मुरथल विश्वविद्यालय में मैस कर्मचारी यूनियन ने छंटनी के खिलाफ आमरण अनशन शुरू

मुरथल विश्वविद्यालय में मेस कर्मचारी यूनियन के सचिव राजेश कुमार गोस्वामी की गैरकानूनी छंटनी के विरोध में आमरण अनशन शुरू। कर्मचारियों ने भाई-भतीजावाद, भ्रष्टाचार और अन्याय के खिलाफ पारदर्शी जांच व पुनः बहाली की मांग उठाई।

मुरथल विश्वविद्यालय में  मैस कर्मचारी यूनियन  ने छंटनी के खिलाफ आमरण अनशन शुरू

राजेश कुमार गोस्वामी की गैरकानूनी छंटनी के खिलाफ आमरण अनशन
मेस सुपरवाइज़र नियुक्ति में भाई-भतीजावाद और भ्रष्टाचार के आरोप
कर्मचारियों की पुनः बहाली, पारदर्शी जांच और HKRN में शामिल करने की मांग


सोनीपत। दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं तकनीकी विश्वविद्यालय, मुरथल में मेस कर्मचारियों के साथ हुए गंभीर प्रशासनिक अन्याय ने एक बड़े आंदोलन का रूप ले लिया है। मेस कर्मचारी यूनियन के सचिव राजेश कुमार गोस्वामी, जो पिछले अठारह वर्षों से सेवा दे रहे थे, उन्हें अचानक और बिना किसी लिखित कारण के नौकरी से हटा दिया गया।

यह विवाद तब उठा जब हॉस्टल नंबर 1 के मेस सुपरवाइज़र की नियुक्ति को लेकर कर्मचारियों ने आवाज़ उठाई। उनका आरोप है कि सेवानिवृत्त सुपरवाइज़र की जगह परंपरा के अनुसार वरिष्ठ कर्मचारियों को मौका देने के बजाय एक बाहरी व्यक्ति, जो संबंधित अधिकारी का रिश्तेदार है, को नियुक्त करने की साजिश की गई। कर्मचारियों ने इस पर आपत्ति जताई और शिकायत दर्ज कराई, लेकिन प्रशासन ने शिकायत का समाधान करने के बजाय शिकायतकर्ता राजेश को ही हटा दिया

इस निर्णय से न केवल राजेश के तीन छोटे बच्चों वाला परिवार आर्थिक संकट में आ गया बल्कि कर्मचारियों के बीच भी गहरा आक्रोश फैल गया। लगातार निवेदन और अपील के बावजूद कुलपति, कुलसचिव एवं चीफ वॉर्डन ने इस मामले पर कोई सुनवाई नहीं की।

अब राजेश कुमार गोस्वामी ने वाइस-चांसलर ऑफिस के बाहर आमरण अनशन शुरू कर दिया है, जिसमें बड़ी संख्या में मेस कर्मचारी भी उनके समर्थन में धरने पर बैठे हैं। आंदोलन का नेतृत्व सर्व कर्मचारी संघ सोनीपत के पूर्व उपप्रधान एवं सीटू के वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा कर रहे हैं।

कर्मचारियों की प्रमुख मांगें हैं –

  • सभी हॉस्टल वर्कर और मेस कर्मचारियों को हरियाणा कौशल रोजगार निगम (HKRN) में शामिल किया जाए।

  • राजेश कुमार गोस्वामी की तत्काल पुनः बहाली की जाए और उनका दो माह का रुका वेतन जारी हो।

  • हॉस्टल नंबर 1 के मेस सुपरवाइज़र की नियुक्ति की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।

  • नियुक्तियों में वरिष्ठता, योग्यता और सेवा भाव को प्राथमिकता दी जाए।

कर्मचारियों का कहना है कि जब तक उनकी सभी मांगें पूरी नहीं होंगी, आंदोलन जारी रहेगा। यह संघर्ष न केवल नौकरी की सुरक्षा के लिए है बल्कि विश्वविद्यालय की गरिमा, पारदर्शिता और न्याय को बचाने के लिए भी है।