उम्र सिर्फ नंबर है, देखिए सोनीपत के सिक्स पैक ताऊ- देसी जिम, देसी डाइट और जबरदस्त जुनून

सोनीपत के जठेड़ी गांव के 51 वर्षीय संजय उर्फ काला पहलवान देसी अंदाज में रोज 25 किलोमीटर दौड़ और 800 सपाटे लगाकर युवाओं को प्रेरित कर रहे हैं। अब उन्होंने दिल्ली मैराथन के 42 किमी वर्ग में एंट्री भरी है।

उम्र सिर्फ नंबर है, देखिए सोनीपत के सिक्स पैक ताऊ- देसी जिम, देसी डाइट और जबरदस्त जुनून

■ 51 साल की उम्र में रोज 20-25 किलोमीटर दौड़
■ 800 सपाटे, LPG सिलेंडर और ओखली से देसी वर्कआउट
■ दिल्ली मैराथन के 42 किमी वर्ग में भरी एंट्री


 हरियाणा के सोनीपत जिले के जठेड़ी गांव के रहने वाले 51 वर्षीय संजय उर्फ काला पहलवान इन दिनों ‘सिक्स पैक वाले ताऊ’ के नाम से चर्चाओं में हैं। सफेद पगड़ी, धोती और देसी अंदाज में कसरत करने वाले इस शख्स ने अपनी फिटनेस से युवाओं को भी हैरान कर दिया है। रोजाना 20 से 25 किलोमीटर की दौड़, 700 से 800 सपाटे और भरे हुए LPG सिलेंडर, पत्थर की पुरानी ओखली और मूसल से एक्सरसाइज करने की उनकी दिनचर्या अब सोशल मीडिया पर प्रेरणा बन चुकी है।

पुराने पत्थर की औखली को उठाकर एक्सरसाइज करते संजय उर्फ काला पहलवान।

सबसे खास बात यह है कि जिस उम्र में लोग आराम को प्राथमिकता देने लगते हैं, उस उम्र में काला पहलवान सुबह तड़के 3 बजे उठकर मैदान में पसीना बहाते नजर आते हैं। वह बताते हैं कि बचपन में उनका सपना पहलवान बनने का था। 1991 में उन्होंने अपने गुरु रघुबीर सिंह रायपुरिया के अखाड़े में एक साल तक प्रशिक्षण भी लिया, लेकिन घर की आर्थिक तंगी के कारण अखाड़ा छोड़ना पड़ा। कई बार घर में देसी घी तक नहीं होता था। ऐसे में उन्होंने घी की जगह सरसों का तेल पीकर अभ्यास किया। अधूरा सपना आज भी उन्हें कचोटता है।

साल 2006 में उनकी शादी हुई। दो बेटियां पढ़ाई कर रही हैं और बेटा हिमांशु पहलवानी कर रहा है। पिता प्रताप का 2010 में निधन हो गया था, जबकि मां आज भी उनके साथ रहती हैं। बेटे को स्टेडियम छोड़ने जाते-जाते उनके भीतर फिर से जुनून जागा और उन्होंने खुद भी अभ्यास शुरू कर दिया। शुरुआत घर में जुगाड़ जिम से हुई, लेकिन अब वह युवाओं के साथ स्टेडियम में नियमित प्रैक्टिस करते हैं।

काला पहलवान सुबह एक्सरसाइज के बाद मैदान पर ही फ्रैश जूस निकालकर पीते हैं।

काला पहलवान रोजाना 20-25 किलोमीटर दौड़ लगाते हैं, जिसे वह वार्मअप मानते हैं। इसके बाद ट्रैक पर ईंटें रखकर 700-800 सपाटे लगाते हैं। उनका दावा है कि यदि रनिंग छोड़ दें तो 2000 सपाटे भी लगा सकते हैं। चार घंटे की कड़ी प्रैक्टिस में बीम एक्सरसाइज और स्ट्रेचिंग भी शामिल है। मैदान में महिला एथलीटों द्वारा ‘ओ गया ताऊ’ कहकर हौसला बढ़ाने वाले उनके वीडियो खूब वायरल हो चुके हैं।

उनकी डाइट भी एकदम देसी है। सुबह 20-25 मुनक्कों का रस, दौड़ के बाद हाथ से चलने वाले जूसर में निकाला गया मौसमी का जूस, और घर पर 65-70 बादाम रगड़कर पीना उनकी रोजमर्रा की आदत है। दूध मिले तो ठीक, नहीं तो कोई जरूरत नहीं। वह रोटी-दाल-सब्जी जो भी मिल जाए खा लेते हैं। प्रोटीन शेक जैसे सप्लीमेंट्स को वह गैरजरूरी मानते हैं।

मैदान पर एक्सरसाइज करते पहलवान संजय।

अब उन्होंने दिल्ली में होने वाली मैराथन के 42 किलोमीटर वर्ग में एंट्री भरी है। उनका कहना है कि जो सपना जवानी में अधूरा रह गया, उसे अब पूरा करने का समय है। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद लोग उन्हें ‘देसी पहलवान’, ‘रनिंग ताऊ’ और ‘हरियाणवी सलमान खान’ कहकर बुलाते हैं। आलोचकों को वह खुला निमंत्रण देते हैं कि मैदान में आकर खुद गिन लें कि वह कितने चक्कर और कितने सपाटे लगाते हैं।