MSc और B.Ed की डिग्री और चला रहा Rapido, नौकरी के लिए पैसेंजर से लगाई गुहार, लड़की ने X पर शेयर की स्टोरी
MSc और B.Ed डिग्रीधारी युवक की कहानी सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है। सरकारी शिक्षक भर्ती की तैयारी के बावजूद नौकरी न मिलने पर वह Rapido चला रहा है और पैसेंजर से नौकरी के लिए मदद मांग रहा है।
■ MSc और B.Ed डिग्रीधारी युवक आजीविका के लिए चला रहा Rapido
■ राइड के दौरान पैसेंजर से मांगी नौकरी की मदद, X पर वायरल हुई कहानी
■ सोशल मीडिया पर बेरोजगारी और सिस्टम पर छिड़ी बहस
ऊंची डिग्रियां, वर्षों की तैयारी और सरकारी नौकरी का सपना… लेकिन हकीकत कुछ और निकली। एक Rapido राइडर की कहानी इन दिनों सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर चर्चा का विषय बनी हुई है। इस युवक के पास मैथमेटिक्स में MSc और B.Ed की डिग्री है, बावजूद इसके वह आज अपनी रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने के लिए बाइक टैक्सी चला रहा है।
यह कहानी X यूजर साक्षी ने शेयर की। साक्षी ने बताया कि वह ऑफिस से घर लौटने के लिए Rapido बुक कर रही थीं। रास्ते में राइडर ने सामान्य बातचीत के दौरान उनसे पूछा कि वह क्या काम करती हैं। जब उन्होंने बताया कि वह नौकरी करती हैं, तो राइडर ने संकोच के साथ कहा कि वह किसी भी तरह की नौकरी की तलाश में है और यदि संभव हो तो उसे कहीं रेफर कर दें।
जब पढ़ाई का सफर सुनकर रह गईं हैरान
साक्षी ने जब राइडर की शैक्षणिक योग्यता के बारे में पूछा, तो वह चौंक गईं। युवक ने बताया कि उसने मैथमेटिक्स में बैचलर, फिर मैथमेटिक्स में मास्टर डिग्री (MSc) और उसके बाद B.Ed किया है। इतना ही नहीं, उसने 5 से 6 वर्षों तक सरकारी शिक्षक भर्ती परीक्षाओं की तैयारी में लगाए।
फिर भी स्थायी नौकरी नहीं मिली। आर्थिक जरूरतों के चलते उसने Rapido चलाना शुरू कर दिया।
साक्षी ने अपनी पोस्ट में सवाल उठाया कि हम छात्रों से कहते हैं कि कड़ी मेहनत करो, डिग्री हासिल करो, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करो और जीवन स्थिर हो जाएगा। लेकिन जब कोई सब कुछ सही करता है और फिर भी उसके पास स्थायी नौकरी नहीं होती, तब क्या?
सोशल मीडिया पर छलकी कई कहानियां
यह पोस्ट वायरल होने के बाद कई यूजर्स ने अपने अनुभव साझा किए। एक यूजर ने लिखा कि उन्होंने छह साल तक एक मार्केटिंग एजेंसी चलाई और करीब 16 करोड़ रुपये का कारोबार किया, लेकिन नए क्लाइंट न मिलने के कारण एजेंसी बंद करनी पड़ी। नौ महीने तक बेरोजगार रहने के बाद उन्होंने जीवनयापन के लिए Blinkit में पिकर की नौकरी शुरू की।
एक अन्य यूजर ने लिखा कि हमेशा बात मेहनत की कमी की नहीं होती। कई बार सिस्टम में उन लोगों के लिए पर्याप्त अवसर ही नहीं होते, जिन्होंने पूरी ईमानदारी से पढ़ाई और तैयारी की हो।
शिक्षा और रोजगार के बीच बढ़ती खाई
यह कहानी केवल एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि उस व्यापक समस्या की झलक है जहां उच्च शिक्षा के बावजूद युवाओं को स्थायी रोजगार नहीं मिल पा रहा। प्रतियोगी परीक्षाओं में सीमित पद, लंबी चयन प्रक्रिया और बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच कई योग्य उम्मीदवार वैकल्पिक रोजगार अपनाने को मजबूर हो रहे हैं।
हालांकि, यह भी सच है कि कई युवा अस्थायी काम को हार नहीं, बल्कि संघर्ष का हिस्सा मानते हैं और बेहतर अवसर की तलाश जारी रखते हैं। Rapido राइडर की यह कहानी भी उम्मीद और जमीनी सच्चाई दोनों को सामने लाती है।
Akhil Mahajan