CJI सूर्यकांत का बड़ा फैसला: मां की जाति पर मिलेगा SC सर्टिफिकेट

CJI सूर्यकांत का ऐतिहासिक फैसला, मां की जाति के आधार पर बेटी को मिला अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र। पिता की जाति तय करने का पुराना नियम चुनौती के घेरे में। देशभर में चर्चा।

CJI सूर्यकांत का बड़ा फैसला: मां की जाति पर मिलेगा SC सर्टिफिकेट
  • CJI सूर्यकांत का ऐतिहासिक फैसला

  • मां की जाति के आधार पर बेटी को मिला SC प्रमाण पत्र

  • पिता की जाति निर्णायक मानने की पुरानी धारणा को चुनौती


    सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश CJI सूर्यकांत ने एक ऐतिहासिक निर्णय देते हुए कहा कि बदलते सामाजिक ढांचे में मां की जाति के आधार पर भी बच्चे को अनुसूचित जाति (SC) का प्रमाण पत्र जारी किया जा सकता है। इस फैसले ने लंबे समय से चल रही उस परंपरा को चुनौती दी है, जिसमें जाति निर्धारण का अधिकार केवल पिता की जाति के आधार पर माना जाता था।

यह फैसला उस याचिका पर आया जिसमें एक मां ने अपने तीन बच्चों को अपने जाति प्रमाण पत्र के आधार पर अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र जारी करने की मांग की थी। याचिकाकर्ता ने बताया कि उसकी शादी के बाद उसका पति भी उसके माता-पिता के घर में ही रह रहा था, और बच्चे सामाजिक व सांस्कृतिक रूप से हिंदू आदि द्रविड़ समुदाय में ही पले-बढ़े।

CJI सूर्यकांत ने टिप्पणी करते हुए कहा—

"बदलते समय के साथ माता की जाति के आधार पर प्रमाण पत्र क्यों नहीं जारी किया जाना चाहिए? यदि पिता की उच्च जाति को ही आधार मानें, तो अनुसूचित जाति की महिला द्वारा उच्च जाति में विवाह करने पर उसके बच्चे भी SC प्रमाण पत्र के हकदार हो जाएंगे, भले वे उच्च जाति के परिवेश में पले-बढ़े हों।"

फिलहाल प्रचलित नियमों के अनुसार, 5 मार्च 1964 और 17 फरवरी 2002 की राष्ट्रपति अधिसूचनाओं तथा गृह मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के तहत जाति निर्धारण का मुख्य आधार पिता की जाति और स्थायी निवास है। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पुनीत राय बनाम दिनेश चौधरी (2003) में भी पिता की जाति को निर्णायक कारक माना गया था।

इस नए फैसले के बाद जाति प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव संभव माना जा रहा है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय विशेष रूप से उन महिलाओं के अधिकारों और सामाजिक न्याय को मजबूत करेगा, जो विवाह के बाद भी भेदभाव का सामना करती हैं।