नहीं रहा करोड़ों की कीमत वाला युवराज — हरियाणा का गौरव बना इतिहास

कुरुक्षेत्र के मुर्रा नस्ल के प्रसिद्ध भैंसे युवराज का निधन हो गया। करोड़ों की कीमत और 80 लाख वार्षिक कमाई वाला युवराज देशभर में पशुपालकों के बीच प्रसिद्ध था। मालिक कर्मवीर सिंह ने करोड़ों के ऑफर ठुकराकर उसे परिवार का सदस्य बताया था।

नहीं रहा करोड़ों की कीमत वाला युवराज — हरियाणा का गौरव बना इतिहास

➤ कुरुक्षेत्र के प्रसिद्ध मुर्रा नस्ल के भैंसे युवराज का निधन, कीमत थी करोड़ों में
➤ मालिक कर्मवीर सिंह ने करोड़ों के ऑफर ठुकराए, कहा था—युवराज परिवार का सदस्य है
➤ सालाना 80 लाख की कमाई, 1500 किलो वजन और 9 फीट लंबाई का था भैंसा युवराज



कुरुक्षेत्र। हरियाणा के पशुपालन जगत से दुखद खबर आई है। कुरुक्षेत्र के मुर्रा नस्ल के प्रसिद्ध भैंसे “युवराज” का निधन हो गया है। करोड़ों की कीमत और शानदार कद-काठी वाले इस भैंसे को न केवल हरियाणा बल्कि पूरे देश में “भैंसों का बादशाह” कहा जाता था। युवराज की मौत की खबर फैलते ही पशुपालकों और किसानों में शोक की लहर दौड़ गई।

कर्मवीर सिंह, जो कुरुक्षेत्र के गाँव सुंधेर के निवासी हैं, युवराज के मालिक थे। उन्होंने बताया कि युवराज सिर्फ एक पशु नहीं, बल्कि परिवार का हिस्सा था। उसकी देखभाल में पूरा परिवार दिल से जुड़ा हुआ था। कई बार देश-विदेश से करोड़ों रुपए के ऑफर आए, लेकिन कर्मवीर सिंह ने हमेशा बेचने से इनकार किया। उनका कहना था — “युवराज हमारे घर की शान है, इसे पैसों में नहीं तोला जा सकता।”

युवराज मुर्रा नस्ल का सबसे कीमती भैंसा था। उसका वजन करीब 1500 किलो और लंबाई 9 फीट थी। वह रोजाना लगभग 20 किलो दूध पीता था और उसकी देखरेख में हर महीने लाखों रुपए खर्च किए जाते थे। युवराज की सालाना कमाई करीब 80 लाख रुपये थी, जो उसके सीमन (वीर्य) की बिक्री से होती थी। उसके सीमन से करीब 2 लाख कटड़े और कटड़ियां जन्म ले चुके हैं।

भैंसे युवराज की लोकप्रियता किसी सेलिब्रिटी से कम नहीं थी। देशभर के सैकड़ों पशु मेलों में युवराज ने दर्जनों इनाम जीते और हर बार दर्शकों की भीड़ उसकी एक झलक पाने उमड़ पड़ती थी। किसानों के बीच वह हरियाणा की आन-बान और पहचान बन चुका था।

कर्मवीर सिंह ने बताया कि युवराज की तबीयत कुछ दिनों से खराब चल रही थी। डॉक्टरों की टीम लगातार उसका इलाज कर रही थी, लेकिन रविवार रात उसने दम तोड़ दिया। युवराज की मौत से गांव सुंधेर और आस-पास के इलाकों में माहौल गमगीन है। कई किसान श्रद्धांजलि देने पहुंचे और उसकी याद में मोमबत्ती जलाकर भावभीनी विदाई दी।

हरियाणा के पशुपालकों का कहना है कि युवराज जैसी नस्लें राज्य की पशुधन पहचान हैं। उसकी मृत्यु से हरियाणा के डेयरी सेक्टर को अमूल्य क्षति पहुंची है।