हिसार कोर्ट ने खारिज की संत रामपाल की जमानत अर्जी, हाईकोर्ट जाएंगे वकील

हिसार कोर्ट ने देशद्रोह केस में संत रामपाल की जमानत याचिका खारिज कर दी। हत्या मामलों में राहत मिलने के बावजूद वे जेल में रहेंगे। वकीलों ने कहा कि जल्द हाईकोर्ट में नई याचिका दाखिल की जाएगी।

हिसार कोर्ट ने खारिज की संत रामपाल की जमानत अर्जी, हाईकोर्ट जाएंगे वकील

देशद्रोह मामले में संत रामपाल की जमानत अर्जी खारिज हिसार कोर्ट का बड़ा फैसला
वकीलों ने हाईकोर्ट में अर्जी लगाने की तैयारी जल्द दाखिल होगी नई याचिका
2014 के अदालत परिसर उपद्रव और हिंसा से जुड़ा मामला 980 से अधिक आरोपी शामिल

अशोक कुंडू 


सतलोक आश्रम संचालक संत रामपाल को देशद्रोह मामले में राहत नहीं मिली है। हिसार की अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश परमिंदर कौर की अदालत ने वीरवार को उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी। रामपाल की ओर से दायर इस अर्जी पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दलील दी कि उन्हें हत्या के मामलों में भी सजा निलंबित हो चुकी है और अब वे लंबे समय से जेल में हैं। लेकिन अदालत ने सभी तर्कों को खारिज करते हुए जमानत मंजूर करने से इनकार कर दिया।

रामपाल की ओर से पेश वकील महेंद्र सिंह नैन और सचिन दास ने कहा कि वे इस फैसले को चुनौती देंगे और जल्द ही पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में जमानत याचिका दायर करेंगे। इस केस में कुल 980 से ज्यादा आरोपी हैं, जिनमें से फिलहाल रामपाल और हाल ही में गिरफ्तार एक अन्य आरोपी जेल में बंद हैं।

रामपाल अब तक चार आपराधिक मामलों से बरी हो चुका है। दो हत्या मामलों में भी हाल ही में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने उनकी सजा निलंबित कर दी है। लेकिन देशद्रोह और अदालत अवमानना से जुड़े इस मामले ने उन्हें फिर से संकट में डाल दिया है।

मामले की जड़ वर्ष 2014 से जुड़ी है। दरअसल, करीब 19 साल पहले रोहतक के करौंधा आश्रम में रामपाल समर्थकों और आर्य समाजियों के बीच खूनी संघर्ष हुआ था। उस प्रकरण की सुनवाई 14 जुलाई 2014 को होनी थी। सुनवाई के लिए रामपाल को हिसार कोर्ट में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश होना था।

लेकिन उसी दिन समर्थकों ने हिसार अदालत परिसर में जमकर उत्पात मचाया। अदालत का शीशा तोड़ा गया, वकीलों के साथ मारपीट हुई और पूरे परिसर को घेर लिया गया। इसके विरोध में जिला बार एसोसिएशन ने अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा की और हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की।

रामपाल की पेशी में लगातार टालमटोल होने पर अदालत ने उनके खिलाफ दो बार गैर-जमानती वारंट जारी किए। इसके बावजूद पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने में विफल रही। आखिरकार, 18 नवंबर 2014 को पुलिस ने आश्रम पर कार्रवाई की। इस दौरान पुलिस पर पेट्रोल बम और गोलियां चलाई गईं। पुलिस ने जवाबी कार्रवाई में आंसू गैस और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया।

इसके बाद रामपाल और उनके समर्थकों पर देशद्रोह, दंगा, अवमानना और अन्य गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया गया। तभी से रामपाल जेल में है और यह मुकदमा लगातार चल रहा है।

कानूनी जानकारों का कहना है कि अब हाईकोर्ट में उनकी याचिका पर सुनवाई अहम होगी, क्योंकि हत्या के मामलों में मिली राहत के बाद देशद्रोह केस ही रामपाल की रिहाई में सबसे बड़ी बाधा बन गया है।