साइकिल से मर्सिडीज तक, अर्शदीप की प्रेरक कहानी, जानें

टीम इंडिया के तेज गेंदबाज अर्शदीप सिंह ने साइकिल से एकेडमी जाने वाले संघर्ष भरे दिनों से लेकर करोड़ों की मर्सिडीज और आलीशान घर तक का सफर 18 सेकेंड के वीडियो में दिखाया।

साइकिल से मर्सिडीज तक, अर्शदीप की प्रेरक कहानी, जानें
  • साइकिल से 20 किलोमीटर सफर करने वाला खिलाड़ी बना टीम इंडिया का मेन बॉलर
  • संघर्ष के बाद अर्शदीप सिंह ने खरीदी 3.5 करोड़ की मर्सिडीज और आलीशान घर
  • 18 सेकेंड के वीडियो में दिखाया संघर्ष से स्टार बनने का सफर


टीम इंडिया के स्टार तेज गेंदबाज अर्शदीप सिंह का क्रिकेट सफर संघर्ष, मेहनत और धैर्य की मिसाल है। आज वह भारतीय टीम के मुख्य गेंदबाजों में शामिल हैं, लेकिन इस मुकाम तक पहुंचने के लिए उन्होंने लंबा संघर्ष किया। क्रिकेट की ट्रेनिंग के लिए अर्शदीप रोजाना साइकिल से करीब 20 किलोमीटर का सफर तय करते थे। हालात ऐसे थे कि परिवार उन्हें क्रिकेट छोड़कर बेहतर भविष्य के लिए विदेश भेजने की तैयारी में था।

कामयाबी मिलने के बाद अर्शदीप सिंह ने अब करीब साढ़े तीन करोड़ रुपये की मर्सिडीज कार और मोहाली में आलीशान घर खरीदा है। उन्होंने अपने इस सफर को 18 सेकेंड के एक वीडियो में साझा किया है, जिसमें पुराने और नए दिनों की झलक दिखाई गई है। अर्शदीप अगले साल होने वाले टी20 विश्व कप में भी टीम इंडिया का हिस्सा रहेंगे।

अर्शदीप ने वीडियो को ‘शुक्र’ नाम दिया है। वीडियो की शुरुआत में वह साइकिल चलाकर क्रिकेट एकेडमी जाते नजर आते हैं, जिसे उन्होंने ‘डे वन’ बताया है। इसके बाद वीडियो में उनका शानदार घर और उसके बाहर खड़ी मर्सिडीज दिखाई गई है, जिसे ‘वन डे’ नाम दिया गया है। इस छोटे से वीडियो ने फैंस को भावुक कर दिया है।

इस वीडियो को एक दिन में करीब 13 लाख लोगों ने लाइक किया है। करीब 3.7 हजार लोगों ने इसे शेयर किया है, जबकि 2.5 हजार से ज्यादा लोगों ने इस पर कमेंट किए हैं। फैंस ने अर्शदीप को आगे के लिए सलाह और शुभकामनाएं भी दी हैं। किसी ने मेहनत की तारीफ की तो किसी ने गेंदबाजी में नए वेरिएशन पर काम करने की बात कही।

अर्शदीप सिंह का परिवार पंजाब के खरड़ से ताल्लुक रखता है। उनके पिता दर्शन सिंह एक निजी कंपनी में काम करते हैं। पिता ने अर्शदीप के भीतर छिपे क्रिकेट टैलेंट को पहचाना और 13 साल की उम्र में उन्हें चंडीगढ़ सेक्टर-36 स्थित गुरु नानक देव स्कूल की क्रिकेट अकादमी में दाखिल कराया।

पिछले साल अमेरिका में हुए टी-20 विश्वकप जीतने के बाद ट्रॉफी के साथ अर्शदीप सिंह और उनका परिवार। -फाइल फोटो

पिता की पोस्टिंग बाहर होने के कारण अर्शदीप की मां ने उनकी ट्रेनिंग की जिम्मेदारी संभाली। वह रोज सुबह उन्हें साइकिल पर लेकर एकेडमी पहुंचाती थीं और पूरे दिन वहीं रहती थीं। स्कूल के बाद पार्क में बैठाकर खाना खिलाती थीं और फिर दोबारा प्रैक्टिस के लिए भेजती थीं। शाम को दोनों साथ घर लौटती थीं। शुरुआती दौर में यह सफर बेहद कठिन रहा।

पंजाब टीम में चयन न होने पर परिवार चिंतित हो गया था। माता-पिता ने अर्शदीप को कनाडा भेजने का फैसला कर लिया था। इस बारे में कोच से चर्चा हुई तो अर्शदीप ने साफ कहा कि वह क्रिकेट ही खेलना चाहते हैं। परिवार ने उन्हें एक साल का समय दिया।

इसके बाद अर्शदीप ने जमकर मेहनत की और उनका चयन पंजाब अंडर-19 टीम में हो गया। इसके बाद उन्होंने अंडर-19 विश्व कप खेला और फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा।

अंडर-19 विश्व कप के दौरान स्पीड में पीछे रहने के कारण उन्होंने अपनी कमजोरी को ताकत में बदला। उन्होंने यॉर्कर, स्लोअर बॉल और लाइन-लेंथ पर खास काम किया। डेथ ओवर में उनकी गेंदबाजी ने उन्हें अलग पहचान दिलाई। वेरिएशन की इसी ताकत के दम पर उन्हें आईपीएल और फिर टीम इंडिया में जगह मिली।