प्रो. संपत सिंह फिर लौटे इनेलो में, बेटे संग की घर वापसी अभय चौटाला ने किया स्वागत, बोले- अजय ने नेताओं को किया दूर
पूर्व मंत्री प्रो. संपत सिंह 16 साल बाद बेटे गौरव संग इनेलो में लौटे। अभय चौटाला ने बनाया राष्ट्रीय संरक्षक। कांग्रेस पर लगाया परिवारवाद का आरोप।
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पूर्व मंत्री प्रो. संपत सिंह ने बेटे संग INLD जॉइन की
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अभय चौटाला बोले– अजय चौटाला ने वरिष्ठ नेताओं को किया दूर
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संपत सिंह को बनाया गया INLD का राष्ट्रीय संरक्षक
चंडीगढ़। हरियाणा की राजनीति में बुधवार को बड़ा बदलाव देखने को मिला। पूर्व मंत्री प्रोफेसर संपत सिंह ने अपने बेटे गौरव संपत सिंह के साथ इंडियन नेशनल लोकदल (INLD) का दामन थाम लिया। चंडीगढ़ में आयोजित कार्यक्रम में इनेलो के राष्ट्रीय अध्यक्ष अभय चौटाला और प्रदेश अध्यक्ष रामपाल माजरा ने उनका पार्टी में स्वागत किया। पार्टी में शामिल होते ही संपत सिंह को इनेलो का राष्ट्रीय संरक्षक नियुक्त किया गया।
अभय चौटाला ने कहा कि प्रोफेसर संपत सिंह का फैसला सही समय पर लिया गया कदम है। उन्होंने कहा कि संपत सिंह जैसे अनुभवी नेता के आने से पार्टी को मजबूती मिलेगी। अभय चौटाला ने यह भी आरोप लगाया कि जजपा प्रमुख अजय चौटाला ने इनेलो से वरिष्ठ नेताओं को दूर किया।
संपत सिंह 16 साल पहले, यानी 2009 में इनेलो छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए थे। बीते 3 नवंबर को उन्होंने कांग्रेस से इस्तीफा देते हुए कहा था कि “अब मैं चैन की नींद सोऊंगा।” इसके बाद उनके बेटे गौरव सिंह ने भी पार्टी छोड़ने का ऐलान कर सोशल मीडिया पर लिखा था – “थारी कांग्रेस, थानै मुबारक।”
कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह ने संपत सिंह को मनाने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने साफ कहा – “मेरा मन बन चुका है।” संपत सिंह ने कहा कि उन्होंने राजनीतिक जीवन की शुरुआत इनेलो से की थी और अब भावनात्मक रूप से वापस लौटे हैं।
अपने इस्तीफे में उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने लिखा कि उन्हें छह बार विधायक, दो बार मंत्री और एक बार विपक्ष के नेता के रूप में जनता ने चुना, लेकिन कांग्रेस में उनकी उपेक्षा की गई। उन्होंने कहा कि “मेरे प्रभाव से कई सीटों पर कांग्रेस जीती, फिर भी मुझे मंत्री पद नहीं दिया गया।”
उन्होंने 2016 के राज्यसभा चुनाव, कुमारी सैलजा को हटाने, किरण चौधरी और सावित्री जिंदल जैसे नेताओं की अनदेखी जैसी घटनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने लिखा कि “राज्य नेतृत्व ने कांग्रेस को परिवार की कंपनी बना दिया।”
राजनीति की शुरुआत की बात करें तो 1977 में ताऊ देवीलाल ने उन्हें राजनीति में आने का ऑफर दिया था। उन्होंने फतेहाबाद की भट्टू सीट से चुनाव लड़ा और बाद में नलवा सीट से जसमा देवी को हराकर विधायक बने। वह 32 साल तक चौटाला परिवार के साथ जुड़े रहे।
संपत सिंह दो बार हरियाणा के वित्त मंत्री रहे। उनके कार्यकाल में हरियाणा वैट लागू करने वाला देश का पहला राज्य बना। उन्होंने इनेलो-भाजपा गठबंधन सरकारों के गठन में अहम भूमिका निभाई।
राजनीतिक अनुभव और प्रशासनिक कौशल के चलते, अब संपत सिंह की वापसी से इनेलो को नई ऊर्जा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
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