हरियाणा के इस IAS अफसर पर नहीं चलेगा केस, ट्रांसफर करने के बदले 3 लाख रिश्वत लेने का आरोप
हरियाणा में IAS अधिकारी जयवीर आर्य पर रिश्वत लेने का आरोप लगा था, लेकिन सरकार ने परमिशन न लेने का हवाला देते हुए केस चलाने से इंकार किया। अन्य आरोपियों पर SIT की जांच जारी। जयवीर आर्य को राहत मिली है।
➤ IAS जयवीर आर्य पर रिश्वत मामले में केस नहीं चलेगा
➤ सरकार ने अनुमति न लेने का कारण बताया, भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम धारा 17-ए उल्लंघन
➤ जयवीर आर्य को राहत, अन्य आरोपियों की जांच SIT कर रही है
हरियाणा में IAS अधिकारी जयवीर आर्य पर रिश्वत लेने के आरोप में चल रही जांच में बड़ा मोड़ आया है। जयवीर आर्य को वेयर हाउसिंग कॉर्पोरेशन में पोस्टिंग के लिए ₹3 लाख की रिश्वत लेने के आरोप में पकड़ा गया था। लेकिन एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) द्वारा सरकार से मांगी गई जांच की अनुमति को खारिज कर दिया गया है। हरियाणा सरकार ने स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की धारा 17-ए के तहत रेड से पहले सरकार से परमिशन नहीं ली गई थी। इसलिए जयवीर आर्य के खिलाफ केस चलाना संभव नहीं है।
इस मामले में जयवीर सिंह आर्य के अलावा मनीष शर्मा, हरियाणा वेयर हाउसिंग कॉर्पोरेशन के अधिकारी संदीप घनघस और कॉनफेड के जनरल मैनेजर राजेश बंसल भी आरोपी बने थे। मामला 2023 में सामने आया था, जब करनाल में वेयरहाउसिंग की जिला प्रबंधक रिंकू हुड्डा के पति ने एसीबी को शिकायत दी। शिकायत में कहा गया कि उनकी पत्नी को कुरुक्षेत्र में पोस्टिंग दिलाने के लिए जयवीर आर्य ने ₹5 लाख की रिश्वत मांगी थी।
12 अक्टूबर 2023 को पंचकुला में ACB टीम ने मनीष शर्मा को 3 लाख रुपए लेते हुए गिरफ्तार कर लिया। जांच में यह खुलासा हुआ कि यह सेटिंग संतोष बंसल के माध्यम से की गई थी, जबकि संदीप घनघस ने रिंकू हुड्डा से संपर्क कर मनीष शर्मा के पास राशि जमा कराई। ACB ने जयवीर आर्य को भी गिरफ्तार कर लिया। मामले की जांच में यह भी सामने आया कि यह रिश्वत देहरादून के एक होटल में तय हुई थी।
नवंबर 2023 में जयवीर आर्य को कोर्ट से नियमित जमानत मिली थी। उन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा था कि उन्हें फंसाया गया है। वहीं, जांच अभी भी SIT द्वारा जारी है।
फरवरी 2024 में हरियाणा के तत्कालीन एडवोकेट जनरल प्रविंद्र सिंह चौहान ने सरकार से राय मांगी थी, जिसके बाद सरकार ने स्पष्ट कर दिया कि IAS अधिकारी पर कार्रवाई के लिए पूर्व अनुमति जरूरी थी, जो नहीं ली गई थी। इसके चलते जयवीर आर्य को इस केस में राहत मिल गई है।
सरकार की इस निर्णय से यह संदेश गया है कि उच्च पदस्थ अधिकारियों के खिलाफ जांच में विशेष प्रक्रिया का पालन अनिवार्य होगा। फिलहाल अन्य आरोपियों पर भी जांच जारी है ताकि पूरी सच्चाई सामने आ सके।