हरियाणा में कई जिलों में जलभराव , इन जगहों पर आज फिर होगी झमाझम बारिश
हरियाणा में इस बार सामान्य से 44% अधिक बारिश हुई है। अंबाला, सिरसा, हिसार और भिवानी में नदियों और ड्रेन के उफान से बाढ़ जैसे हालात हैं, जबकि गुरुग्राम और फरीदाबाद में जलभराव और जाम से लोग परेशान हैं।
- हरियाणा में सामान्य से 44% अधिक वर्षा
- घग्गर नदी और ड्रेन टूटने से बाढ़ जैसे हालात
- गुरुग्राम फरीदाबाद में जलभराव और जाम से हाहाकार
हरियाणा में इस बार मानसून ने जमकर कहर बरपाया है। प्रदेश में सामान्य से 44 प्रतिशत अधिक वर्षा दर्ज की गई है, जो कभी 48 प्रतिशत तक पहुंच गई थी। पिछले तीन दिन सूखा रहने से यह आँकड़ा थोड़ा घटा है, लेकिन हालात अब भी चिंताजनक बने हुए हैं। पहाड़ों से आए तेज पानी और लगातार हुई बारिश ने प्रदेश को पानी-पानी कर दिया है।
अंबाला जिले में घग्गर, मारकंडा, टांगरी और राक्षी नदी उफान पर हैं और बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए हैं। इसी तरह सिरसा में घग्गर नदी ने तबाही मचाई है और राजस्थान की तरफ जाने वाला पानी गांवों में घुस गया है। वहीं हिसार और भिवानी में ड्रेन टूटने से स्थिति गंभीर बनी हुई है।
गुरुग्राम और फरीदाबाद जैसे बड़े शहरों में भी जलभराव ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। गुरुग्राम में हाईवे पर लोगों को 15 घंटे से ज्यादा जाम का सामना करना पड़ा। द्वारका एक्सप्रेसवे किनारे बनी सोसायटियों में साहबी नदी का पानी भर जाने से लोग अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर किराए के मकानों में शरण ले रहे हैं।
मौसम विभाग का कहना है कि 13 सितंबर तक करनाल, अंबाला, यमुनानगर और कुरुक्षेत्र में बारिश के आसार बने हुए हैं। अब तक 565.3 एमएम बारिश दर्ज की जा चुकी है, जबकि औसतन मानसून में यह आंकड़ा 385 एमएम होता है।
हिसार-घग्गर ड्रेन, जिसे जिले की लाइफलाइन माना जाता है, इस समय अपनी क्षमता से दोगुना पानी बहा रही है। करीब 800 क्यूसेक पानी निकलने से यह ड्रेन बार-बार टूट रही है और अब तक 7 गांवों में 15 बार टूट चुकी है। इसके अलावा हांसी-बरवाला क्षेत्र में माइनर टूटने और खेतों में पानी भरने से स्थिति बिगड़ी हुई है।
फरीदाबाद और गुरुग्राम में इस बार पिछले तीन साल की तुलना में ज्यादा बरसात हुई है। गुरुग्राम में 618.7 एमएम और फरीदाबाद में 558.1 एमएम बारिश रिकॉर्ड हुई है। फरीदाबाद में यमुना नदी का पानी तटवर्ती गांवों में घुसने से भारी तबाही मची है।
कुल मिलाकर, हरियाणा के 12 से अधिक जिलों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं और लोग अभी भी मानसून के दंश को झेल रहे हैं।
Akhil Mahajan