पांच लाख की रिश्वत का मामला: हरियाणा पुलिस के इंस्पेक्टर समेत तीन पर CBI कोर्ट में चलेगा मुकदमा
हरियाणा पुलिस के इंस्पेक्टर बलवंत सिंह पर 5 लाख रुपये रिश्वत मांगने के मामले में CBI की विशेष अदालत ने आरोप तय कर दिए हैं। 8 मई से भ्रष्टाचार का मुकदमा चलेगा।
➤ पांच लाख रिश्वत मांगने के मामले में इंस्पेक्टर बलवंत सिंह समेत तीन पर आरोप तय
➤ CBI की विशेष अदालत में 8 मई से शुरू होगा ट्रायल
➤ ज्वेलर को झूठे केस में फंसाने की धमकी देकर मांगे थे 40 लाख, बाद में 5 लाख में सौदा
हरियाणा में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई के दावों के बावजूद आए दिन नए मामले सामने आ रहे हैं। ताजा मामला हरियाणा पुलिस के एक इंस्पेक्टर से जुड़ा है, जहां पांच लाख रुपये रिश्वत मांगने के आरोप में सीबीआई की विशेष अदालत ने मुकदमे की राह खोल दी है।
सीबीआई की विशेष अदालत ने हरियाणा पुलिस के इंस्पेक्टर बलवंत सिंह और दो कथित बिचौलियों जैनेंद्र सिंह व हरपाल सिंह के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप तय कर दिए हैं। अब इस मामले में 8 मई से नियमित सुनवाई शुरू होगी।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, यह मामला करीब दो साल पुराना है। सेक्टर-23 के ज्वेलर सुखजीत सिंह ने सीबीआई को शिकायत दी थी कि इंस्पेक्टर बलवंत सिंह ने उन्हें एक आपराधिक मामले में फंसाने की धमकी देकर भारी रिश्वत की मांग की। शिकायत के आधार पर सीबीआई ने ट्रैप लगाकर बलवंत सिंह को रंगे हाथों गिरफ्तार किया था।
सुखजीत सिंह ने सीबीआई को बताया था कि 29 मार्च 2024 को यमुनानगर साइबर सेल की टीम उनकी दुकान पर पूछताछ के लिए पहुंची थी। इस टीम में साइबर सेल यमुनानगर में तैनात इंस्पेक्टर बलवंत सिंह भी शामिल था। पूछताछ के दौरान बलवंत ने विक्रमजीत नामक व्यक्ति का जिक्र किया और कहा कि उसे एक धोखाधड़ी के मामले में हिरासत में लिया गया है, जिसमें सुखजीत का नाम भी सामने आया है।
इसके बाद इंस्पेक्टर ने सुखजीत को गिरफ्तारी का डर दिखाते हुए कहा कि अगर वह कानूनी कार्रवाई से बचना चाहता है तो उसे 40 लाख रुपये देने होंगे। बाद में सौदा घटाकर पांच लाख रुपये पर तय किया गया। इसी बीच सुखजीत ने सीबीआई से संपर्क कर पूरी जानकारी दे दी।
सीबीआई ने योजना के तहत ट्रैप लगाया और रिश्वत लेते समय इंस्पेक्टर को गिरफ्तार कर लिया। फिलहाल तीनों आरोपी जमानत पर हैं, लेकिन अब आरोप तय होने के बाद उनके खिलाफ भ्रष्टाचार का मुकदमा चलेगा। इस केस को हरियाणा पुलिस और प्रशासनिक व्यवस्था में फैले भ्रष्टाचार के एक गंभीर उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।
Akhil Mahajan