उचाना इलेक्शन विवाद पर हाईकोर्ट में सुनवाई: वोट रिकाउंटिंग मामले में चुनाव अधिकारी तलब, 7 मार्च को अगली डेट
उचाना विधानसभा चुनाव में 32 वोटों के अंतर से हुई जीत पर रिकाउंटिंग विवाद में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने चुनाव अधिकारी को तलब किया है। सुप्रीम कोर्ट अत्री की याचिका खारिज कर चुका है। अगली सुनवाई 7 मार्च को होगी।
➤ उचाना विधानसभा में 32 वोटों से हुई थी जीत-हार
➤ 150 पोस्टल बैलेट रिजेक्ट होने पर रिकाउंटिंग की मांग
➤ सुप्रीम कोर्ट ने अत्री की याचिका खारिज की, हाईकोर्ट में सुनवाई जारी
चंडीगढ़। हरियाणा के जींद जिले की उचाना विधानसभा सीट पर चुनाव परिणाम को लेकर चल रहे विवाद में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने मामले में रिटर्निंग ऑफिसर (चुनाव अधिकारी) को तलब कर बयान दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। अगली सुनवाई के लिए 7 मार्च की तारीख तय की गई है।
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने बीजेपी विधायक देवेंद्र अत्री की उस स्पेशल लीव पिटीशन को खारिज कर दिया था, जिसमें उन्होंने हाईकोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगाने और वोटों की दोबारा गिनती रोकने की मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद अब हाईकोर्ट मामले की सुनवाई आगे बढ़ाने के लिए स्वतंत्र है।
32 वोटों से हुआ था फैसला
2024 के विधानसभा चुनाव में देवेंद्र अत्री ने कांग्रेस प्रत्याशी बृजेंद्र सिंह को महज 32 वोटों से हराया था। चुनाव परिणाम के बाद बृजेंद्र सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर वोटों की दोबारा गिनती की मांग की। उनका कहना है कि चुनाव में 150 पोस्टल बैलेट केवल स्कैनिंग न होने के कारण रिजेक्ट कर दिए गए।
याचिका में कहा गया कि यदि रिजेक्ट वोटों की संख्या जीत-हार के अंतर से अधिक हो, तो उनकी पुनः जांच की जानी चाहिए थी। आरोप है कि गिनती के दौरान निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया और संबंधित लिफाफे नहीं खोले गए।
हाईकोर्ट में पहले भी हुई सुनवाई
जुलाई 2025 में इस मामले पर सुनवाई शुरू हुई। अत्री की ओर से याचिका पर आपत्तियां दर्ज कराई गईं, लेकिन कोर्ट ने मामले को आगे बढ़ाया। सितंबर में हाईकोर्ट ने अत्री की उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने रिकाउंटिंग की मांग पर रोक लगाने की बात कही थी। इसके बाद कोर्ट ने मुद्दे तय कर रिटर्निंग ऑफिसर को तलब किया। 23 सितंबर की सुनवाई में बृजेंद्र सिंह ने दोहराया कि 150 पोस्टल बैलेट के लिफाफे खोले बिना रिजेक्ट कर दिए गए, जो चुनाव परिणाम को प्रभावित कर सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट से भी नहीं मिली राहत
फरवरी 2026 में देवेंद्र अत्री ने सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पिटीशन दायर कर हाईकोर्ट की कार्यवाही रोकने की मांग की थी। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी। अब हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई जारी रहेगी और 7 मार्च को अगली सुनवाई होगी। यह मामला प्रदेश की राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है, क्योंकि महज 32 वोटों के अंतर ने पूरे परिणाम को विवाद में ला दिया है।
Akhil Mahajan