्षा उपकरण न देने के आरोप में मालिकों और केयरटेकर के खिलाफ केस दर्ज किया गया है।

हरियाणा  में टायर पिघलाने वाली फैक्ट्री में भीषण धमाका: 4 श्रमिक जिंदा जले, सुरक्षा लापरवाही पर मालिकों के खिलाफ केस

रिएक्टर मशीन का दरवाजा खोलते ही तेज धमाका, चार मजदूर गंभीर रूप से झुलसे
370 डिग्री पर चलती थी मशीन, सुरक्षा उपकरण न देने का आरोप
मालिक सुमित, राहुल और केयरटेकर बलराज पर केस दर्ज, जांच शुरू


करनाल जिले के मधुबन थाना क्षेत्र में 21 फरवरी को दोपहर करीब 12 बजे उस समय हड़कंप मच गया, जब टायर पिघलाकर फर्नेस ऑयल बनाने वाली एक फैक्ट्री में जोरदार धमाका हो गया। धमाका इतना तेज था कि रिएक्टर मशीन से आग और कार्बन तेज गति से बाहर निकला और पास खड़े चार मजदूर उसकी चपेट में आकर बुरी तरह झुलस गए। गंभीर हालत में सभी को पहले करनाल के निजी अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जहां से तीन को पीजीआई रोहतक रेफर कर दिया गया। मामले में 22 फरवरी देर रात पुलिस ने कंपनी मालिकों और केयरटेकर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

घटना गांव कैरवाली के पास स्थित बजरंग इंडस्ट्रीज में हुई। उत्तर प्रदेश के गांव नरायनपुर निवासी मुराली सहानी ने पुलिस को दिए बयान में बताया कि वह वर्ष 2018-19 से इस फैक्ट्री में काम कर रहा है। फैक्ट्री मालिक सुमित और राहुल हैं, जबकि बलराज केयरटेकर है। यहां रिएक्टर मशीन में एक बार में 7 से 8 टन टायर डाले जाते हैं और मशीन को करीब 370 डिग्री सेल्सियस तक गर्म किया जाता है। 12 से 14 घंटे की प्रक्रिया के बाद जब मुख्य दरवाजा खोलकर लोहा, ऑयल और कार्बन निकाला जाता है तो गैस और कार्बन बाहर निकलते हैं।

मुराली के अनुसार, मजदूरों ने तीन से चार बार मालिकों से सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराने की मांग की थी, लेकिन हर बार आश्वासन देकर बात टाल दी गई। 21 फरवरी को रामावध, संजय, जनार्धन और मुकुरघुन ने जैसे ही रिएक्टर का मुख्य दरवाजा खोला, अंदर जमा गैस के कारण जोरदार धमाका हो गया। आग और कार्बन की चपेट में आकर चारों मजदूर बुरी तरह झुलस गए।

करीब 1:30 बजे चौकी मंगलौरा इंचार्ज को मोबाइल पर सूचना मिली, जिसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची। डॉक्टरों ने संजय, रामावध और जनार्धन को गंभीर हालत में पीजीआई रोहतक रेफर कर दिया, जबकि मुकुरघुन को करनाल के मेडलाइन अस्पताल में भर्ती कराया गया। 22 फरवरी को पुलिस टीम ने रोहतक पहुंचकर बयान लेने की कोशिश की, लेकिन तीनों को बयान के लिए अनफिट घोषित किया गया।

ट्रॉमा सेंटर के बाहर मौजूद वारिसों में मुराली सहानी ने लिखित शिकायत दी, जिसमें आरोप लगाया गया कि समय पर सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं कराए गए, जिससे यह हादसा हुआ। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मालिक राहुल, सुमित और केयरटेकर बलराज के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। फैक्ट्री प्रबंधन की भूमिका और सुरक्षा मानकों की जांच जारी है।