हरियाणा मंत्रीमंडल में हो रहा फेरबदल! 31 दिसंबर तक सीएम के सभी कार्यक्रम रद्द

हरियाणा में मंत्रीमंडल फेरबदल की अटकलें तेज हो गई हैं। सीएम नायब सैनी ने 31 दिसंबर तक सभी कार्यक्रम रद्द किए। तीन से चार मंत्रियों के बदले जाने की संभावना है।

हरियाणा मंत्रीमंडल में हो रहा फेरबदल! 31 दिसंबर तक सीएम के सभी कार्यक्रम रद्द
  • हरियाणा में मंत्रीमंडल फेरबदल की अटकलें तेज
  • 31 दिसंबर तक सीएम नायब सैनी के सभी कार्यक्रम रद्द
  • तीन से चार मंत्रियों के बदले जाने की चर्चा
  • विभागों में भी सर्जरी संभव, कुछ मंत्रियों के पोर्टफोलियो बदले जाने की भी चर्चा

हरियाणा की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री नायब सैनी ने 31 दिसंबर तक अपने सभी आधिकारिक कार्यक्रम रद्द कर दिए हैं। इसी क्रम में सोमवार को प्रस्तावित प्री-बजट मीटिंग भी स्थगित कर दी गई है। सोनीपत, गुडगांव और पानीपत के उद्योगपतियों से होने वाली बैठक के साथ-साथ अन्य तय कार्यक्रम भी फिलहाल टाल दिए गए हैं।

राजनीतिक गलियारों में इसे सीधे तौर पर संभावित मंत्रीमंडल फेरबदल से जोड़कर देखा जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, सरकार के भीतर बड़े स्तर पर मंथन चल रहा है और इसी वजह से अहम बैठकों को रोका गया है। माना जा रहा है कि नायब सैनी सरकार अपनी टीम को नए सिरे से संतुलित करने की तैयारी में जुटी है। इसी बीच कुछ मंत्रियों के पोर्टफोलियो बदले जाने की भी चर्चा जोरों पर है।

सूत्र बताते हैं कि इस फेरबदल में तीन से चार मंत्रियों के बदले जाने की संभावना है। वरिष्ठ मंत्री श्याम सिंह राणा की उम्र और स्वास्थ्य को लेकर भी चर्चा है, जिस कारण उनके स्थान पर नए चेहरे को मौका दिए जाने की अटकलें तेज हैं। इसके अलावा कृष्ण बेदी के प्रदेश अध्यक्ष बनने की चर्चा भी सियासी माहौल को और गरमा रही है। यदि यह बदलाव होता है, तो मंत्रीमंडल में फेरबदल लगभग तय माना जा रहा है।

सरकार जातीय और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए आगे की रणनीति तय कर रही है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में नायब सैनी सरकार संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल बैठाने के लिए बड़ा राजनीतिक फैसला ले सकती है। ऐसे में साल के अंत से पहले हरियाणा की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है।

जातीय समीकरण और सैनी कैबिनेट का सियासी गणित------

हरियाणा की नायब सैनी सरकार का मौजूदा मंत्रीमंडल सिर्फ प्रशासनिक नहीं, बल्कि गहरे राजनीतिक संदेश भी देता है। 13 सदस्यीय मंत्रिमंडल में सबसे ज्यादा 5 मंत्री ओबीसी बिरादरी से हैं, जो लंबे समय से भाजपा का कोर वोटबैंक मानी जाती रही है। इसके बाद एससी, ब्राह्मण और जाट समुदाय से 2-2 मंत्रियों को प्रतिनिधित्व दिया गया है।

अगर कैबिनेट को जातीय समीकरणों के नजरिए से देखा जाए, तो तस्वीर बिल्कुल साफ है। भाजपा हरियाणा में अपनी गैर-जाट राजनीति की रणनीति पर मजबूती से आगे बढ़ रही है। सत्ता के केंद्र में ओबीसी नेतृत्व को मजबूत कर पार्टी सामाजिक संतुलन के साथ-साथ चुनावी गणित भी साध रही है।

सैनी कैबिनेट में अनुभव और युवा जोश का स्पष्ट कॉम्बिनेशन देखने को मिलता है। एक तरफ अनिल विज और श्याम सिंह राणा जैसे अनुभवी और सीनियर चेहरे हैं, जो सरकार को प्रशासनिक स्थिरता देते हैं। वहीं दूसरी तरफ गौरव गौतम, आरती राव और श्रुति चौधरी जैसे युवा चेहरों को जिम्मेदारी देकर भाजपा ने नए नेतृत्व को आगे बढ़ाने का संकेत दिया है।

खास बात यह भी है कि इन नियुक्तियों में भाजपा ने परिवारवाद के आरोपों की ज्यादा परवाह नहीं की। पार्टी का फोकस साफ तौर पर सामाजिक संतुलन, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और भविष्य की राजनीति तैयार करने पर रहा है।

सिर्फ चेहरे नहीं, विभागों में भी सर्जरी संभव


मंत्रीमंडल फेरबदल की चर्चाओं के बीच एक अहम संकेत यह भी है कि बदलाव सिर्फ चेहरों तक सीमित नहीं रह सकता। कुछ मौजूदा मंत्रियों के पोर्टफोलियो बदले जाने की भी अंदरखाने चर्चा तेज है। सूत्रों के अनुसार, सरकार का फोकस अब परफॉर्मेंस और पॉलिटिकल मैसेजिंग दोनों पर है।

जिन विभागों पर कामकाज को लेकर सवाल उठे हैं या जहां ग्राउंड फीडबैक कमजोर रहा है, वहां विभागीय जिम्मेदारियों में अदला-बदली हो सकती है। इससे बिना किसी मंत्री को हटाए सरकार नई ऊर्जा और नई दिशा देने की कोशिश कर सकती है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह कदम दोहरा संदेश देगा।
एक तरफ संगठन को यह संकेत जाएगा कि जिम्मेदारी के साथ जवाबदेही भी तय है, वहीं दूसरी तरफ जनता को यह भरोसा मिलेगा कि सरकार कोर्स करेक्शन से पीछे नहीं हट रही।

यानी आने वाला फेरबदल सिर्फ “कौन बाहर, कौन अंदर” तक सीमित नहीं होगा, बल्कि यह भी तय करेगा कि कौन सा मंत्री किस विभाग में रहेगा। यही वजह है कि सीएम नायब सैनी के सभी कार्यक्रमों का अचानक रद्द होना महज संयोग नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे सत्ता के भीतर चल रही बड़ी प्रशासनिक सर्जरी से जोड़कर देखा जा रहा है।

अब जब मंत्रीमंडल फेरबदल की अटकलें तेज हैं, तो यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या भाजपा इसी जातीय समीकरण और युवा-वरिष्ठ संतुलन को बनाए रखती है या फिर नए सियासी संदेश के साथ कैबिनेट का चेहरा बदला जाता है। यही फेरबदल आने वाले समय में हरियाणा की राजनीति की दिशा और दशा तय कर सकता है।