75 साल का मैं बैठा हूं मस्टंडा : राव इंद्रजीत सिंह
रेवाड़ी में केंद्रीय राज्यमंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने कहा कि 75 साल की उम्र में भी वे पूरी तरह सक्रिय हैं और यह देश की बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का परिणाम है।
➤ 60 के बाद नाकारा मानने वाली सोच पर सीधा सवाल
➤ स्वास्थ्य सेवाओं और जीवनशैली में देश की उपलब्धियों का जिक्र
➤ बढ़ती उम्र में भी सक्रिय रहने को बताया नए भारत की पहचान
हरियाणा में एक कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय राज्यमंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने उम्र और सेहत को लेकर समाज में बनी पुरानी धारणाओं पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा माना जाता था कि 60 साल की उम्र पार करते ही इंसान शारीरिक और मानसिक रूप से कमजोर हो जाता है, लेकिन आज हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। उन्होंने आत्मविश्वास के साथ कहा, “75 साल का मैं बैठा हूं मस्टंडा”, और ठंड या मौसम का अब कोई असर नहीं पड़ता।
राव इंद्रजीत सिंह ने कहा कि पहले यह आम सोच थी कि 60 के बाद आदमी नाकारा हो जाता है, उसका दिमाग भी ठीक से काम नहीं करता और शरीर भी जवाब दे देता है। उस दौर में 60 साल की उम्र को ही जीवन का अंतिम पड़ाव मान लिया जाता था। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि उस समय 60 साल के ऊपर लोग आखिर करते भी क्या थे, यह सोच आज के भारत में अप्रासंगिक हो चुकी है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आज का भारत उस पुराने दौर से बिल्कुल अलग है। अब 75 साल की उम्र में भी लोग सक्रिय हैं, जिम्मेदारियां निभा रहे हैं और समाज में योगदान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह बदलाव केवल सोच का नहीं, बल्कि देश की स्वास्थ्य सेवाओं, खान-पान और जीवनशैली में आए व्यापक सुधार का नतीजा है।
उन्होंने कहा कि देश के भीतर स्वास्थ्य के क्षेत्र में कुछ तो बड़ी उपलब्धियां हुई हैं, तभी आज लोग पहले से ज्यादा स्वस्थ नजर आते हैं। खान-पान का जिक्र करते हुए उन्होंने नमक और आहार संतुलन की बात कही और कहा कि आज के समय में चीजें ज्यादा दुरुस्त हैं, जिससे आम आदमी की सेहत मजबूत हुई है।
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Akhil Mahajan