पानीपत में ट्रांसपोर्टरों का हल्लाबोल, 21 से 23 मई तक चक्का जाम का ऐलान
पानीपत में ट्रांसपोर्टरों ने 21 से 23 मई तक चक्का जाम का ऐलान किया है। हड़ताल के दौरान दूध, फल, सब्जियां और दवाइयों की सप्लाई भी प्रभावित रहेगी।
➤ 3 दिन तक पानीपत से नहीं चलेगी कोई गाड़ी
➤ दूध, फल, सब्जी और दवाइयों की सप्लाई भी रहेगी बंद
➤ ग्रीन टैक्स, भ्रष्टाचार और अवैध वसूली के खिलाफ ट्रांसपोर्टरों का बड़ा आंदोलन
Panipat। हरियाणा के पानीपत में ट्रांसपोर्टरों ने सरकार और प्रशासन के खिलाफ बड़ा मोर्चा खोल दिया है। ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस की बैठक में ट्रांसपोर्टरों ने 21, 22 और 23 मई को पूर्ण चक्का जाम का ऐलान कर दिया। इस दौरान न केवल मालवाहक वाहन बंद रहेंगे, बल्कि दूध, फल, सब्जियां और दवाइयों जैसी आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई करने वाली गाड़ियां भी सड़कों पर नहीं उतरेंगी।
बैठक में मौजूद ट्रांसपोर्टरों ने कहा कि लगातार बढ़ते ग्रीन टैक्स, महंगे डीजल, भ्रष्टाचार और रास्तों में हो रही अवैध वसूली ने उनका कारोबार पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। ट्रांसपोर्टरों ने चेतावनी दी कि अगर उनकी मांगों पर जल्द सुनवाई नहीं हुई तो आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर तक ले जाया जाएगा।
दिल्ली के ग्रीन टैक्स के विरोध में आंदोलन
पानीपत जिला प्रधान धर्मबीर मलिक ने बताया कि दिल्ली में बढ़ाए गए ग्रीन टैक्स के विरोध में ऑल इंडिया ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन कांग्रेस ने देशव्यापी आंदोलन का फैसला लिया है। इसी के तहत पानीपत में भी ट्रांसपोर्टरों की बैठक आयोजित की गई, जिसमें सर्वसम्मति से तीन दिन के चक्का जाम का निर्णय लिया गया।
उन्होंने कहा कि ट्रांसपोर्ट व्यवसाय पहले ही आर्थिक दबाव में है और ऊपर से नए टैक्स और प्रशासनिक कार्रवाईयों ने हालात और खराब कर दिए हैं।
“अब और शोषण बर्दाश्त नहीं”
ट्रांसपोर्टर नेता रमेश मलिक ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि ट्रांसपोर्टर अब चुप बैठने वाले नहीं हैं। उन्होंने साफ कहा कि 21 मई से पानीपत से एक भी गाड़ी नहीं चलेगी।
रमेश मलिक के अनुसार, इस बार आंदोलन को प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक सेवाओं से जुड़ी गाड़ियों को भी हड़ताल में शामिल किया गया है, ताकि सरकार को ट्रांसपोर्टरों की समस्याओं की गंभीरता समझ आ सके।
महंगाई और अवैध वसूली से परेशान ट्रांसपोर्टर
बैठक में शामिल अन्य ट्रांसपोर्टरों ने भी अपनी समस्याएं साझा कीं। उनका कहना था कि डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों ने मुनाफा लगभग खत्म कर दिया है। वहीं, रास्तों में होने वाली कथित अवैध वसूली और प्रशासनिक भ्रष्टाचार ने धंधे को चौपट कर दिया है।
ट्रांसपोर्टरों का आरोप है कि कई जगहों पर बेवजह चालान काटे जा रहे हैं, जिससे आर्थिक बोझ और बढ़ रहा है।
आम जनता को हो सकती है परेशानी
अगर यह हड़ताल तय समय पर लागू होती है, तो पानीपत समेत आसपास के इलाकों में आम लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। दूध, फल, सब्जियों और दवाइयों की सप्लाई बाधित होने से बाजारों में जरूरी सामान की कमी होने की आशंका जताई जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार और प्रशासन ने समय रहते ट्रांसपोर्टरों से बातचीत नहीं की, तो इसका असर आम जनजीवन और व्यापार दोनों पर पड़ सकता है।
Akhil Mahajan