Budget 2026: हरियाणा में सिंधु सभ्यता के सबसे बड़े केंद्र राखीगढ़ी को मिलेगी नई पहचान

केंद्रीय बजट में हरियाणा के राखीगढ़ी को 15 आइकॉनिक पुरातात्विक स्थलों में शामिल किया गया है। पाथ-वे, लोकल गाइड और सांस्कृतिक कार्यक्रमों से 6 हजार साल पुरानी सिंधु-सरस्वती सभ्यता को नई पहचान मिलेगी।

Budget 2026: हरियाणा में सिंधु सभ्यता के सबसे बड़े केंद्र राखीगढ़ी को मिलेगी नई पहचान

राखीगढ़ी देश के 15 आइकॉनिक पुरातात्विक स्थलों में शामिल
पाथ-वे, लोकल गाइड और सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे शुरू
6 हजार साल पुरानी सिंधु-सरस्वती सभ्यता को मिलेगी वैश्विक पहचान


केंद्र सरकार ने हरियाणा के हिसार जिले में स्थित राखीगढ़ी को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में पेश किए गए बजट भाषण में राखीगढ़ी को देश के 15 ‘आइकॉनिक पुरातात्विक स्थलों’ की सूची में शामिल करने का ऐलान किया। इस फैसले से सिंधु-सरस्वती सभ्यता के इस सबसे बड़े केंद्र को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिलने की उम्मीद है।

राखीगढ़ी में बनी प्राचीन साइटों पर खुदाई करती एएसआई की टीम।

वित्त मंत्री ने बजट भाषण में बताया कि राखीगढ़ी में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए पाथ-वे, यानी पर्यटकों के चलने के लिए निर्धारित रास्ते बनाए जाएंगे। इसके साथ ही लोकल गाइड की नियुक्ति की जाएगी, ताकि देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को इस प्राचीन सभ्यता के इतिहास और महत्व की सही जानकारी मिल सके। यहां सांस्कृतिक और ऐतिहासिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाएगा, जिससे विरासत को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया जा सके।

केंद्र सरकार की गंभीरता इससे पहले भी दिख चुकी है, जब बजट 2025-26 में राखीगढ़ी को वैश्विक धरोहर केंद्र में बदलने के लिए 500 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे। राखीगढ़ी को देश की सबसे पुरानी सिंधु घाटी सभ्यता का स्थल माना जाता है, जिसकी उम्र करीब 6 हजार साल बताई जाती है।

राखीगढ़ी में मिले मकान के अवशेष। इससे माना जाता है कि उस वक्त की सभ्यता भी घर बनाकर रहती थी।

खुदाई में मिले 60 मानव कंकाल, उन्नत सभ्यता के संकेत

राखीगढ़ी में अब तक हुई खुदाई के दौरान एक साथ 60 मानव कंकाल मिल चुके हैं। इसके अलावा मिट्टी के बर्तन, महिलाओं के आभूषण, प्राचीन लिपि, कुएं और बेहद विकसित ड्रेनेज सिस्टम भी सामने आए हैं। इन अवशेषों से यह स्पष्ट होता है कि हजारों साल पहले यहां एक सुनियोजित और विकसित नगरीय सभ्यता मौजूद थी। वर्तमान में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (ASI) की दिल्ली टीम लगातार यहां शोध और खुदाई का कार्य कर रही है।

पिरामिड जैसे टीले बने ASI के आकर्षण का कारण

राखीगढ़ी में मौजूद ऊंचे टीले, जिनका आकार मिश्र के पिरामिड जैसा बताया जाता है, इस स्थल की खास पहचान हैं। करीब 550 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले 9 टीले ASI के लिए शोध का केंद्र बने। अब तक इनमें से 5 टीलों की जमीन अधिग्रहित की जा चुकी है, जबकि टीला नंबर 6 और 7 को संरक्षित करने की तैयारी चल रही है।

तीन चरणों में हुई खुदाई में क्या-क्या मिला

पहली खुदाई 1997-98 में अमरेंद्र नाथ के नेतृत्व में हुई, जिसमें पहली बार मानव कंकाल मिला। दूसरी खुदाई 2013-14 में डेक्कन यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर वसंत शिंदे की अगुआई में हुई, जिसमें 60 कंकाल और 9 हजार साल पुराने अवशेष मिले। तीसरी खुदाई 2023-24 में ASI ने की, जिसमें मकानों की दीवारें, कच्ची ईंटें, तांबा, मनके, शंख की चूड़ियां और मोहरें सामने आईं।

नदी के सूखने से हुआ नगर का अंत

ASI का अनुमान है कि राखीगढ़ी प्राचीन सरस्वती नदी और उसकी सहायक दृष्टवती नदी के किनारे बसी थी। माना जा रहा है कि नदी के सूखने के बाद यहां बसे नगर का पतन हुआ। अब सरकार की नई योजना से राखीगढ़ी न सिर्फ इतिहास और शोध का केंद्र बनेगा, बल्कि पर्यटन के जरिए स्थानीय रोजगार और सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूती मिलेगी।