हरियाणा में कांग्रेस को झटका, पूर्व मंत्री संपत सिंह ने छोड़ी पार्टी
हरियाणा के वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री प्रो. संपत सिंह ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया। खड़गे को लिखे छह पन्नों के पत्र में राज्य नेतृत्व पर भ्रष्टाचार, परिवारवाद और टिकट चोरी के गंभीर आरोप लगाए।
• प्रो. संपत सिंह ने कांग्रेस पार्टी से दिया इस्तीफा
• राज्य नेतृत्व पर लगाया भ्रष्टाचार, परिवारवाद और गुटबाज़ी के गंभीर आरोप
• कहा — “अब पार्टी जनता नहीं, परिवार की हो गई है”
हरियाणा के वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री प्रोफेसर संपत सिंह ने रविवार को कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को 6 पन्नों का विस्तृत पत्र लिखकर अपनी नाराजगी और कारण स्पष्ट किए। अपने पत्र में संपत सिंह ने प्रदेश नेतृत्व पर भ्रष्टाचार, गुटबाज़ी और परिवारवाद को बढ़ावा देने का गंभीर आरोप लगाया है।
उन्होंने लिखा कि उन्होंने 2009 में कांग्रेस पार्टी जॉइन की थी, लेकिन पार्टी ने लगातार उनके अनुभव और योगदान की अनदेखी की। उन्हें दो बार टिकट से वंचित किया गया और संगठन में कोई जिम्मेदारी नहीं दी गई। उनका कहना है कि राज्य नेतृत्व ने पार्टी को अपनी “व्यक्तिगत जायदाद” बना लिया है, जहां निष्ठा की जगह चाटुकारिता को महत्व दिया जा रहा है।
संपत सिंह ने अपने पत्र में यह भी लिखा कि कांग्रेस की गिरती साख का जिम्मेदार वही नेतृत्व है जिसने 2005 से लगातार पार्टी को हार की राह पर धकेला। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कांग्रेस का हाल इतना खराब हो गया है कि “अब यह पार्टी जनता की नहीं, बल्कि परिवार की सेवा में लगी है।”
उन्होंने अपने पत्र में उन नेताओं का भी जिक्र किया जो गुटबाजी और अपमान से परेशान होकर पार्टी छोड़ चुके हैं, जैसे भजनलाल, राव इंद्रजीत सिंह, कुलदीप बिश्नोई, बिरेन्द्र सिंह, अजय माकन, अशोक तंवर आदि। उन्होंने कहा कि “हर बार जनता ने भरोसा जताया, लेकिन नेतृत्व ने उसी भरोसे को तोड़ा।”
संपत सिंह ने कहा — “मैंने अपने जीवन का अधिकांश हिस्सा हरियाणा की सेवा में लगाया है। पर अब कांग्रेस जनता के बजाय कुछ व्यक्तियों की पार्टी बन चुकी है। मैं अपने प्रदेश के लोगों से विश्वासघात नहीं कर सकता, इसलिए मैं पार्टी छोड़ रहा हूं।”
उन्होंने कांग्रेस के 2024 विधानसभा चुनावों में मिली हार को “नेतृत्व की विफलता का परिणाम” बताया। उनका कहना है कि टिकट और वोटों की “चोरी” तक हुई, और केंद्रीय नेतृत्व आंखें मूंदे बैठा रहा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि “कुंवारी सैलजा जैसी वरिष्ठ दलित नेता को हाशिये पर डालना कांग्रेस की सबसे बड़ी गलती थी।”
पत्र के अंत में उन्होंने कहा — “मैं कांग्रेस छोड़ रहा हूं, लेकिन हरियाणा की जनता के लिए मेरा समर्पण हमेशा रहेगा।”
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