अली खान महमूदाबाद केस में SC का सुझाव, नरमी दिखाए सरकार
सुप्रीम कोर्ट ने अली खान महमूदाबाद केस में हरियाणा सरकार को अभियोजन मंजूरी न देकर नरमी दिखाने का सुझाव दिया। सरकार को फैसला लेने के लिए छह हफ्ते का समय मिला है।
➤ सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा सरकार को प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद के मामले में नरमी का सुझाव दिया
➤ कोर्ट ने कहा, एक बार की दरियादिली दिखाकर अभियोजन की मंजूरी न दी जाए
➤ सरकार की मंजूरी के बिना ट्रायल कोर्ट नहीं ले सकता संज्ञान
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को हरियाणा सरकार को सुझाव दिया कि वह अशोका यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद के खिलाफ चल रही आपराधिक जांच में एक बार की दरियादिली दिखाए। कोर्ट ने कहा कि सरकार चाहे तो अभियोजन की मंजूरी न देकर इस मामले को यहीं समाप्त कर सकती है।
यह टिप्पणी उस समय आई, जब अदालत को बताया गया कि हरियाणा सरकार अगस्त 2025 से अभियोजन की मंजूरी पर फैसला नहीं कर पाई है। प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर से जुड़े दो विवादित सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है, लेकिन अब तक सरकार ने अभियोजन की स्वीकृति नहीं दी है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि जब तक सक्षम प्राधिकारी यानी हरियाणा सरकार मंजूरी नहीं देती, तब तक ट्रायल कोर्ट मामले में संज्ञान नहीं ले सकता और आगे की कार्रवाई रुकी रहेगी।
मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी करते हुए कहा कि हरियाणा सरकार चाहे तो कानूनी दृष्टि से नरम रुख अपनाते हुए अभियोजन की मंजूरी न दे और मामले को समाप्त कर दे। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि सरकार ऐसा करती है, तो प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद की भी जिम्मेदारी बनती है कि वे आगे गैर-जिम्मेदाराना टिप्पणियां न करें।
कोर्ट ने कहा कि यदि सरकार दरियादिली दिखाती है, तो आरोपी से भी समान जिम्मेदार व्यवहार की अपेक्षा की जाएगी।
हरियाणा सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस. वी. राजू को अदालत ने छह सप्ताह का समय दिया है, ताकि वे राज्य सरकार से निर्देश लेकर कोर्ट को अवगत करा सकें। तब तक ट्रायल कोर्ट चार्जशीट पर संज्ञान नहीं लेगा।
प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और सिद्धार्थ लूथरा ने कोर्ट की टिप्पणी से सहमति जताई और कहा कि वे जिम्मेदार रुख अपनाएंगे।
Akhil Mahajan