10 करोड़ भारतीय हाइपरटेंशन, 31.5 करोड़ डायबिटिक: बिना दवा कैसे रख सकते हैं नियंत्रण में, जानें डॉक्टर से
ICMR के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में करोड़ों लोग डायबिटीज और हाई बीपी से ग्रस्त हैं, अधिकांश unaware हैं। नियमित चेकअप और स्वस्थ जीवनशैली से इन्हें नियंत्रित किया जा सकता है।
➤ भारत में 10.1 करोड़ लोग हाइपरटेंशन और 31.5 करोड़ लोग डायबिटीज से पीड़ित
➤ ज्यादातर लोगों को बीमारी का पता नहीं, शुरुआती लक्षण अक्सर नजरअंदाज होते हैं
➤ सही लाइफस्टाइल, नियमित चेकअप और संतुलित आहार से कंट्रोल संभव
ICMR यानी इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के ताजा आंकड़ों के अनुसार भारत में 10.1 करोड़ लोग हाइपरटेंशन से और 31.5 करोड़ लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं। चिंता की बात यह है कि इनमें से अधिकांश लोगों को अपनी स्थिति का पता नहीं होता। यह आंकड़े इस ओर इशारा करते हैं कि हमारी रोजमर्रा की जिंदगी में, चाहे वह ऑफिस का काम हो, घर की जिम्मेदारियां, दोस्तों से मिलना-जुलना या सामान्य दिनचर्या, शरीर में धीरे-धीरे बदलाव होते रहते हैं जिन्हें हम महसूस नहीं कर पाते।
इन नॉन कम्युनिकेबल डिजीज़ को ‘साइलेंट किलर’ कहा जाता है क्योंकि इनके शुरुआती लक्षण अक्सर हल्के या अस्पष्ट होते हैं और जब तक समस्या का पता चलता है, तब तक शरीर को गंभीर नुकसान हो चुका होता है। हाइपरटेंशन और डायबिटीज हृदयाघात, ब्रेन स्ट्रोक और किडनी फेलियर जैसी खतरनाक स्थितियों का कारण बन सकते हैं।
डॉ. एम.के. सिंह का कहना है कि अचानक चक्कर आना, सिर दर्द, सांस फूलना या थकान जैसी शिकायतें शरीर के संकेत होते हैं कि कुछ गड़बड़ है। इन लक्षणों को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। डायबिटीज के शुरुआती लक्षणों में अत्यधिक प्यास, बार-बार पेशाब लगना और थकान शामिल हो सकते हैं। वहीं हाई बीपी में सिर दर्द, चिड़चिड़ापन और कमजोरी दिखाई दे सकती है, जिसे लोग अक्सर तनाव या नींद की कमी समझकर अनदेखा कर देते हैं।
यदि किसी के परिवार में पहले से डायबिटीज या हाई बीपी की समस्या रही है, तो जोखिम और बढ़ जाता है। वहीं, अगर फैमिली हिस्ट्री नहीं है, तो भी गलत लाइफस्टाइल के कारण यह बीमारियां हो सकती हैं। सबसे बड़ी गलती तब होती है जब लोग बिना किसी समस्या के नियमित चेकअप नहीं कराते। रूटीन चेकअप समय रहते बीमारी का पता लगाने में मदद करता है और गंभीर परिणामों को रोकता है।
दवाओं के साथ-साथ लाइफस्टाइल में सुधार करना भी बेहद जरूरी है। नियमित एक्सरसाइज, संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना इन बीमारियों को कंट्रोल करने में सहायक होता है।
डायबिटीज और हाई बीपी से बचने के लिए विशेष रूप से नमक और चीनी का सेवन नियंत्रित करना, रोजाना 30 मिनट का एक्सरसाइज करना, समय-समय पर ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर की जांच करवाना, 7 घंटे की अच्छी नींद लेना और स्ट्रेस मैनेजमेंट करना जरूरी है।
कुछ सामान्य सवाल और जवाब:
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क्या ये बीमारी दवाओं से ही कंट्रोल होती हैं? शुरुआत में लाइफस्टाइल बदलने से दवाओं की जरूरत कम हो सकती है।
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क्या पूरी तरह ठीक हो सकती हैं? नहीं, लेकिन सही इलाज और लाइफस्टाइल से कंट्रोल किया जा सकता है।
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बिना लक्षण भी चेकअप जरूरी? हां, 30 साल के बाद साल में कम से कम एक बार।
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क्या सिर्फ मोटे लोग प्रभावित होते हैं? नहीं, पतले लोग भी जोखिम में।
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क्या मीठा डायबिटीज की वजह बनता है? सीधे नहीं, लेकिन अधिक चीनी मोटापे और टाइप 2 डायबिटीज का कारण बन सकती है।
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क्या हाई बीपी की दवा जीवनभर लेनी होती है? जरूरी नहीं, लाइफस्टाइल सुधार से दवाएं कम या बंद हो सकती हैं।
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क्या तनाव से ब्लड प्रेशर और शुगर बढ़ते हैं? हां, लंबे समय का तनाव हॉर्मोनल बदलाव कर सकता है।
सही जानकारी, समय पर जांच और जीवनशैली में सुधार से इन ‘साइलेंट किलर’ बीमारियों को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।