समालखा के बच्चों ने ताइक्वांडो में कमाल दिखाया, 12 स्वर्ण और 4 रजत पदक जीते
समालखा पंचवटी की यामिन इंटरनेशनल अकादमी ने ताइक्वांडो प्रतियोगिता में 12 स्वर्ण और 4 रजत पदक जीते, ग्रामीण युवाओं में खेलो इंडिया पहल से नई ऊर्जा और आत्मविश्वास जगाया
➤ समालखा पंचवटी की यामिन अकादमी ने ताइक्वांडो में कमाल दिखाया
➤ 12 स्वर्ण और 4 रजत पदक जीते, ग्रामीण युवाओं में नई ऊर्जा
➤ खेल मंत्रालय की खेलो इंडिया पहल से प्रेरित प्रतियोगिता में दमखम
समालखा, अशोक शर्मा
ताइक्वांडो, जो कि कोरियाई मार्शल आर्ट है और आत्मरक्षा एवं अनुशासन की मिसाल है, अब ग्रामीण युवाओं में नई ऊर्जा और उत्साह जगा रही है। डीएवी पुलिस पब्लिक स्कूल, पानीपत में आयोजित सेल्फ डिफेंस मार्शल आर्ट्स ताइक्वांडो प्रतियोगिता में समालखा पंचवटी की यामिन इंटरनेशनल स्पोर्ट्स अकादमी के खिलाड़ियों ने अपने शानदार प्रदर्शन से 12 स्वर्ण और 4 रजत पदक अपने नाम किए। यह आयोजन खेल मंत्रालय की खेलो इंडिया पहल से प्रेरित था, जो ग्रामीण क्षेत्रों में खेल संस्कृति और युवाओं की प्रतिभा को बढ़ावा दे रही है।
प्रतियोगिता में पुमसे, ग्रुप पुमसे और फाइटिंग वर्गों में खिलाड़ियों ने अपनी कड़ी मेहनत और दमखम दिखाई। सब जूनियर वर्ग में काशवी और कुंज ने पुमसे में स्वर्ण पदक जीते, जबकि ग्रुप पुमसे में जानवी, नीव, रखी और मानविक ने स्वर्ण पदक हासिल किया। फाइटिंग वर्ग में सानवी (46 किग्रा) और नीव (36 किग्रा) ने स्वर्ण पदक, वहीं हर्षिका (48 किग्रा) और अनुष्का (44 किग्रा) ने रजत पदक जीते। सब जूनियर बॉयज में शौर्य (36 किग्रा) ने स्वर्ण पदक जीतकर अकादमी का मान बढ़ाया।
जूनियर वर्ग में अंशुल (68 किग्रा) और वंश (46 किग्रा) ने स्वर्ण पदक, जबकि मयंक (54 किग्रा) और देव कुमार (49 किग्रा) ने रजत पदक प्राप्त किया। सीनियर वर्ग में साहिल (65 किग्रा), प्रभनूर (60 किग्रा
), दीपिका (50 किग्रा), मनमीत (75 किग्रा), भूपेंद्र (58 किग्रा) और पम्मी (45 किग्रा) ने स्वर्ण पदक जीतकर समालखा का परचम ऊंचा किया।
अकादमी के चेयरमैन सुरेंद्र सरोहा, प्रशिक्षक अमन और अभिभावकों ने खिलाड़ियों को बधाई दी। अंतरराष्ट्रीय कोच यामिन ने कहा कि ऐसी प्रतियोगिताएं खिलाड़ियों के कौशल को निखारती हैं, उनमें अनुशासन, आत्मविश्वास और नेतृत्व की भावना जगाती हैं। उन्होंने आयोजक कवर धीमान का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पानीपत जैसे क्षेत्रों में इस तरह के आयोजन खेल संस्कृति के विकास की मिसाल हैं। अकादमी अब राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता आयोजित करने की दिशा में सक्रिय रूप से कार्य कर रही है।
Akhil Mahajan