इंदौर में चूहों से दो नवजातों की मौत, राहुल गांधी बोले—यह हत्या है

इंदौर के एमवाय अस्पताल में दो नवजात शिशुओं की चूहों के काटने से मौत की घटना पर राहुल गांधी ने सरकार पर हमला बोला, इसे सीधी हत्या बताया। प्रशासन ने नर्स अधिकारियों को निलंबित किया और पेस्ट कंट्रोल एजेंसी पर जुर्माना लगाया। उच्च स्तरीय जांच जारी है।

इंदौर में चूहों से दो नवजातों की मौत, राहुल गांधी बोले—यह हत्या है

➤ इंदौर के एमवाई अस्पताल में दो नवजात शिशुओं की मौत, आरोप—चूहों ने काटा
➤ राहुल गांधी ने इस घटना को “हत्या” करार दिया, सरकार पर “जीवनदान नहीं मौत के अड्डे” का आरोप
➤ प्रशासन ने पेस्ट कंट्रोल कंपनी को जुर्माना, नर्स अधिकारियों को निलंबित, और उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया


 मध्य प्रदेश के इंदौर स्थित एमवाय अस्पताल (Maharaja Yashwantrao Hospital) में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई — नवजात शिशुओं को चूहों ने काट लिया, जिससे दो मासूमों की जान चली गई। पहली शिशु की मौत मंगलवार सुबह, और दूसरी बुधवार को हो गई। हालांकि अस्पताल प्रशासन ने मौत के पीछे निमोनिया और सेप्टीसीमिया जैसी पूर्व चिकित्सीय स्थितियों को कारण बताया है, लेकिन परिवारों और विपक्ष के हमलों ने इस दावे को चुनौती दी है।
विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इसे सिर्फ त्रासदी नहीं, बल्कि “सीधी-सीधी हत्या” बताया। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि यह ऐसी घटना है जो मानवता को शर्मशार कर देती है—“एक मां की गोद से बच्चा छीन लिया गया, क्योंकि सरकार अपनी सबसे बुनियादी ज़िम्मेदारी तक नहीं निभा सकी। सरकारी अस्पताल अब ‘रिपहाइट इंस्टीट्यूशन्स’ नहीं, बल्कि ‘dens of death’ बन गए हैं।” उन्होंने तत्काल पीएम मोदी और एमपी सीएम से शर्मसारि दिखाने की माँग की और जवाबदेही की अपील की।
घटना के तुरंत बाद पेस्ट कंट्रोल एजेंसी पर 1 लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया और उसे टैर्मिनेट कर दिया गया। इंदौर अस्पताल के दो नर्सिंग अधिकारी निलंबित कर दिए गए, और नर्सिंग सुपरिटेंडेंट को पद से हटा दिया गया। मामले की जांच के लिए उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है। चिकित्सा शिक्षा आयुक्त तरुण राठी ने अस्पताल का दौरा किया और अस्पताल प्रशासन से रिपोर्ट मांगी।
राष्ट्रीय बाल अधिकार सुरक्षा आयोग (NCPCR) ने भी इस मामले का संज्ञान लिया है और जिला कलेक्टर से तीन दिनों में रिपोर्ट मांगी है। वर्तमान समय में यह मामला सिर्फ चिकित्सा लापरवाही नहीं, बल्कि देशभर में सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था की कमजोरी पर बहस का केंद्र बना हुआ है।