सोनीपत की हवा में जहर, देश का तीसरा सबसे प्रदूषित शहर बना जिला

सोनीपत की हवा में जहर घुल चुका है। AQI 343 के साथ यह देश का तीसरा सबसे प्रदूषित शहर बन गया। किसान पराली नहीं जला रहे, लेकिन फैक्ट्रियों की चिमनियों से निकलता धुआं शहर की सांसें छीन रहा है।

सोनीपत की हवा में जहर, देश का तीसरा सबसे प्रदूषित शहर बना जिला

सोनीपत देश का तीसरा सबसे प्रदूषित शहर
फैक्ट्रियों की चिमनियों से निकलता धुआं बना जहरीली हवा की वजह
किसान जागरूक, लेकिन सांसों पर मंडरा रहा खतरा बरकरार

सुशील मोर, सोनीपत


हरियाणा का औद्योगिक शहर सोनीपत अब प्रदूषण की गिरफ्त में बुरी तरह फंस गया है। ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक जिले का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 343 तक पहुंच गया है, जिससे यह देश का तीसरा सबसे प्रदूषित शहर बन गया है। सुबह के वक्त शहर के ऊपर छाई घनी धुंध और स्मॉग की मोटी परत ने लोगों का सांस लेना मुश्किल कर दिया। खुले में निकलते ही आंखों में जलन और गले में खराश महसूस हो रही है।

नागरिक अस्पताल में इन दिनों दमा, एलर्जी और श्वसन संबंधी बीमारियों से पीड़ित मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। डॉक्टरों ने बुजुर्गों, बच्चों और हृदय रोगियों को सावधानी बरतने की हिदायत दी है। चिकित्सकों का कहना है कि हवा में मौजूद सूक्ष्म कण (PM 2.5 और PM 10) बेहद खतरनाक स्तर पर पहुंच चुके हैं, जो सीधे फेफड़ों को प्रभावित कर रहे हैं।

प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे अनावश्यक वाहन का प्रयोग न करें, कूड़ा-कचरा या पत्ते न जलाएं और वायु गुणवत्ता सुधारने में सहयोग दें। दिलचस्प बात यह है कि इस बार जिले के किसानों ने मिसाल पेश की है — अब तक सिर्फ एक किसान के खिलाफ पराली जलाने का मामला दर्ज हुआ है। पिछले वर्षों की तुलना में यह संख्या बेहद कम है, जिससे साफ है कि किसान अब पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक हो चुके हैं।

फिर भी राहत नहीं। शहर की हवा में जहर घोलने का काम अब औद्योगिक इकाइयों की चिमनियां कर रही हैं। फैक्ट्रियों से निकलता काला धुआं प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण बन चुका है। इन धुएं की तस्वीरें भी सामने आई हैं, जो प्रशासनिक दावों की पोल खोल रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई फैक्ट्रियां रात के समय धुआं निकालती हैं ताकि निरीक्षण से बचा जा सके

क्षेत्रीय अधिकारी,हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अजय मलिक ने बताया कि फैक्ट्रियों में लकड़ी और कोयले का प्रयोग पूरी तरह प्रतिबंधित है, साथ ही कूड़ा जलाने पर भी रोक है। उन्होंने कहा कि अगर हवा की गुणवत्ता अगले कुछ दिनों में और खराब होती है, तो निर्माण कार्यों पर भी रोक लगाने का आदेश दिया जा सकता है।

फिलहाल, किसान अपनी भूमिका जिम्मेदारी से निभा रहे हैं, लेकिन फैक्ट्रियों की चिमनियों से उठता धुआं और बढ़ता AQI यह बता रहा है कि सोनीपत की हवा धीरे-धीरे जहर में तब्दील हो रही है। सवाल यह है कि कब प्रशासन इन उद्योगों पर वाकई नकेल कसेगा, ताकि शहर फिर से सांस ले सके।