समालखा में लाखों श्रद्धालु जुटे, आत्ममंथन से गूंजा निरंकारी धाम

हरियाणा के समालखा में 78वां वार्षिक निरंकारी संत समागम “आत्ममंथन” थीम पर आरंभ हुआ। सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज ने प्रेम, सेवा और नम्रता को आत्ममंथन का मार्ग बताया। लाखों श्रद्धालु और हजारों सेवादारों की उपस्थिति में पूरा परिसर भक्ति और अनुशासन से गूंज उठा।

समालखा में लाखों श्रद्धालु जुटे, आत्ममंथन से गूंजा निरंकारी धाम

• समालखा में आरंभ हुआ 78वां निरंकारी संत समागम ‘आत्ममंथन’ थीम पर केंद्रित
• सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज ने प्रेम, सेवा और नम्रता को सच्चे आत्ममंथन की पहचान बताया
• चार दिवसीय आयोजन में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु, उत्कृष्ट व्यवस्था व दिव्य वातावरण


अध्यात्म, प्रेम और मानवता का अद्भुत संगम आज हरियाणा के समालखा में देखने को मिला, जब 78वां वार्षिक निरंकारी संत समागम का शुभारंभ हुआ। निरंकारी मिशन द्वारा आयोजित यह चार दिवसीय समागम (31 अक्टूबर से 3 नवंबर 2025 तक) इस वर्ष “आत्ममंथन” विषय पर आधारित है। इसका उद्देश्य प्रत्येक व्यक्ति को अपने भीतर झाँकने, आत्मविश्लेषण करने और जीवन के सच्चे उद्देश्य को पहचानने के लिए प्रेरित करना है।

समागम के प्रथम दिन सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज ने अपने प्रेरणादायी प्रवचन में कहा कि “सच्चा आत्ममंथन तभी संभव है, जब हम अपने भीतर के अहंकार, ईर्ष्या और द्वेष को पहचानकर उन्हें समाप्त करें और प्रेम, सेवा और नम्रता का मार्ग अपनाएँ। उन्होंने कहा कि जीवन का वास्तविक अर्थ तभी सार्थक होता है जब हम हर कार्य में ईश्वर को शामिल करें और दूसरों के कल्याण के लिए कार्य करें।”

समागम स्थल का लगभग 650 एकड़ का विशाल परिसर श्रद्धा और भक्ति से गूंज उठा। देश के कोने-कोने से आए भक्तों के साथ-साथ लगभग 5,000 अंतरराष्ट्रीय श्रद्धालु भी उपस्थित रहे। आयोजन में एक लाख से अधिक सेवादारों ने व्यवस्था, यातायात, लंगर, चिकित्सा और सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाली। सेवादल की अनुशासित सेवा और भक्तिभाव का दृश्य एक अद्वितीय उदाहरण बना।

आत्ममंथन” विषय पर आधारित आज के कार्यक्रम में कविताएँ, भजन और प्रेरक वक्तव्य शामिल रहे। वक्ताओं ने कहा कि यह समय है जब मनुष्य अपने भीतर झाँके और देखे कि क्या वह प्रेम, सत्य, और सहनशीलता के मूल्यों पर चल रहा है।

श्रद्धालुओं के लिए चार विशाल लंगर गृह स्थापित किए गए हैं, जहाँ नि:शुल्क भोजन की व्यवस्था की गई है। स्वास्थ्य सुविधाओं में 120-बेड का अस्थायी अस्पताल, 8 एलोपैथिक और 6 होम्योपैथिक डिस्पेंसरियाँ सक्रिय हैं। सुरक्षा व्यवस्था के तहत 60 चेकपोस्ट और हरियाणा पुलिस की विशेष टीमें तैनात की गई हैं।

पहले दिन “आत्ममंथन” प्रदर्शनी आकर्षण का केंद्र रही, जहाँ मिशन के इतिहास, समाजसेवा और ब्रह्मज्ञान पर आधारित प्रदर्शनियों को श्रद्धालुओं ने सराहा। शाम तक सत्संग, भजन और गुरु वंदना से पूरा परिसर दिव्यता में डूब गया।

संत निरंकारी मंडल ने हरियाणा सरकार का आभार व्यक्त किया, जिन्होंने बिजली, पानी, सुरक्षा, यातायात और स्वास्थ्य सुविधाओं में पूरा सहयोग दिया। समागम का यह प्रथम दिन आस्था, अनुशासन और मानवता के भाव से ओतप्रोत रहा।