हरियाणा में अफसरों पर सीधे FIR नहीं, बदले भ्रष्टाचार जांच नियम
हरियाणा सरकार ने भ्रष्टाचार जांच नियम बदले। अब अफसरों पर FIR से पहले सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी जरूरी होगी, जबकि रंगे हाथों पकड़े जाने पर सीधी कार्रवाई होगी।
- हरियाणा में अफसरों पर सीधे FIR दर्ज नहीं होगी
- भ्रष्टाचार जांच से पहले सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी जरूरी
- ईमानदार अधिकारियों को संरक्षण, तीन महीने में होगा फैसला
हरियाणा सरकार ने प्रदेश में भ्रष्टाचार जांच के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब राज्य में किसी भी सरकारी अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ सीधे FIR या जांच शुरू नहीं की जा सकेगी। इसके लिए पहले सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी लेना अनिवार्य होगा। सरकार का कहना है कि यह फैसला केंद्र सरकार की तर्ज पर लिया गया है, ताकि ईमानदार अधिकारियों को अनावश्यक उत्पीड़न से बचाया जा सके।
सरकार ने यह नई व्यवस्था भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17A के तहत लागू की है। इसके साथ ही एक नई और विस्तृत स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) भी जारी की गई है। इस SOP के तहत अब किसी अधिकारी के खिलाफ शिकायत आने पर पहले उसकी प्रारंभिक जांच होगी और फिर सक्षम प्राधिकारी यह तय करेगा कि FIR दर्ज की जाए या नहीं।
हालांकि सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी रंगे हाथों रिश्वत लेते पकड़ा जाता है, तो उस स्थिति में सीधी कार्रवाई की जा सकेगी। ऐसे मामलों में पहले से मंजूरी लेने की बाध्यता नहीं होगी।
सरकार के मुताबिक नई व्यवस्था के तहत तीन महीने के भीतर यह तय किया जाएगा कि संबंधित अधिकारी के खिलाफ जांच या FIR की अनुमति दी जाए या नहीं। इससे जांच प्रक्रिया को समयबद्ध बनाया जाएगा और अनावश्यक देरी पर भी रोक लगेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला एक ओर जहां ईमानदार अफसरों को सुरक्षा कवच देगा, वहीं दूसरी ओर भ्रष्टाचार के मामलों में जवाबदेही की प्रक्रिया को अधिक औपचारिक और नियंत्रित बनाएगा। हालांकि कुछ विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि मंजूरी की प्रक्रिया कहीं जांच में देरी का कारण न बन जाए, इस पर सरकार को सतर्क रहना होगा।
Akhil Mahajan