बुरे फंसे अविमुक्तेश्वरानंद, बच्चों के यौन शोषण का केस दर्ज होगा, प्रयागराज कोर्ट के आर्डर
प्रयागराज की स्पेशल पॉक्सो कोर्ट ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ नाबालिगों के यौन शोषण के आरोपों में एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। दो बच्चों के बयान के बाद अदालत ने पुलिस को जांच शुरू करने के निर्देश दिए।
■ प्रयागराज की पॉक्सो कोर्ट ने अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ FIR दर्ज करने के दिए आदेश
■ रामभद्राचार्य के शिष्य ने कोर्ट में दो नाबालिग बच्चों को पेश कर लगाए गंभीर आरोप
■ अविमुक्तेश्वरानंद, उनके शिष्य मुकुंदानंद और 2-3 अज्ञात पर केस दर्ज होगा
शनिवार को प्रयागराज की स्पेशल पॉक्सो कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ नाबालिग बच्चों के यौन शोषण के आरोपों में FIR दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने यह आदेश पुलिस कमिश्नर की जांच रिपोर्ट पर विचार करने के बाद पारित किया।
मामले में जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने अदालत में दो नाबालिग बच्चों को पेश कर आरोप लगाए थे। कोर्ट कक्ष में दोनों बच्चों के बयान कैमरे के सामने विधिवत दर्ज किए गए।
स्पेशल जज (POCSO एक्ट) विनोद कुमार चौरसिया की अदालत ने आदेश दिया कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद, उनके शिष्य मुकुंदानंद तथा 2-3 अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज किया जाए। अदालत ने 13 फरवरी को सुनवाई के बाद आदेश सुरक्षित रख लिया था, जिसे अब सार्वजनिक किया गया है।
सबसे अहम तथ्य यह है कि अदालत ने सीधे एफआईआर दर्ज करने का निर्देश देते हुए पुलिस को विधिक कार्रवाई शुरू करने को कहा है। अब संबंधित थाने में मामला दर्ज कर POCSO कानून के तहत जांच प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
शिकायतकर्ता का दावा: “न्याय के लिए दर-दर भटकना पड़ा”
शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी ने अदालत के बाहर मीडिया से कहा कि उन्हें पहले पुलिस स्तर पर सुनवाई नहीं मिली, जिसके बाद वे न्यायालय की शरण में पहुंचे। उन्होंने दावा किया कि न्यायालय ने उनकी बात सुनी और आदेश दिया।उन्होंने सार्वजनिक रूप से यह भी कहा कि वे न्याय के लिए पैदल यात्रा शुरू करेंगे। साथ ही कुछ राजनीतिक नेताओं को चुनौती देते हुए वाराणसी स्थित एक धार्मिक स्थल तक साथ चलने का आह्वान किया।
हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि अदालत ने फिलहाल केवल एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। आरोपों की पुष्टि या दोष सिद्ध होना न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही तय होगा। मामला अब जांच के चरण में प्रवेश करेगा।
13 फरवरी को कोर्ट में क्या हुआ था, जानिए…
आशुतोष महाराज बोले- मुझे धमकी दी जा रही, कोर्ट से रोते हुए बाहर निकले

13 फरवरी को जज विनोद कुमार चौरसिया ने मामले की सुनवाई की थी। शिकायतकर्ता आशुतोष महाराज ने मामले की वकालत खुद की थी। उन्होंने जज से कहा- 2 शिष्यों ने मेरे पास आकर अपने साथ हुए यौन शोषण की कहानी सुनाई। शंकराचार्य के खिलाफ FIR दर्ज करके जांच करनी चाहिए। मुझे न्यायपालिका से ही इंसाफ की उम्मीद है।
शंकराचार्य के वकील ने विरोध किया। कहा- ये सिर्फ आरोप हैं, हमें केस की तैयारी के लिए थोड़ा वक्त चाहिए।
आशुतोष महाराज ने जज से कहा- मेरी कार को बम से उड़ाकर मुझे मारने की धमकी दी जा रही। मेरी हत्या हो सकती है। आपको यौन शोषण का शिकार हुए बच्चों के बयान सुनने चाहिए।

कोर्ट रूम खाली कराया, जज ने बच्चों के बयान सुने जज ने पॉक्सो कोर्ट रूम को खाली कराने का आदेश दिया। कमरे में सिर्फ दोनों पक्षों के वकील ही बचे। इसके बाद बच्चों को कोर्ट रूम में लाया गया। बच्चों ने जज के सामने अपने साथ हुए शोषण की कहानी सुनाई। ये सारे बयान बंद कोर्ट रूम के अंदर हुए। इन बयानों को कैमरे में रिकॉर्ड किया गया।
जज ने पूछा था- आप बच्चों के कौन हैं? स्पेशल जज विनोद कुमार चौरसिया ने आशुतोष महाराज से कुछ सवाल भी पूछे थे। कहा था- आप इन पीड़ितों के क्या हैं? अभिभावक किन आधार पर बने? आशुतोष महाराज ने कहा था कि गुरु परंपरा के मुताबिक, मैं न्याय के लिए आया हूं। पीड़ितों को कहीं न्याय नहीं मिला, तो इन बच्चों ने मुझसे संपर्क किया।
इसके बाद जज ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। शंकराचार्य के खिलाफ FIR होगी या केस डिसमिस होगा, इसके लिए 21 फरवरी यानी आज की तारीख तय की थी।
Akhil Mahajan