बजट 2026: हरियाणा के 'अन्नदाता' की 7 बड़ी उम्मीदें; क्या खेती की लागत और सिंचाई संकट का निकलेगा समाधान?
बजट 2026 से हरियाणा के किसानों को फसल बीमा, सिंचाई, कर्ज और पीएम किसान योजना में बड़ी राहत की उम्मीद है। अन्नदाता की 7 प्रमुख मांगों पर टिकी निगाहें।
बजट 2026 से हरियाणा के किसानों को बड़ी राहत की उम्मीद
खेती की लागत, सिंचाई और नकली बीज सबसे बड़े मुद्दे
पीएम किसान और फसल बीमा में बदलाव पर टिकी निगाहें
1 फरवरी 2026 को पेश होने वाला केंद्रीय बजट हरियाणा के किसानों के लिए खास महत्व रखता है। देश की खाद्य सुरक्षा में अग्रणी भूमिका निभाने वाला हरियाणा का किसान इस समय खेती की बढ़ती लागत, गिरते भू-जल स्तर और जलवायु परिवर्तन की मार झेल रहा है। ऐसे में बजट 2026 से हरियाणा के ग्रामीण अंचलों में बड़ी उम्मीदें जागी हैं।
1. फसल बीमा: क्लेम के लिए 'पोर्टल' नहीं, 'पैसे' का इंतजार
हरियाणा में धान और गेहूं की बेमौसम बारिश से बर्बादी आम हो गई है। किसानों की मांग है कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत 'खराब' के आकलन के लिए सैटेलाइट तकनीक का उपयोग हो ताकि पटवारियों के चक्कर न काटने पड़ें। बजट में क्लेम भुगतान की समयसीमा तय करने की घोषणा किसानों को कर्ज के जाल से बचा सकती है।
2. गिरता भू-जल और सिंचाई की चुनौती
दक्षिण हरियाणा (महेंद्रगढ़, रेवाड़ी, भिवानी) में पानी का संकट गहरा है। बजट 2026 से उम्मीद है कि सूक्ष्म सिंचाई (Drip & Sprinkler) पर सब्सिडी 80% से बढ़ाकर और व्यापक की जाएगी। हरियाणा के किसानों को नहरों के अंतिम छोर (Tail end) तक पानी पहुँचाने के लिए बुनियादी ढांचे हेतु विशेष पैकेज की दरकार है।
3. नकली बीजों और पेस्टिसाइड्स पर 'सर्जिकल स्ट्राइक'
हरियाणा के कपास (नरमा) उत्पादक किसान अक्सर नकली बीजों और घटिया कीटनाशकों के कारण बर्बाद होते हैं। बजट में प्रस्तावित 'नया सीड बिल' अगर सख्त प्रावधानों के साथ आता है, तो सिरसा, हिसार और फतेहाबाद के किसानों को बड़ी राहत मिलेगी। बीज विक्रेताओं पर जवाबदेही तय होना इस बजट की सबसे बड़ी जरूरत है।
4. कृषि ऋण: 4% ब्याज दर पर राहत की आस
खाद, डीजल और मजदूरी महंगी होने से किसान का बजट बिगड़ गया है। बजट 2026 में हरियाणा के किसानों को उम्मीद है कि KCC (किसान क्रेडिट कार्ड) की ऋण सीमा बढ़ाई जाएगी और समय पर भुगतान करने वाले किसानों के लिए प्रभावी ब्याज दर को और कम किया जाएगा।
5. 'पीएम धन-धान्य योजना': हरियाणा के 22 जिलों पर नजर
सरकार की 100 जिलों वाली इस योजना में हरियाणा के अधिक से अधिक जिलों को शामिल करने की उम्मीद है। मिट्टी की सेहत सुधारने के लिए जिप्सम और ढैंचा जैसी फसलों पर विशेष प्रोत्साहन मिलने से हरियाणा की बंजर होती जमीन को नया जीवन मिल सकता है।
6. एक्सपोर्ट हब और कोल्ड चेन का विस्तार
हरियाणा का 'बासमती चावल' और 'किन्नू' दुनिया भर में मशहूर है। बजट 2026 में यदि एग्री-प्रोसेसिंग यूनिट्स और कोल्ड स्टोरेज के लिए फंड मिलता है, तो गन्नौर (सोनीपत) जैसी मंडियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाया जा सकेगा। इससे किसान केवल उत्पादक नहीं, बल्कि निर्यातक भी बन सकेगा।
7. पीएम किसान सम्मान निधि: क्या बढ़ेगी 6,000 की राशि?
हरियाणा में जोत का आकार छोटा होता जा रहा है। ऐसे में सालाना 6,000 रुपये की राशि अब नाकाफी लग रही है। चर्चा है कि बजट 2026 में इस राशि को बढ़ाकर 8,000 या 10,000 रुपये किया जा सकता है, जो छोटे किसानों के लिए खाद और बीज की किल्लत दूर करने में संजीवनी साबित होगी।
बजट 2026 की मुख्य संभावित घोषणाएं (एक नजर में)
| क्षेत्र | उम्मीद | संभावित लाभ |
| सिंचाई | सूक्ष्म सिंचाई हेतु अतिरिक्त फंड | पानी की 40% तक बचत |
| तकनीक | ड्रोन और एआई आधारित खेती | सटीक कीटनाशक छिड़काव |
| बीज | सख्त सीड कंट्रोल एक्ट | फसल बर्बादी पर रोक |
| निर्यात | नए लॉजिस्टिक पार्क | बासमती किसानों को बेहतर दाम |
हरियाणा विशेष विश्लेषण: सिरसा के कपास से करनाल के धान तक, बजट से क्या बदलेगा?
हरियाणा की कृषि विविधता ही इसकी ताकत है। जहाँ उत्तर-पूर्वी हिस्सा धान और गेहूं के लिए जाना जाता है, वहीं पश्चिमी और दक्षिणी हिस्सा कपास और सरसों का गढ़ है। आइए जानते हैं इन विशिष्ट क्षेत्रों के लिए बजट 2026 में क्या खास हो सकता है।
1. सिरसा-हिसार-फतेहाबाद (कपास बेल्ट): गुलाबी सुंडी और नकली बीज से मुक्ति
यह क्षेत्र हरियाणा का 'सफेद सोना' (कपास) पैदा करता है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से 'गुलाबी सुंडी' और नकली बीज माफिया ने यहाँ के किसानों की कमर तोड़ दी है।
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बजट से उम्मीद: बजट 2026 में 'नेशनल पेस्ट सर्विलांस सिस्टम' के लिए बड़ा फंड आवंटित हो सकता है। इससे सिरसा और हिसार के किसानों को कीटों के हमले की चेतावनी मोबाइल पर ही मिल जाएगी।
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संभावित प्रभाव: यदि 'नया सीड बिल' लागू होता है, तो नकली बीज बेचने वाली कंपनियों पर भारी जुर्माना लगेगा, जिससे कपास की उत्पादकता में 15-20% की वृद्धि हो सकती है।
2. करनाल-कुरुक्षेत्र-कैथल (धान बेल्ट): बासमती की खुशबू अब सात समंदर पार
इस क्षेत्र को 'धान का कटोरा' कहा जाता है। यहाँ का बासमती चावल विदेशों में निर्यात होता है।
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बजट से उम्मीद: सरकार निर्यात शुल्क (Export Duty) में कटौती और नया लॉजिस्टिक कॉरिडोर घोषित कर सकती है। करनाल और कुरुक्षेत्र में 'मॉडर्न राइस मिलिंग क्लस्टर' बनाने के लिए सब्सिडी की उम्मीद है।
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संभावित प्रभाव: निर्यात प्रक्रिया आसान होने से बासमती उत्पादकों को प्रति क्विंटल 500 से 700 रुपये अधिक मिल सकते हैं।
3. महेंद्रगढ़-रेवाड़ी-भिवानी (सरसों और बाजरा): सिंचाई और सौर ऊर्जा का संगम
यह अर्ध-शुष्क क्षेत्र है जहाँ पानी की भारी कमी है। यहाँ का किसान मुख्य रूप से सरसों और बाजरे पर निर्भर है।
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बजट से उम्मीद: 'पीएम-कुसुम योजना' के तहत सोलर पंपों पर सब्सिडी का विस्तार। साथ ही, बाजरे को 'श्री अन्न' (मिलेट्स) के तहत वैश्विक ब्रांड बनाने के लिए विशेष फंड।
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संभावित प्रभाव: डीजल पंपों से सौर ऊर्जा पर शिफ्ट होने से खेती की लागत में 25% की कमी आएगी। बाजरे के लिए प्रोसेसिंग यूनिट्स लगने से किसानों को एमएसपी (MSP) से ऊपर दाम मिलने की संभावना बढ़ेगी।
हरियाणा के जिलों के लिए विशेष 'बजट चेकलिस्ट'
| जिला / क्षेत्र | मुख्य फोकस | बजट की संभावित सौगात |
| सोनीपत-पानीपत | सब्जी और बागवानी | गन्नौर मंडी को 'इंटरनेशनल टर्मिनल' के लिए फंड |
| रोहतक-झज्जर | पशुपालन और डेयरी | देसी नस्लों के संरक्षण हेतु विशेष अनुदान |
| यमुनानगर-अंबाला | गन्ना और चिनार | नई सहकारी शुगर मिलों का आधुनिकीकरण |
| सिरसा-हिसार | कपास अनुसंधान | गुलाबी सुंडी नियंत्रण हेतु रिसर्च पैकेज |
पराली प्रबंधन: बजट में नई राहत की आस
हरियाणा के किसानों के लिए पराली (Crop Residue) का प्रबंधन एक बड़ी चुनौती है। बजट 2026 में 'वेस्ट टू वेल्थ' (कचरे से कंचन) योजना के तहत पराली से एथेनॉल बनाने वाले प्लांटों के लिए विशेष प्रोत्साहन मिल सकता है। इससे किसानों को पराली जलाने की मजबूरी से मुक्ति मिलेगी और पराली बेचकर अतिरिक्त आय भी होगी। ऐसे में "यदि बजट में हरियाणा के लिए विशेष 'एग्री-एक्सपोर्ट जोन' की घोषणा होती है, तो यहाँ का किसान केवल मंडी पर निर्भर नहीं रहेगा। तकनीकी और वित्तीय सहायता सीधे बैंक खातों में पहुँचने से बिचौलियों का प्रभाव कम होगा।"
Akhil Mahajan