सोनीपत कोर्ट का बड़ा फैसला: दोहरे हत्याकांड में सात को उम्रकैद

सोनीपत की अदालत ने 2015 पिनाना दोहरे हत्याकांड में सात आरोपियों को उम्रकैद और जुर्माने की सजा सुनाई है। दो अन्य आरोपियों को शस्त्र अधिनियम में दोषी करार देते हुए अलग-अलग सजा सुनाई गई

सोनीपत कोर्ट का बड़ा फैसला: दोहरे हत्याकांड में सात को उम्रकैद
  • सोनीपत कोर्ट ने दोहरे हत्याकांड में सात दोषियों को सुनाई उम्रकैद
  • दो अन्य दोषी शस्त्र अधिनियम में सजा, एक को पांच साल दूसरा छह माह कैद
  • 2015 पिनाना गांव गोलीकांड पैसों के लेनदेन से जुड़ा मामला

सुशील मोर


अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अशोक कुमार मान की अदालत ने आठ साल पुराने गांव पिनाना दोहरे हत्याकांड में अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने सात आरोपियों को हत्या के अपराध में उम्रकैद और प्रत्येक पर 1.05 लाख रुपये जुर्माना लगाया है। वहीं, दो अन्य आरोपियों को शस्त्र अधिनियम के तहत दोषी ठहराते हुए एक को पांच साल कैद और 10 हजार जुर्माना, जबकि दूसरे को छह माह कैद और दो हजार जुर्माना सुनाया गया।

गौरतलब है कि 14 नवंबर 2015 को पिनाना अड्डे पर हुई वारदात में पवन और उसके चचेरे भाई विक्की की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में मोहाना थाना पुलिस ने शिकायत दर्ज की थी। शिकायतकर्ता देवेंद्र मलिक ने बताया था कि उसका भाई पवन और चचेरा भाई विक्की सुबह अड्डे पर मौजूद थे। विक्की फरीदाबाद जेल से पैरोल पर आया हुआ था और उसी दिन उसे वापस लौटना था।

घटना से पहले पैसों के लेनदेन को लेकर विवाद हुआ था। विक्की ने गांव भैंसवाल कलां निवासी रंजीता से उधार लिए रुपये लौटाने की मांग की थी। आरोप है कि रंजीता ने इस विवाद में अन्य साथियों के साथ मिलकर विक्की और पवन को बुलाया और मौके पर पहुंचते ही अंधाधुंध गोलियां बरसा दीं, जिससे दोनों की मौके पर ही मौत हो गई।

पुलिस ने इस मामले में गांव भैंसवाल कलां निवासी रंजीता, प्रवीन उर्फ कच्छी, पंकज उर्फ पिंकू, पवन उर्फ पौना, गांव बीधल निवासी तरुण, लाढौत निवासी दिनेश उर्फ नेशा, पानीपत के नारा निवासी शमशेर, भैंसवाल निवासी धर्मेंद्र, सिटावली निवासी प्रमोद सहित अन्य को गिरफ्तार किया था। मामले की सुनवाई के दौरान दो आरोपी अभिलाष उर्फ कैरा और सुरेंद्र उर्फ सुंदरा की मौत हो चुकी थी।

अदालत ने सुनवाई पूरी करने के बाद रंजीता, प्रवीन उर्फ कच्छी, पंकज उर्फ पिंकू, पवन उर्फ पौना, तरुण, दिनेश उर्फ नेशा और शमशेर को हत्या का दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। वहीं, धर्मेंद्र को अवैध शस्त्र अधिनियम में पांच साल कैद, जबकि प्रमोद को छह माह कैद की सजा दी गई। इस फैसले के साथ आठ साल पुराने चर्चित मामले का पटाक्षेप हो गया।