ग्रामीण उद्यमिता को नई दिशा, युवाओं में आत्मनिर्भरता की झलक
निफ्टेम–कुंडली द्वारा रिठोरा गाँव में 10 दिवसीय अंगीकरण कार्यक्रम सफल। फूड प्रोसेसिंग प्रशिक्षण, स्वास्थ्य शिविर, पौधारोपण, महिला सशक्तिकरण और 6 बेटियों को आर्थिक सहायता से विकास की दिशा मजबूत।
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निफ्टेम–कुंडली का 10 दिवसीय गाँव अंगीकरण कार्यक्रम रिठोरा में सफल
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महिला सशक्तिकरण, फूड प्रोसेसिंग प्रशिक्षण और स्वच्छता जागरूकता पर विशेष फोकस
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6 जरूरतमंद बेटियों को आर्थिक सहायता, युवाओं में उद्यमिता की नई ऊर्जा
केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय (MoFPI) के अंतर्गत संचालित राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी उद्यमिता एवं प्रबंधन संस्थान (NIFTEM–K), कुंडली, सोनीपत द्वारा 18 से 28 नवंबर 2025 तक रिठोरा, नंदगांव में आयोजित गाँव अंगीकरण कार्यक्रम ने ग्रामीण विकास, महिला सशक्तिकरण, खाद्य प्रसंस्करण और सामाजिक सुधार की दिशा में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है। कार्यक्रम का संचालन प्रोफेसर डॉ. मुरलीधर मेघवाल के मार्गदर्शन में हुआ, जिनकी नेतृत्व क्षमता और संवेदनशील दृष्टि ने विद्यार्थियों में जिम्मेदारी व सामाजिक सेवा की भावना को और दृढ़ किया।
कार्यक्रम की शुरुआत स्वच्छ व हरित पर्यावरण के संकल्प के साथ हुई, जहां विद्यालयों व पंचायत भवन में मीठा नीम, बेल, गुलाब, कनेर, जामुन और छायादार पौधों का रोपण किया गया। इसके बाद स्वच्छता, महिला सशक्तिकरण, बेटी शिक्षा और सामाजिक एकता पर प्रेरक रैली निकाली गई, जिसने गाँव के हर वर्ग में जागरूकता की नई लहर पैदा की।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती के उद्देश्य से टीम ने डेयरी, फ़्लोर मिल, बेकरी, बायोगैस प्लांट और आयुर्वेदिक औषधि इकाइयों का निरीक्षण किया। विद्यार्थियों ने गुणवत्ता प्रबंधन, उत्पादन तकनीक और उद्यमिता की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की। निरीक्षणों से स्पष्ट हुआ कि ग्रामीण उद्योगों में अपार संभावनाएं हैं और फूड प्रोसेसिंग के माध्यम से युवा रोजगार व आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ सकते हैं।
स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बरसाना के सहयोग से विशाल चिकित्सा शिविर लगाया गया, जिसमें ग्रामीणों को निःशुल्क स्वास्थ्य जांच व दवाएं उपलब्ध कराई गईं। प्रतिदिन फूड प्रोसेसिंग, फूड एडुल्टरेशन पहचान, स्वच्छता व सुरक्षित भोजन पर प्रशिक्षण दिया गया, जिसे विशेष रूप से महिलाओं ने उत्साह से अपनाया।
निफ्टेम–कुंडली की टीम ने ग्रामीणों को वैल्यू एडिशन, कैश क्रॉपिंग, मृदा स्वास्थ्य व कृषि आधारित सरकारी योजनाओं की जानकारी दी। विशेष व्याख्यानों के बाद अनेक ग्रामीणों ने प्रशिक्षण के लिए पंजीकरण किया और प्रमाणपत्र प्राप्त किए, जो भविष्य में ग्रामीण औद्योगिक विकास की बड़ी पहल कहा जा रहा है।
गाँव का सर्वांगीण विकास समझने के लिए घर–घर सर्वेक्षण किया गया। वहीं डॉ. रोहित मित्तल द्वारा AIDS और HIV जागरूकता पर विशेषज्ञ व्याख्यान दिया गया। कार्यक्रम के दौरान आयोजित मेहंदी व कुकिंग प्रतियोगिता ने महिलाओं की प्रतिभा को मंच दिया, जबकि बच्चों के लिए आयोजित सामान्य ज्ञान व भगवद्गीता क्विज ने उनके आत्मविश्वास को मजबूत किया।
सबसे भावुक क्षण वह था जब निफ्टेम–कुंडली टीम ने गाँव की 6 गरीब व जरूरतमंद बेटियों को ₹5000–₹5000 की आर्थिक सहायता प्रदान की। यह दृश्य पूरे गाँव को भावुक कर गया और ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ की भावना को वास्तविक रूप दिया।
कार्यक्रम की सफलता में GRS गोविंद दुबे और ग्राम प्रधान श्री राधे श्याम शर्मा का महत्वपूर्ण सहयोग रहा। अंततः यह सिद्ध हुआ कि ज्ञान, तकनीक और संवेदनशीलता मिलकर गाँव को आत्मनिर्भरता व समृद्धि की राह पर ले जा सकती हैं। यह कार्यक्रम रिठोरा गाँव के लिए परिवर्तन की नई शुरुआत है।
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