IPS-ASI की मौत के बाद सवालों में पुलिस! नए डीजीपी ओ.पी. सिंह ने हरियाणा पुलिस को याद दिलाया बलिदान और सेवा का 'धर्म'
हरियाणा के नए डीजीपी ओ.पी. सिंह ने पुलिस कर्मियों को एक प्रेरणादायक संदेश जारी किया है। उन्होंने पुलिस को प्रजातंत्र की मर्यादा बनाए रखने, 84 शहीदों को नमन करने और दुष्टों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनने का आह्वान किया। डीजीपी ने पुलिस के योगदान को राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण बताया।
➤ सुरक्षा, सेवा के साथ दुष्टों के लिए प्रेरणा और विश्वास का स्रोत बनने का आह्वान
➤ अपराध तंत्र से सत्त् संघर्ष कर प्रजातंत्र का अहंकार भंग न होने देने की जिम्मेदारी
पहले आईपीएस पूरन कुमार और उसके बाद एएसआई संदीप लाठर के सुसाइड करने के बाद हरियाणा पुलिस की छवि कठघरे में है। डीजपी बदले जा चुके हैं। कई आला अफसरों से लेकर कई अधिकारी कार्रवाई की धार पर हैं। विवादों, आरोपो प्रत्यारोपों से घिर पुलिस महके को नए महानिदेशक (DGP) ओ.पी. सिंह ने पदभार संभालने के बाद पुलिस बल के सभी कर्मियों के लिए एक प्रेरणादायक और आदर्श संदेश जारी किया है। यह संदेश न केवल पुलिस के दायित्वों को याद दिलाता है, बल्कि देश के गौरवशाली अतीत और बलिदान की भावना पर भी प्रकाश डालता है।
डीजीपी ओ.पी. सिंह ने अपने संदेश की शुरुआत 'गौरवशाली हरियाणा पुलिस के प्रिय साथियों' से की। उन्होंने प्राचीन काल में नदी-घाटी सभ्यता से संपन्न होने के कारण भारत को सबसे समृद्ध देश बताया, जिसके कारण सदियों तक गुलामी झेलनी पड़ी।
बलिदान और समर्पण का महत्व उन्होंने कहा कि आजादी कुछ ही दशकों की बात है, और इस थोड़े से समय में हम गरीबी, बीमारी और अशिक्षा से काफी हद तक उबरने में सफल हुए हैं। डीजीपी ने पुलिस के कर्तव्यों को सर्वोपरि रखते हुए कहा कि देश और प्रांत की निरंतर सुरक्षा के लिए हमारे हजारों साथियों ने अपने प्राणों की आहुति दी है, और अकेले हरियाणा ने चौरासी साथी को वीरगति प्राप्त कराई है। उन्होंने सर्वोच्च बलिदान को श्रद्धापूर्वक नमन किया।
अपराध पर निरंतर संघर्ष डीजीपी ने इस बात पर जोर दिया कि हिंसा और छल-कपट प्रकृति के स्वभाव में है, और समय के साथ जीवन इसके विरुद्ध अपराध तंत्र का सतत संघर्ष है। उन्होंने पुलिस की सर्वाधिक जिम्मेदारी बताते हुए कहा कि प्रजातंत्र का अहंकार यह है कि 'शेर और बकरी एक ही पाट में पानी पियें' और 'शेर को अपनी ताकत का गुमान न हो और न ही बकरी को अपनी कमजोरी का मलाल'। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी पुलिस को मिली है।
राष्ट्र निर्माण में भूमिका उन्होंने पुलिस कर्मियों के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि सामूहिक और ज्ञानपूर्ण कार्य से कभी-कभी त्रुटियां होती हैं, लेकिन हमारा काम लोगों के घर-घर, गली-गली, गाँव-गाँव, रास्ते-रास्ते, नगर-शहर को रोकना है। उन्होंने पुलिस कर्मियों से राष्ट्र निर्माण में अपनी अहम भूमिका देखने का आह्वान किया, क्योंकि उनके जागरूक रहने से लोग चैन की सांस लेते हैं, कारोबार को बढ़ावा मिलता है, और युवाओं को रोजगार मिलता है, जिससे समाज व्यवस्थित और देश आत्मनिर्भर होता है।
पुलिस के लिए आदर्श अंत में, डीजीपी ओ.पी. सिंह ने अपने सहकर्मियों से आचरण-व्यवहार से दुष्टों के लिए प्रेरणा और विश्वास का स्रोत बनने का आग्रह किया। उन्होंने लोगों से प्यार-दर्द-डर से बहुत बढ़कर सहयोग की अपेक्षा रखने की अपील की। उन्होंने पुलिसकर्मियों को उन्हें रोकने, संरक्षण और सहयोग देने को कहा।
उन्होंने कवी प्रदीप की ओजस्वी पंक्तियों के साथ अपने संदेश का समापन किया: "वो मेरा दोस्त है सारे जहाँ को है मालूम, दुआ करे वो किसी के न काम आये आदमी!"
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