पानीपत में कांग्रेस का हल्ला बोल, मनरेगा के मुद्दे पर सड़क से सचिवालय तक प्रदर्शन

पानीपत में कांग्रेस ने मनरेगा को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। सैकड़ों कार्यकर्ता और मजदूर जिला सचिवालय पहुंचे और सरकार पर गरीबों के साथ कुठाराघात का आरोप लगाया।

पानीपत में कांग्रेस का हल्ला बोल, मनरेगा के मुद्दे पर सड़क से सचिवालय तक प्रदर्शन



➤ मनरेगा का नाम बदलने और कथित छेड़छाड़ के विरोध में कांग्रेस का पैदल मार्च
➤ सैकड़ों कांग्रेस कार्यकर्ता व मनरेगा मजदूर जिला सचिवालय पहुंचे
➤ गरीबों पर कुठाराघात का आरोप लगाते हुए राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा



पानीपत में कांग्रेस पार्टी ने केंद्र व प्रदेश की भाजपा सरकार के खिलाफ जोरदार हल्ला बोल दिया। मनरेगा योजना के नाम और स्वरूप में बदलाव के विरोध में कांग्रेस कार्यकर्ताओं और मनरेगा मजदूरों ने जिला सचिवालय तक पैदल मार्च किया और राष्ट्रपति के नाम उपायुक्त को ज्ञापन सौंपा। इस दौरान सैकड़ों की संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी, कार्यकर्ता और मजदूर हाथों में तख्तियां व कांग्रेस के झंडे लेकर सड़कों पर उतरे।

जिला सचिवालय परिसर में जोरदार नारेबाजी के बीच कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि मनरेगा जैसी जनकल्याणकारी योजना के साथ छेड़छाड़ कर भाजपा सरकार गरीबों और मजदूरों के हक पर कुठाराघात कर रही है। नेताओं ने साफ कहा कि जब तक सरकार मनरेगा को उसके मूल स्वरूप में पूरी ताकत के साथ लागू नहीं करती, तब तक कांग्रेस का संघर्ष जारी रहेगा।

“गरीबों की रीढ़ थी मनरेगा”

जिला कांग्रेस अध्यक्ष रमेश मलिक और वरिष्ठ नेताओं ने कहा कि मनरेगा योजना वर्ष 2005 में तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की अगुवाई में लागू की गई थी। इसका उद्देश्य ग्रामीण गरीबों को उनके गांव में ही रोजगार देना और पलायन को रोकना था। उन्होंने दावा किया कि इस योजना ने लाखों मजदूर परिवारों को सम्मानजनक रोजगार दिया और गांवों के विकास में अहम भूमिका निभाई।

कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि पिछले कई वर्षों से भाजपा सरकार ने मनरेगा को कमजोर किया है। पंचायतों को पर्याप्त फंड नहीं मिल रहा, मजदूरों को पूरे 100 दिन का काम नहीं दिया जा रहा और कई गांवों में साल भर में मुश्किल से 20–25 दिन ही रोजगार मिल पा रहा है।

“नाम बदलने से गरीब का भला नहीं होगा”

प्रदर्शन के दौरान नेताओं ने कहा कि मनरेगा केवल एक योजना नहीं, बल्कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज के सपने से जुड़ा विचार है। गांव के लोग ही तय करें कि गांव में कौन सा विकास कार्य होना चाहिए—यही इस योजना की आत्मा थी। कांग्रेस का कहना है कि नाम बदलने या नियमों से छेड़छाड़ करने से गरीब मजदूरों का भला नहीं होगा।

कांग्रेस का ऐलान

कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने मनरेगा मजदूरों के हितों की अनदेखी जारी रखी, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। गांव-गांव जाकर मजदूरों को संगठित किया जाएगा और सरकार की नीतियों के खिलाफ सड़क से सदन तक संघर्ष होगा।