ट्रंप का 10% ग्लोबल टैरिफ़ क्या है और क्या भारत पर भी लगेगा?

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने डोनाल्ड ट्रंप द्वारा IEEPA के तहत लगाए गए वैश्विक टैरिफ़ को अवैध करार दिया है। करीब 130 अरब डॉलर के संभावित रिफंड पर कानूनी विवाद की आशंका है, जबकि ट्रंप ने धारा 122 के तहत नया 10% टैरिफ़ लागू कर दिया है।

ट्रंप का 10% ग्लोबल टैरिफ़ क्या है और क्या भारत पर भी लगेगा?

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के ग्लोबल टैरिफ़ को अवैध ठहराया
130 अरब डॉलर रिफंड पर कानूनी विवाद की संभावना
ट्रंप ने ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 122 के तहत नया 10% टैरिफ़ लागू किया


अमेरिका की सर्वोच्च अदालत Supreme Court of the United States ने पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump को बड़ा झटका देते हुए उनके द्वारा लगाए गए वैश्विक टैरिफ़ को अवैध करार दिया है। 6-3 के बहुमत से दिए गए फैसले में अदालत ने स्पष्ट किया कि 1977 के कानून International Emergency Economic Powers Act (IEEPA) के तहत राष्ट्रपति दुनिया के लगभग सभी देशों से आयात पर व्यापक टैरिफ़ नहीं लगा सकते। अदालत ने कहा कि नए कर और टैरिफ़ लगाने की संवैधानिक शक्ति कांग्रेस के पास है, न कि राष्ट्रपति के पास।

सबसे अहम बात यह है कि अदालत ने करीब 130 अरब डॉलर की वसूली के संभावित रिफंड का रास्ता खुला छोड़ दिया है। हालांकि रिफंड कैसे और कब होगा, इस पर स्पष्ट निर्देश नहीं दिए गए हैं। माना जा रहा है कि यह मुद्दा अब निचली अदालतों, खासकर अंतरराष्ट्रीय व्यापार अदालत में लंबी कानूनी लड़ाई का रूप ले सकता है।

किन टैरिफ़ को अवैध ठहराया गया?

फैसला केवल उन टैरिफ़ पर लागू होता है जिन्हें ट्रंप ने IEEPA के तहत लगाया था। फरवरी 2025 में उन्होंने चीन, मैक्सिको और कनाडा से आयातित वस्तुओं पर टैरिफ़ लगाया था। इसके बाद तथाकथित “लिबरेशन डे” पर दायरा बढ़ाते हुए लगभग सभी देशों पर 10 से 50 प्रतिशत तक शुल्क लागू कर दिया गया।

ट्रंप प्रशासन का तर्क था कि अमेरिका का बढ़ता व्यापार घाटा और फेंटानिल तस्करी “राष्ट्रीय आपात स्थिति” है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि IEEPA का उद्देश्य राजस्व जुटाना नहीं, बल्कि आपात स्थितियों में सीमित आर्थिक नियंत्रण है।

हालांकि स्टील, एल्युमिनियम, ऑटोमोबाइल और अन्य उद्योग-विशेष टैरिफ़, जिन्हें ट्रेड एक्सपैंशन एक्ट 1962 की धारा 232 के तहत राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर लगाया गया था, इस फैसले से प्रभावित नहीं होंगे।

फैसले के बाद ट्रंप का नया दांव

फैसले के कुछ घंटों बाद ट्रंप ने ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 122 के तहत नया आदेश जारी किया, जिसके जरिए 150 दिनों के लिए 15% तक टैरिफ़ लगाने का अधिकार मिलता है। फिलहाल 24 फरवरी से सभी देशों पर 10% का अस्थायी टैरिफ़ लागू करने की घोषणा की गई है।

व्हाइट हाउस के अनुसार यह कदम अमेरिका के अंतरराष्ट्रीय भुगतान संतुलन को सुधारने और व्यापार घाटा कम करने के लिए उठाया गया है। प्रशासन धारा 301 और धारा 232 जैसे अन्य प्रावधानों के इस्तेमाल पर भी विचार कर रहा है।

क्या मिलेगा 130 अरब डॉलर का रिफंड?

विशेषज्ञों के मुताबिक अब तक करीब 130 अरब डॉलर की वसूली की गई है। अदालत ने यह तो कहा कि IEEPA के तहत लगाए गए टैरिफ़ अवैध थे, लेकिन रिफंड का सीधा आदेश नहीं दिया। वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने संकेत दिया है कि यह मामला वर्षों तक अदालतों में फंसा रह सकता है।

विश्लेषकों का मानना है कि यदि रिफंड होता है तो अधिकतर बड़ी कंपनियों को ही लाभ मिलेगा, क्योंकि कानूनी प्रक्रिया जटिल और खर्चीली है।

भारत समेत अन्य देशों पर क्या असर?

व्हाइट हाउस के एक अधिकारी के अनुसार 10% नया टैरिफ़ भारत, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ जैसे देशों पर भी लागू होगा, भले ही उनके साथ व्यापार समझौते हों। हालांकि कुछ श्रेणियों—जैसे दवाएं, ऊर्जा उत्पाद, महत्वपूर्ण खनिज और सूचनात्मक सामग्री—को छूट दी जाएगी। इस फैसले के बावजूद टैरिफ़ विवाद पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। आने वाले महीनों में कांग्रेस, अदालत और व्हाइट हाउस के बीच अधिकारों की खींचतान और तेज हो सकती है।