एक्सप्रेसवे पर टोल के साथ कटेगा चालान, ई-डिटेक्शन सिस्टम लागू
उत्तर प्रदेश के प्रमुख एक्सप्रेसवे पर ई-डिटेक्शन सिस्टम लागू किया जा रहा है। टोल प्लाजा पर नंबर प्लेट स्कैन कर बीमा, PUC, फिटनेस और परमिट की जांच होगी और गड़बड़ी मिलने पर स्वतः ई-चालान जनरेट होगा।
■ टोल प्लाजा पर नंबर प्लेट स्कैन होते ही दस्तावेजों की ऑटोमैटिक जांच
■ बीमा, PUC, फिटनेस या परमिट खत्म तो तुरंत ई-चालान जनरेट
■ उत्तर प्रदेश के प्रमुख एक्सप्रेसवे से शुरुआत, आगे अन्य हाईवे तक विस्तार
देश में एक्सप्रेसवे पर सफर करने वालों के लिए अब नियम और सख्त होने जा रहे हैं। उत्तर प्रदेश के प्रमुख एक्सप्रेसवे पर ई-डिटेक्शन सिस्टम लागू किया जा रहा है, जिसके तहत टोल प्लाजा से गुजरते समय सिर्फ टोल टैक्स ही नहीं बल्कि वाहन के दस्तावेजों की भी डिजिटल जांच होगी। यदि किसी वाहन का बीमा, प्रदूषण प्रमाणपत्र (PUC), फिटनेस सर्टिफिकेट या परमिट अमान्य पाया गया तो सिस्टम स्वतः ई-चालान जनरेट कर देगा।
टोल प्लाजाओं पर हाई-रिजॉल्यूशन कैमरे लगाए जा रहे हैं, जो गुजरने वाले वाहनों की नंबर प्लेट को स्कैन करेंगे। इसके बाद वाहन की जानकारी केंद्रीय डेटाबेस से मैच की जाएगी। पूरी प्रक्रिया पूरी तरह ऑटोमेटेड होगी और इसमें मैन्युअल हस्तक्षेप की जरूरत नहीं पड़ेगी। शुरुआत बड़े रूट से की जा रही है, जिसके बाद इसे अन्य हाईवे तक विस्तार दिया जाएगा।
प्रशासन के अनुसार, यदि किसी वाहन का बीमा वैध नहीं है तो करीब 2000 रुपये तक का चालान हो सकता है। प्रदूषण प्रमाणपत्र न होने पर लगभग 10 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। फिटनेस सर्टिफिकेट की कमी पर पहली बार 5000 रुपये और दोबारा उल्लंघन पर 10 हजार रुपये तक की पेनल्टी तय है। बिना वैध परमिट वाहन चलाने पर भी लगभग 10 हजार रुपये का जुर्माना लगेगा। यह रकम नियमों के तहत सीधे वाहन मालिक के नाम दर्ज होगी और चालान की सूचना पंजीकृत मोबाइल नंबर पर भेजी जाएगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल निगरानी के इस नए दौर में लापरवाही की गुंजाइश नहीं रहेगी। पहले कई वाहन चालक टोल पार कर निकल जाते थे, लेकिन अब दस्तावेजों की वैधता तुरंत जांची जाएगी। ऐसे में वाहन मालिकों के लिए जरूरी है कि वे सफर से पहले अपने सभी दस्तावेज ऑनलाइन जांच लें और समय रहते नवीनीकरण करा लें।
ई-डिटेक्शन सिस्टम का उद्देश्य सड़क सुरक्षा बढ़ाना और नियमों का पालन सुनिश्चित करना है। हालांकि, इसे लेकर वाहन चालकों के बीच चर्चा भी शुरू हो गई है कि क्या इससे पारदर्शिता बढ़ेगी या नए विवाद खड़े होंगे। फिलहाल, स्पष्ट संकेत यही है कि अब बिना वैध कागजात के एक्सप्रेसवे पर सफर करना भारी पड़ सकता है।
Akhil Mahajan