हिसार में फर्जी NIA अधिकारी बनकर रेड, डर से महिला ने गिरवी रखे गहने अब खुलासा

हिसार के गांव भैणी बादशाहपुर में फर्जी NIA अधिकारी बनकर किसान से 80 हजार की ठगी का मामला 4 महीने बाद उजागर, हाईकोर्ट ने जमानत खारिज की।

हिसार में फर्जी NIA अधिकारी बनकर रेड, डर से महिला ने गिरवी रखे गहने अब खुलासा

➤ फर्जी NIA अधिकारी बनकर गांव में दिनदहाड़े रेड, किसान से 80 हजार की ठगी
➤ मामला 4 महीने तक दबाए रखा गया, पुलिस की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल
➤ पीड़ित महिला ने जेवर गिरवी रखकर जुटाई रकम, अब भी सदमे में परिवार


हरियाणा के हिसार जिले में फर्जी NIA (नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी) अधिकारी बनकर की गई रेड का सनसनीखेज मामला चार महीने बाद उजागर हुआ है। गांव भैणी बादशाहपुर में हुई इस घटना में आरोपियों ने खुद को दिल्ली NIA का अधिकारी बताकर किसान परिवार को डराया, धमकाया और 80 हजार रुपए की ठगी कर ली। हैरानी की बात यह रही कि एफआईआर दर्ज होने के बावजूद पुलिस ने इस मामले को लंबे समय तक दबाए रखा, जिससे आरोपी आराम से कानूनी दांव-पेंच खेलते रहे।

मामले में अब जाकर बड़ा मोड़ तब आया, जब पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने दो आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। इसके साथ ही उकलाना पुलिस की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में आ गई है। आरोप है कि पुलिस ने केवल एक आरोपी को गिरफ्तार किया, जबकि नामजद दो अन्य आरोपी महीनों तक खुलेआम घूमते रहे।

फर्जी रेड ऐसे की गई

6 अक्टूबर 2025 को दोपहर करीब 1.30 बजे एक सफेद ब्रेजा कार गांव भैणी बादशाहपुर में किसान सूबे सिंह के घर के सामने आकर रुकी। गाड़ी पर ‘भारत सरकार’ लिखा बोर्ड लगा हुआ था और नंबर HR-06AN-7827 (पानीपत) दर्ज था। कार से तीन युवक उतरे और खुद को दिल्ली NIA का स्टाफ बताया।

आरोपियों में से दीपक कुमार ने पासपोर्ट ऑफिस का फर्जी आई-कार्ड दिखाया, जिससे परिवार पूरी तरह डर गया। तीनों ने किसान और उसके बेटे के मोबाइल फोन जब्त कर जांच शुरू कर दी और आरोप लगाया कि बेटा ऑनलाइन सट्टा खेलता है।

दिल्ली ले जाने की धमकी, सौदेबाजी में 80 हजार

पीड़ित सूबे सिंह के अनुसार, आरोपियों ने कहा कि यदि रकम नहीं दी गई तो बेटे को दिल्ली ले जाकर केस दर्ज किया जाएगा। पहले 2 लाख रुपए की मांग की गई, लेकिन आर्थिक स्थिति कमजोर होने पर सौदा 80 हजार रुपए में तय हुआ।

डर और बदनामी के भय से किसान परिवार ने गांव से पैसे इकट्ठा किए। इस दौरान पीड़ित किसान की पत्नी ने अपने गहने और पारिवारिक जेवर गिरवी रखकर रकम जुटाई। पैसे लेते समय आरोपियों ने साफ धमकी दी कि यदि किसी को कुछ बताया तो दिल्ली उठाकर ले जाएंगे।

4 महीने तक दबा रहा मामला

घटना के बाद शिकायत दर्ज हुई, लेकिन आरोप है कि पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। केवल एक आरोपी दीपक को गिरफ्तार किया गया, जबकि रवि और जयवीर जैसे नामजद आरोपी लंबे समय तक पुलिस की पकड़ से बाहर रहे।

रवि कुमार द्वारा खुद को होमगार्ड बताना पूरे मामले को और संदिग्ध बनाता है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या आरोपियों को किसी स्तर पर संरक्षण प्राप्त था। गाड़ी का नंबर, घटना का समय और गांव में कैमरों की मौजूदगी के बावजूद मुख्य साजिशकर्ता महीनों तक फरार रहे।

हाईकोर्ट से झटका, पुलिस पर सवाल

अब जब मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा, तो अदालत ने दोनों आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। इसके बाद पूरे प्रकरण में पुलिस की भूमिका, देरी और लापरवाही को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

पीड़ित परिवार आज भी सदमे में है और महिला मानसिक रूप से इस घटना से उबर नहीं पाई है। गांव में चर्चा है कि यदि समय रहते कार्रवाई होती, तो आरोपियों को इतने महीनों तक कानून से खेलने का मौका नहीं मिलता।