डीएम पर उत्पीड़न के आरोप, महिला अफसर की चिट्ठी से मचा हडकंप
देहरादून के जिलाधिकारी सविन बंसल पर महिला अधिकारी ने मानसिक उत्पीड़न और अनुचित व्यवहार के आरोप लगाए हैं। मुख्यमंत्री को भेजी चिट्ठी के बाद मामला सचिव स्तर तक पहुंच गया है
➤ महिला क्लास-वन अधिकारी ने मुख्यमंत्री को भेजी शिकायत
➤ देहरादून डीएम सविन बंसल पर मानसिक उत्पीड़न और अनुचित व्यवहार के आरोप
➤ मामला सचिव स्तर तक पहुंचा, मुख्यमंत्री कार्यालय में मंथन तेज
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में उस वक्त प्रशासनिक भूचाल आ गया, जब क्लेमेनटाउन कैंट बोर्ड की महिला सीईओ ने जिलाधिकारी सविन बंसल पर गंभीर आरोप लगाए। क्लास-वन श्रेणी की इस महिला अधिकारी ने स्वयं को मानसिक रूप से प्रताड़ित किए जाने का आरोप लगाते हुए इसकी लिखित शिकायत सीधे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को भेजी है। शिकायत सामने आने के बाद यह मामला अब सचिव स्तर तक पहुंच चुका है, जिससे इसकी संवेदनशीलता और गंभीरता दोनों बढ़ गई हैं।
महिला अधिकारी का आरोप है कि जिलाधिकारी के व्यवहार और कार्यशैली के चलते वह लंबे समय से मानसिक दबाव में थीं। शिकायत में यह भी कहा गया है कि प्रशासनिक मर्यादाओं और पद की गरिमा का उल्लंघन करते हुए उनके साथ कथित तौर पर अनुचित रवैया अपनाया गया। अधिकारी ने अपनी चिट्ठी में पूरे घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए उच्चस्तरीय हस्तक्षेप की मांग की है।
राज्य की राजधानी के जिलाधिकारी जैसे महत्वपूर्ण पद पर बैठे अधिकारी पर इस तरह के आरोप लगना न केवल चौंकाने वाला है, बल्कि इससे सरकार और प्रशासन की छवि पर भी सीधा असर पड़ता है। यही वजह है कि यह मामला अब सिर्फ एक प्रशासनिक शिकायत न रहकर राज्य स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।
अब तक इस पूरे मामले पर डीएम सविन बंसल की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं, शासन स्तर पर भी फिलहाल कोई सार्वजनिक बयान जारी नहीं किया गया है। हालांकि सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री कार्यालय इस शिकायत को बेहद गंभीरता से देख रहा है।
राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में इस बात को लेकर चर्चाएं तेज हैं कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी इस मामले में आगे क्या कदम उठाएंगे। उनके सामने विकल्प हैं— निष्पक्ष जांच के आदेश देना, प्रशासनिक स्तर पर अस्थायी बदलाव करना, या दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोई सख्त फैसला लेना। फिलहाल पूरे प्रदेश की नजरें मुख्यमंत्री के अगले कदम पर टिकी हुई हैं, क्योंकि यह मामला न केवल प्रशासनिक अनुशासन बल्कि महिला अधिकारियों की सुरक्षा और सम्मान से भी जुड़ा माना जा रहा है।
Akhil Mahajan