हरियाणा के पूर्व खेल मंत्री संदीप सिंह को बड़ा झटका, महिला कोच यौन उत्पीड़न केस हुआ ट्रांसफर

हरियाणा के पूर्व खेल मंत्री संदीप सिंह से जुड़े महिला कोच यौन उत्पीड़न मामले में कोर्ट ने केस ट्रांसफर करने का आदेश दिया। पीड़िता ने न्यायाधीश पर पक्षपात का आरोप लगाया था।

हरियाणा के पूर्व खेल मंत्री संदीप सिंह को बड़ा झटका, महिला कोच यौन उत्पीड़न केस हुआ ट्रांसफर

➤ महिला कोच की याचिका पर कोर्ट ने बदला जज
➤ पीड़िता ने लगाया न्यायाधीश पर पक्षपात का आरोप
➤ यौन उत्पीड़न केस में ट्रायल को लेकर गंभीर सवाल


हरियाणा के पूर्व खेल मंत्री और अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी रह चुके संदीप सिंह से जुड़े महिला जूनियर कोच यौन उत्पीड़न मामले में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। चंडीगढ़ की जिला एवं सत्र अदालत ने इस केस को मौजूदा न्यायाधीश से किसी अन्य न्यायाधीश को ट्रांसफर करने के आदेश दे दिए हैं। यह फैसला पीड़िता की याचिका पर सुनवाई करते हुए जिला एवं सत्र न्यायाधीश एचएस ग्रेवाल ने सुनाया। कोर्ट ने माना कि मामले की निष्पक्ष सुनवाई को लेकर उठाए गए सवालों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

पीड़िता ने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि जिस न्यायाधीश के समक्ष मामला चल रहा था, वह उसके प्रति पक्षपाती रवैया अपना रहे थे। महिला कोच का कहना था कि उसे न तो केस की फाइल देखने दी गई और न ही CRPC की धारा 164 के तहत दर्ज उसके बयान की कॉपी उपलब्ध कराई गई। यही नहीं, संबंधित न्यायाधीश स्वयं इस केस में गवाहों की सूची में शामिल थे, ऐसे में उनसे निष्पक्ष न्याय की उम्मीद करना मुश्किल था।

यह मामला 26 दिसंबर 2022 का है, जब जूनियर महिला कोच ने संदीप सिंह के खिलाफ यौन उत्पीड़न और छेड़छाड़ के गंभीर आरोप लगाते हुए चंडीगढ़ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। जांच के बाद 31 दिसंबर 2022 की रात सेक्टर-26 थाने में संदीप सिंह के खिलाफ IPC की धाराएं 342, 354, 354A, 354B और 506 के तहत मामला दर्ज किया गया था। इन धाराओं में गलत तरीके से कैद करना, छेड़छाड़, महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाना और आपराधिक धमकी जैसे आरोप शामिल हैं।

पीड़िता की शिकायत के अनुसार, संदीप सिंह ने उसे कथित तौर पर कहा था कि “मुझे खुश रखो, मैं तुम्हें खुश रखूंगा”। महिला कोच का आरोप है कि जब उसने इन बातों का विरोध किया, तो उसे प्रताड़ित किया गया और बाद में ट्रांसफर कर दिया गया। हालांकि, संदीप सिंह ने शुरू से ही इन सभी आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद बताते हुए खारिज किया है।

केस ट्रांसफर की मांग के पीछे कई कानूनी वजहें सामने आईं। पीड़िता ने बताया कि पहले इस मामले की सुनवाई अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (ACJM) राहुल गर्ग कर रहे थे। लेकिन अभियोजन पक्ष की गवाह सूची में स्वयं एसीजेएम का नाम शामिल होने के बावजूद उन्होंने खुद को केस से अलग नहीं किया। इसके अलावा, उन्होंने पहले चंडीगढ़ पुलिस के खिलाफ दायर एक आवेदन पर भी सुनवाई की थी, जिससे उनके गवाह बनने की स्थिति बन गई थी।

महिला कोच ने यह भी आरोप लगाया कि अदालत ने उसके 164 CRPC बयान की प्रति देने से लगातार इनकार किया और बिना बयान सत्यापित कराए ही उसे गवाही देने के निर्देश दिए गए, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है। इन्हीं तथ्यों को आधार बनाकर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने केस को ट्रांसफर करने का आदेश दिया।

इस फैसले के बाद यह मामला एक बार फिर सुर्खियों में है और अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि नए न्यायाधीश के समक्ष सुनवाई किस दिशा में आगे बढ़ती है