हरियाणा में जब्त विस्फोटक सामग्री की सैंपलिंग के दौरान श्रीनगर पुलिस स्‍टेशन में ब्‍लास्‍ट, अब तक 12 की मौत, 30 से ज्‍यादा घायल

श्रीनगर के नौगाम पुलिस स्टेशन में भीषण विस्फोट हुआ जिसमें 12 लोगों की मौत और 30 से अधिक घायल हुए। PAFF ने हमले की जिम्मेदारी ली, जांच जारी है।

हरियाणा में जब्त विस्फोटक सामग्री की सैंपलिंग के दौरान  श्रीनगर पुलिस स्‍टेशन में ब्‍लास्‍ट, अब तक 12 की मौत, 30 से ज्‍यादा घायल

➤ नौगाम पुलिस स्टेशन में शक्तिशाली विस्फोट, 8 लोगों की मौत और 27 घायल
➤ फरीदाबाद से जब्त विस्फोटक की सैंपलिंग के दौरान हादसे की आशंका
➤ धमाका इतना भीषण कि दूर-दराज इलाकों तक गूंज सुनाई दी, कई घरों को नुकसान


श्रीनगर। दिल्ली के लाल किले के पास 10 नवंबर को हुए घातक विस्फोट जैसा ही खौफनाक मंजर शुक्रवार देर रात श्रीनगर में देखने को मिला। नौगाम पुलिस स्टेशन के अंदर हुए भीषण विस्फोट में 8 लोगों की मौत हो गई, जबकि 27 से अधिक लोग घायल हैं। घायलों में अधिकांश पुलिसकर्मी शामिल हैं। सभी को उजाला सिग्नस, SMHS और 92 बेस अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

धमाका इतना जबरदस्त था कि पुलिस स्टेशन के आसपास स्थित कई घरों की खिड़कियां चकनाचूर हो गईं। धमाके की आवाज नौगाम के साथ-साथ छानपोरा, सनतनगर, रावलपोरा और पंथा चाैक तक सुनाई दी। हादसे के बाद सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके को घेर लिया और राहत-बचाव टीमों ने तुरंत अभियान शुरू किया।

घटनास्थल से जो प्रारंभिक जानकारी सामने आ रही है, उसके अनुसार यह विस्फोट फरीदाबाद में जब्त किए गए विस्फोटक की सैंपलिंग के दौरान हुआ हो सकता है। हालांकि इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। बताया जा रहा है कि जब्त किया गया विस्फोटक अमोनियम नाइट्रेट और RDX मिश्रण था।

सूत्रों के मुताबिक, फरीदाबाद में पकड़े गए 2900 किलो विस्फोटक में 358 किलो RDX शामिल था। इसकी सैंपलिंग नौगाम थाने में FSL टीम, तहसीलदार, नायब तहसीलदार और एक दर्जी द्वारा की जा रही थी। बताया गया है कि इनमें से लगभग 360 किलो विस्फोटक सामग्री डॉक्टर मुजम्मिल गनई के किराए के घर से बरामद होने के बाद नौगाम पुलिस स्टेशन में लाई गई थी। मुजम्मिल इस मॉड्यूल में गिरफ्तार आठ आरोपियों में से एक है।

पुलिस को आशंका है कि यह सफेदपोश आतंकी मॉड्यूल वही है, जो दिल्ली लाल किला विस्फोट के पीछे भी जिम्मेदार था। धमाके के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने जांच तेज कर दी है और विस्फोट की प्रकृति व कारणों का पता लगाने के लिए फॉरेंसिक टीमें लगातार काम कर रही हैं।