स्क्रैप व्यापारी सुमित कुमार हत्याकांड के चारों आरोपियों को उम्रकैद
गुरुग्राम में स्क्रैप व्यापारी सुमित कुमार हत्याकांड में कोर्ट ने सात दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। एक आरोपी प्रहलाद उर्फ पिंटू को शस्त्र अधिनियम में 12 साल की अतिरिक्त कैद और 50 हजार जुर्माना लगा। यह हत्या सितंबर 2022 में हुई थी।
• गुरुग्राम कोर्ट ने सात दोषियों को सुनाई उम्रकैद की सजा
• एक आरोपी प्रहलाद उर्फ पिंटू को शस्त्र अधिनियम में 12 साल की अतिरिक्त कैद
• 1 सितंबर 2022 को हुई थी स्क्रैप व्यापारी सुमित कुमार की हत्या
चर्चित स्क्रैप व्यापारी सुमित कुमार हत्याकांड में अदालत ने सातों आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुनील कुमार दीवान की कोर्ट ने सोमवार को यह फैसला सुनाते हुए कहा कि अपराध गंभीर प्रकृति का था और समाज में भय पैदा करने वाला है। साथ ही, आरोपी प्रहलाद उर्फ पिंटू को शस्त्र अधिनियम के तहत 12 साल की अतिरिक्त कैद और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा भी सुनाई गई।
यह मामला 1 सितंबर 2022 का है, जब भोड़ा कलां गांव निवासी 30 वर्षीय सुमित कुमार की गोलियों से हत्या कर दी गई थी। सुमित अपने पिता के साथ बाइक पर वर्करों को खाना देने जा रहा था। तभी गोपी के घर के पास घात लगाए बैठे 5-6 युवकों ने गोलियां चला दीं। गोली लगने से सुमित गंभीर रूप से घायल हो गया। परिजन उसे तुरंत मेदांता अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
मृतक के पिता ने पुलिस को दी शिकायत में कहा था कि सुमित का कारोबार तेजी से बढ़ रहा था, जिससे गांव के कुछ लोग ईर्ष्या और रंजिश रखते थे। पुलिस ने शिकायत के आधार पर बिलासपुर थाने में मामला दर्ज किया।
जांच के दौरान पुलिस ने प्रहलाद उर्फ पिंटू, जोगेंद्र उर्फ कालू, हरेंद्र उर्फ हनी, मोहित, बिट्टू, अमित और भूपेंद्र उर्फ भोलू, सभी भोड़ा कलां निवासी, को गिरफ्तार किया। पुलिस ने पर्याप्त सबूत और गवाह पेश कर कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की।
लंबी सुनवाई के बाद, कोर्ट ने सभी सातों को दोषी करार दिया और उन्हें धारा 302 (हत्या), 120B (आपराधिक साजिश), 148 (दंगा, घातक हथियार से लैस), और 149 (गैरकानूनी सभा) के तहत उम्रकैद और जुर्माने की सजा सुनाई। दोषियों को गुरुग्राम जिला जेल भेज दिया गया है।
अदालत ने कहा कि यह हत्या केवल व्यक्तिगत रंजिश का परिणाम नहीं थी बल्कि एक संगठित अपराध की तरह अंजाम दी गई थी। ऐसे मामलों में सख्त सजा देकर ही समाज में कानून का डर कायम किया जा सकता है।
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