सोना रिकॉर्ड पर ₹1,27,471 पर पहुंचा, चांदी दो दिन में ₹10 हजार सस्ती हुई

सोना 10 ग्राम 24 कैरेट ₹1,27,471 के ऑलटाइम हाई पर पहुँचा जबकि चांदी दो दिन में करीब ₹10,017 सस्ती होकर ₹1,68,083 प्रति किलोग्राम पर आ गई; इस साल सोना ₹51,309 और चांदी ₹82,066 महंगी हुईं; विशेषज्ञों ने तात्कालिक जोखिमों और निवेश के सावधान तरीकों पर सलाह दी

सोना रिकॉर्ड पर ₹1,27,471 पर पहुंचा, चांदी दो दिन में ₹10 हजार सस्ती हुई

➤ सोना 10 ग्राम 24 कैरेट ₹1,27,471 पर पहुंचा ऑलटाइम हाई
➤ चांदी दो दिन में करीब ₹10,017 सस्ती होकर ₹1,68,083 प्रति किग्रा पर आई
➤ इस साल सोना ₹51,309 और चांदी ₹82,066 महंगी हुई


दिल्ली-एनसीआर के सर्राफा बाजार में सोने ने एक बार फिर निवेशकों और गहने खरीदारों को चौंका दिया है। 16 अक्टूबर को आईबीजेए (India Bullion and Jewellers Association) के अनुसार, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना की कीमत ₹1,27,471 तक पहुँच गई है, जो कि एक नया ऑलटाइम हाई है। यह भाव पिछले दिन के ₹1,26,714 की तुलना में ₹757 की बढ़ोतरी दर्शाता है।

वहीं, चांदी के भाव ने पिछले 20 दिनों की तेजी के बाद दो दिनों में गिरावट दिखाई है। गुरुवार को चांदी ₹1,68,083 प्रति किलोग्राम पर आकर पटरी बदली। मंगलवार को चांदी का भाव ₹1,78,100 तक भी गया था, लेकिन अब दो दिन में इसमें करीब ₹10,017 की गिरावट दर्ज हुई है।

इस साल की शुरुआत से लेकर अब तक सोने के भाव में कुल वृद्धि लगभग ₹51,309 रही है। 31 दिसंबर 2024 पर 10 ग्राम सोना ₹76,162 था और आज यह ₹1,27,471 पर पहुँच चुका है। दूसरी ओर, चांदी 31 दिसंबर 2024 के ₹86,017 से बढ़कर अब ₹1,68,083 प्रति किलोग्राम हो गई है, यानी इस साल चांदी में लगभग ₹82,066 की तेज बढ़त आई है। यह वर्ष-टू-डेट रिटर्न के लिहाज से सोने से करीब 37% अधिक रिटर्न दे चुकी है।

बाजार विश्लेषक और ब्रोकरेज हाउस आने वाले महीनों के लिए भी उम्मीदें जता रहे हैं। गोल्डमैन सैक्स ने अगले साल के लिए 5000 डॉलर प्रति औंस का लक्ष्य रखा है, जो आज के विनिमय दर के हिसाब से लगभग ₹1,55,000 प्रति 10 ग्राम के बराबर बैठता है। वहीं, कुछ लोकल ब्रोकरेज जैसे पीएल कैपिटल के निदेशक संदीप रायचुरा का मानना है कि सोना ₹1,44,000 तक जा सकता है।

विशेषज्ञ इसके पीछे तीन बड़े कारण गिनाते हैं। पहला, फेस्टिव सीजन डिमांड (दिवाली-धनतेरस) जिससे घरेलू खरीदारी बढ़ती है। दूसरा, जियोपॉलिटिकल टेंशन, विशेषकर मिडिल-ईस्टवैश्विक अनिश्चितता। तीसरा, केंद्रीय बैंकों की खरीदारी जो मुद्रा-डाइवर्सिफिकेशन के चलते सोने का स्टॉक बढ़ा रही है।

चांदी की हालिया तेज रफ्तार के पीछे भी फेस्टिव मांग, रुपये की कमजोरी और औद्योगिक मांग-सप्लाई (इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पैनल आदि) का बड़ा हाथ रहा है। यही वजह है कि पिछले 10 महीने में चांदी के दाम दोगुने से ऊपर चले गए हैं।

हालाँकि निवेश सलाहकारों की राय मिश्रित है। केडिया एडवाइजरी के डायरेक्टर अजय केडिया कहते हैं कि इस साल सोने में लगभग 60% की बढ़त आ चुकी है, इसलिए शॉर्ट-टर्म में अब रिटेल निवेशकों के लिए जोखिम-रिटर्न अनुपात अच्छा नहीं दिखता और मुनाफा वसूली की संभावना है। वहीं, लॉन्ग-टर्म के लिए सोना एक हेजिंग अल्टरनेटिव बन सकता है।

बाजार में आने-जाने वाले निवेशकों के लिए कुछ प्रैक्टिकल सुझाव भी दिए जा रहे हैं— हमेशा बीआईएस हॉलमार्क के साथ सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें और खरीदी के दिन सोने-चांदी के भाव को आधिकारिक सोर्सेज से क्रॉस-चेक करें, क्योंकि 24, 22 और 18 कैरेट के भाव अलग होते हैं। निवेशक यह भी सोचें कि अगर गोल्डमैन का टारगेट सच हुआ तो भाव ₹1.55 लाख तक जा सकता है, पर यह भी ध्यान रखें कि प्रोस्पेक्टिव रिटर्न के साथ शॉर्ट-टर्म वैरिएबिलिटी भी बहुत अधिक है।