हरियाणा पुलिस की लापरवाही: बेगुनाह दो साल जेल में सड़ता रहा, DNA रिपोर्ट से खुलासा, हैरान कर देगा ये मामला, पढ़ें
सोनीपत पुलिस की बड़ी लापरवाही सामने आई, जिसमें हत्या केस के असली आरोपी की जगह एक बेगुनाह मलखान नाथ दो साल जेल में रहा। DNA रिपोर्ट से सच सामने आया और जांच शुरू हुई।
• हरियाणा पुलिस की लापरवाही से बेगुनाह व्यक्ति दो साल जेल में सड़ता रहा
• DNA रिपोर्ट से खुलासा—गिरफ्तार हुआ शख्स असली आरोपी चेतराम नहीं
• पीड़ित परिवार की मांग—गन्नौर CIA व सिटी थाना सोनीपत के अधिकारियों पर केस दर्ज
सुशील मोर, सोनीपत
सोनीपत पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें एक निर्दोष व्यक्ति को दो साल तक गलत पहचान के आधार पर जेल में डाल दिया गया। यह मामला वर्ष 1997 के पिनाना गांव की एक महिला केला हत्याकांड से जुड़ा है। इस केस में गांव के ही चेतराम को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया गया था। अदालत ने चेतराम को उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
साल 2000 में चेतराम पैरोल पर जेल से बाहर आया, लेकिन लौटकर नहीं गया। इसके बाद से वह 24 साल से फरार चल रहा था। इसी बीच करनाल जिले के गांव ललयानी निवासी मलखान नाथ, जो देसी दवाइयां बेचकर अपने परिवार का पालन करता है, कोरोना काल में पिनाना गांव पहुंचा। वहीं आरोपी चेतराम की मां ने उसे अपना ‘धर्म का बेटा’ बना लिया। यहीं से पुलिस की गड़बड़ी शुरू हुई।
11 दिसंबर 2023 को गन्नौर CIA ने बिना पहचान सत्यापन, बिना मेडिकल, और बिना किसी कानूनी प्रक्रिया का पालन किए मलखान नाथ को चेतराम समझकर गिरफ्तार कर लिया। 20 दिसंबर 2023 को उसे अदालत में पेश कर जेल भेज दिया गया। मलखान के चार छोटे बच्चे हैं और वह बिल्कुल निर्दोष था, लेकिन उसे दो साल तक जेल में रहना पड़ा।
हाल ही में उसके माता-पिता और बच्चों के DNA टेस्ट कराए गए, जिसमें साफ साबित हो गया कि मलखान नाथ चेतराम नहीं है। अदालत ने तुरंत उसे डिस्चार्ज कर रिहा कर दिया और पूरे मामले की विस्तृत जांच के आदेश जारी किए।
मलखान नाथ के वकील का कहना है कि सोनीपत पुलिस ने लापरवाही की सारी सीमाएं पार कर दीं। न तो पहचान सत्यापन किया गया, न ही पैरोल रिकॉर्ड मिलान हुआ और न ही पुराने केस फाइल की जांच की गई। पीड़ित परिवार अब सिटी थाना सोनीपत और गन्नौर CIA के तत्कालीन अधिकारियों पर केस दर्ज कर कार्रवाई की मांग कर रहा है।
यह प्रकरण सोनीपत पुलिस की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा करता है कि आखिर इतनी बड़ी चूक कैसे हो गई, जिसके चलते एक निर्दोष व्यक्ति को दो साल जेल में बिताने पड़े।
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