तिरंगे में लिपटे हरियाणा के सपूत को अंतिम विदाई, बेटे ने कहा- पिता की शहादत पर गर्व, सेना में जाऊंगा
महेंद्रगढ़ जिले के अकबरपुर गांव के सूबेदार हीरालाल बारामुला सेक्टर में शहीद हो गए। तिरंगे में लिपटे पार्थिव शरीर का सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।
- बारामुला सेक्टर में ड्यूटी के दौरान सूबेदार हीरालाल शहीद
- अकबरपुर गांव में तिरंगे में लिपटे पार्थिव शरीर को दी गई अंतिम विदाई
- बेटे गजेंद्र ने दी मुखाग्नि, कहा- पिता की शहादत पर गर्व
हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले के नारनौल क्षेत्र से एक बार फिर शहादत की खबर सामने आई है। भारतीय सेना की आतंकवाद विरोधी विशेष इकाई राष्ट्रीय राइफल्स (RR) में तैनात सूबेदार हीरालाल उत्तरी कश्मीर के बारामुला सेक्टर में पेट्रोलिंग के दौरान वीरगति को प्राप्त हो गए। उनकी शहादत की खबर से पूरे क्षेत्र में शोक और गर्व का माहौल है।
शहीद सूबेदार हीरालाल का तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव अकबरपुर पहुंचा। गांव में कुछ समय के लिए पार्थिव देह को अंतिम दर्शन के लिए रखा गया, जहां परिजन, ग्रामीण और जनप्रतिनिधि भावुक नजर आए। इसके बाद पार्थिव शरीर को श्मशान घाट ले जाया गया, जहां पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।
शहीद के बेटे गजेंद्र ने पिता को मुखाग्नि दी। इस दौरान गजेंद्र ने कहा कि उन्हें अपने पिता की शहादत पर गर्व है और वह भी सेना में जाकर देश की सेवा करेगा। बेटे के शब्दों ने वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम कर दीं।
अंतिम संस्कार में नांगल चौधरी से विधायक मंजू चौधरी, पंचायत समिति अध्यक्ष कर्मपाल, DSP सुरेश कुमार, SHO भगत सिंह, पूर्व चेयरमैन प्रवीण चौधरी, विकास यादव बड़कोदा, विनोद यादव भील, प्रमोद ताखर और बलदेव सिंह चहल सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
जानकारी के अनुसार, 9 जनवरी को सूबेदार हीरालाल अपने साथियों के साथ एक बेहद संवेदनशील और दुर्गम पहाड़ी इलाके में नियमित पेट्रोलिंग पर थे। बर्फ जमे और फिसलन भरे संकरे रास्ते पर संतुलन बिगड़ने से वह खाई में गिर गए, जिससे मौके पर ही उनकी शहादत हो गई।
सूबेदार हीरालाल का जन्म 27 अप्रैल 1981 को गांव अकबरपुर में हुआ था। उन्होंने 30 जनवरी 2000 को भारतीय सेना जॉइन की थी। करीब 23 वर्षों की सेवा के दौरान उन्होंने जम्मू-कश्मीर सहित कई कठिन इलाकों में ड्यूटी निभाई। 23 मई 2023 को उन्हें सूबेदार के पद पर पदोन्नत किया गया था।
शहीद के परिवार में 88 वर्षीय पिता हरिराम, पत्नी रोशनी देवी, बेटा गजेंद्र और बेटी स्नेहलता हैं। पिता हार्ट के मरीज हैं। बेटा IIT पुणे में पढ़ाई कर रहा है, जबकि बेटी दिल्ली में नर्सिंग की पढ़ाई कर रही है। परिजनों का कहना है कि हीरालाल परिवार की रीढ़ थे।
अकबरपुर गांव में शहीद की अंतिम यात्रा के दौरान तिरंगा यात्रा निकाली गई। गांव की गलियों से गुजरते समय हर घर से श्रद्धांजलि अर्पित की गई। ग्रामीणों ने कहा कि यह गांव के लिए गर्व और गम दोनों का क्षण है, जब एक बेटा देश के लिए अपने प्राण न्योछावर कर अमर हो गया।
Akhil Mahajan