सिजेरियन ऑपरेशन के दौरान महिला के गर्भ में छोड़ दी पट्टी, आंत काटकर पट्टी निकाली गई
यमुनानगर के निजी अस्पताल में सिजेरियन ऑपरेशन के दौरान महिला के गर्भ में सर्जिकल स्पंज छोड़ देने की गंभीर लापरवाही उजागर। जांच प्रशासन की उदासीनता से अटकी हुई, परिजनों ने कॉल डिटेल व सीसीटीवी फुटेज की मांग की।
➤ यमुनानगर में सर्जिकल स्पंज गर्भ में छोड़ा गया
➤ पुलिस की लेटलतीफी से जांच अटकी
➤ मंत्री बेदी ने सख्ती से कार्रवाई का आदेश दिया
यमुनानगर के एक निजी अस्पताल में सिजेरियन ऑपरेशन के दौरान एक महिला के गर्भ में सर्जिकल स्पंज (पट्टी) छोड़ दिए जाने का मामला सामने आया। पीड़िता के परिजन आरोपित डॉक्टरों के खिलाफ शिकायत दर्ज करवा चुके हैं, लेकिन 100 से अधिक दिन बीत जाने के बावजूद जांच में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई। डीसी के आदेश पर गठित जांच कमेटी उपमंडल दंडाधिकारी (एसडीएम) द्वारा शुरू की गई थी, लेकिन पुलिस प्रशासन की उदासीनता के कारण यह जांच पूरी नहीं हो पाई।
एसडीएम और पुलिस प्रशासन में संवादहीनता: कॉल डिटेल्स व सीसीटीवी फुटेज नहीं उपलब्ध
पीड़िता के परिजनों ने आरोपी डिप्टी सिविल सर्जन की कॉल डिटेल्स, जीरो लोकेशन और निजी अस्पताल में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज जांच के लिए उपलब्ध कराने की मांग की थी। एसडीएम कार्यालय ने 4 जुलाई और 11 अगस्त को पुलिस अधीक्षक कार्यालय को पत्र लिखकर आवश्यक जानकारी मांगी थी, लेकिन कोई रिपोर्ट नहीं मिली। केवल कष्ट निवारण समिति की बैठक से चार दिन पहले, 4 सितंबर को पुलिस ने कुछ जानकारी उपलब्ध कराई। लेकिन कॉल डिटेल्स व लोकेशन डेटा नहीं सौंपी गई।
जांच अधर में लटकी, पीड़िता के परिवार का आरोप
परिजनों का कहना है कि एसडीएम कार्यालय द्वारा मंत्री कृष्ण बेदी को दी गई लिखित जानकारी में स्पष्ट था कि कॉल डिटेल्स व लोकेशन डेटा जांच के लिए जरूरी है। बावजूद इसके पुलिस प्रशासन की ओर से कोई तेजी नहीं दिखी। पीड़िता के परिवार ने बताया कि वे मिनी सचिवालय और पुलिस थानों के बार-बार चक्कर काट रहे हैं, लेकिन केवल आश्वासन ही मिल रहे हैं। उनका कहना है कि प्रशासन ने भरोसे को पूरी तरह तोड़ दिया।
डिप्टी सिविल सर्जन के खिलाफ गंभीर आरोप
शिकायतकर्ता ओसामा ने बताया कि ग्रीवांस कमेटी की मीटिंग में एसडीएम ने यह जानकारी दी कि ऑपरेशन के दौरान सर्जिकल स्पंज गर्भ में छोड़ा गया था। मंत्री कृष्ण बेदी ने इस पर सख्ती दिखाते हुए अगले चरण में सीएमओ व मेडिकल बोर्ड को मामले में पेश होने के आदेश दिए। इस मामले में आरोपी महिला डॉक्टर के पति डिप्टी सिविल सर्जन भी शामिल बताए जा रहे हैं। परिजनों के अनुसार, डिप्टी सिविल सर्जन ने अपनी पत्नी के साथ निजी अस्पताल में ऑपरेशन करवाया था।
एसडीएम का पक्ष: जांच पूरी होने के बाद जानकारी साझा की जाएगी
एसडीएम विश्वनाथ ने कहा कि मामला गोपनीय है और पूरी जांच के बाद ही रिपोर्ट सौंपी जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच पूरी होने से पहले किसी भी जानकारी को साझा नहीं किया जा सकता। वहीं पुलिस अधीक्षक कमलदीप गोयल ने बताया कि जांच में सहयोग जारी है और डिप्टी सीएमओ की कॉल डिटेल व लोकेशन एसडीएम को सौंप दी गई है।
पीड़िता का दर्द: गलत रिपोर्ट के कारण इलाज में देरी
ओसामा ने बताया कि 13 मार्च को उनकी पत्नी मेहर खातून का ऑपरेशन हुआ था। ऑपरेशन के बाद उन्हें छुट्टी 15 मार्च को दी गई। लेकिन दर्द होने पर जांच के लिए अल्ट्रासाउंड और सीटी स्कैन कराए गए। आरोप है कि स्थानीय डायग्नोस्टिक सेंटरों ने मिलभगत से फर्जी रिपोर्ट बनाई। 21 मई को पंचकूला के अस्पताल में पता चला कि गर्भ में पट्टी है। इसके बाद 24 मई को आंत काटकर पट्टी निकाली गई।
परिजनों की मांग: लाइसेंस रद्दीकरण और सख्त कार्रवाई
परिजन आरोपी महिला डॉक्टर, उसके पति (डिप्टी सिविल सर्जन), दो डायग्नोस्टिक सेंटर संचालकों व एक अन्य प्राइवेट डॉक्टर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। डीसी पार्थ गुप्ता ने पांच सदस्यीय जांच कमेटी गठित कर मामले की जांच करने का आश्वासन दिया था।