मनीषा डेथ मिस्ट्री, 12 दिन बाद लौटी CBI टीम, बंद कमरे में परिवार से 3 घंटे पूछताछ
भिवानी के ढाणी लक्ष्मण गाँव में मनीषा की संदिग्ध मौत की CBI जांच में परिजन से तीन घंटे पूछताछ हुई। विसरा, FSL और सुसाइड नोट की हैंडराइटिंग रिपोर्टों का इंतजार चल रहा है जबकि पिता ने प्रशासन और नर्सिंग कॉलेज की भूमिका पर सवाल उठाए हैं
➤ CBI फिर आई ढाणी लक्ष्मण गाँव ➤ तीन घंटे परिजनों से पूछताछ करके गई
➤ तीन रिपोर्टों पर जांच फोकस — विसरा, FSL और सुसाइड नोट की हैंडराइटिंग मैचिंग
➤ पिता ने प्रशासन और आइडियल नर्सिंग कॉलेज पर उठाए गंभीर सवाल
भिवानी, 06 अक्टूबर — भिवानी के ढाणी लक्ष्मण गाँव में 19 वर्षीय मनीषा की संदिग्ध मौत के मामले में CBI की चार सदस्यीय टीम सोमवार को वापस पहुंची और उन्होंने बंद कमरे में मनीषा के परिजनों से करीब तीन घंटे तक पूछताछ की, इसके बाद टीम वापस रवाना हुई। जांच अधिकारी इस समय विसरा की रिपोर्ट, घटनास्थल से लिये गये FSL नमूनों की लैब रिपोर्ट और पुलिस द्वारा दिखाए गए सुसाइड नोट की हैंडराइटिंग मैचिंग पर काम कर रहे हैं और तीनों रिपोर्टों के आने के बाद ही केस की दिशा साफ होने की उम्मीद जताई जा रही है।
परिजन विशेषकर पिता संजय कुमार का आरोप है कि शुरुआती जांच के दौरान प्रशासन ने किसी दबाव में आकर मामले की दिशा मोड़ी, और आइडियल नर्सिंग कॉलेज की भूमिका पर उन्होंने सवाल उठाए हैं। उनके मुताबिक मनीषा ने 11 अगस्त को उसी नर्सिंग कॉलेज में दाखिले की जानकारी लेने के लिए घर से निकली थी और कॉलेज की बस से ही गाँव आती-जाती थी, इसलिए कॉलेज स्टाफ और बस के व्यवहार की निष्पक्ष जांच आवश्यक है। पिता का कहना है कि यदि पुलिस ने मामले की शुरुआत में उचित कदम उठाए होते तो मामला इस हद तक नहीं बढ़ता और उन्हें केवल CBI से ही न्याय की आस है।
मनीषा की लाश 13 अगस्त को नहर किनारे खेत में मिली थी तथा इस प्रकरण में तीन बार पोस्टमॉर्टम किए जा चुके हैं, हाल में तीसरी बार पोस्टमॉर्टम दिल्ली के AIIMS में करवाया गया था। मेडिकल टीम द्वारा लिए गए विसरा सैंपलों की रिपोर्ट, दिल्ली से आई FSL टीम द्वारा घटनास्थल से लिए गए सैंपलों की रिपोर्ट और सुसाइड नोट की हैंडराइटिंग की फोरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार है। परिजन और CBI दोनों रिपोर्टों के नतीजों पर मामला स्पष्ट होने की बात कह रहे हैं।
पिता संजय ने बताया कि पुलिस ने जांच में देरी और अनियमितताओं के कारण परिवार को भरोसा कम दिया और बार-बार सरकारी दावे व बयान बदलने से उनके संशय पुख्ता हुए हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस द्वारा सुसाइड नोट पांच दिन बाद अचानक पेश करना भी संदिग्ध है और CBI से उम्मीद है कि वह दूध का दूध और पानी का पानी कर देगी। परिवार का रुख अभी भी नर्सिंग कॉलेज की गतिविधियों पर शक बरकरार है और वे चाहते हैं कि कॉलेज के स्टाफ, बस ड्राइवर व अन्य से कड़ाई से पूछताछ की जाए।
CBI के अधिकारी फिलहाल किसी भी औपचारिक निष्कर्ष से पहले फोरेंसिक रिपोर्टों का इंतजार कर रहे हैं और परिजनों से हुई पूछताछ के आधार पर अतिरिक्त सबूतों और गवाहों के बयान जुटाने की कार्रवाई जारी है
Akhil Mahajan