हरियाणा के इकलौते कुरुक्षेत्र भद्रकाली शक्तिपीठ की आरती तैयार, झज्जर में मां भीमेश्वरी देवी मंदिर पर नवरात्र मेला शुरू
कुरुक्षेत्र के श्री देवी कूप भद्रकाली मंदिर में नई आरती नवरात्रि पर लॉन्च होगी। जज स्नेहिल शर्मा ने सपने से प्रेरणा लेकर आरती लिखी, इसमें 52 वाद्ययंत्र और मंदिर का इतिहास शामिल है। झज्जर बेरी में नवरात्र मेला भी जारी है।
➤ कुरुक्षेत्र के श्री देवी कूप भद्रकाली मंदिर में नई आरती 30 सितंबर को नवरात्रि पर लॉन्च होगी
➤ आरती जज स्नेहिल शर्मा ने सपने से प्रेरणा लेकर लिखी, 52 वाद्ययंत्रों और 11 मिनट 42 सेकेंड की आधुनिक पारंपरिक शैली
➤ झज्जर बेरी में नवरात्र मेले का आगाज, अंतिम तीन दिन में भारी भीड़ और सुरक्षा व सफाई की विशेष व्यवस्था
हरियाणा के कुरुक्षेत्र में स्थित 52 शक्तिपीठों में से एक प्रमुख शक्तिपीठ श्री देवी कूप भद्रकाली मंदिर में इस बार नवरात्र पर श्रद्धालुओं के लिए एक विशेष और आधुनिक आरती का शुभारंभ किया जाएगा। यह मंदिर हरियाणा की इकलौती शक्तिपीठ है, जिसके पास अपनी खुद की आरती होगी। इस आरती के लिरिक्स दिल्ली में तैनात जज स्नेहिल शर्मा ने लिखे हैं। जज स्नेहिल शर्मा के अनुसार, आरती लिखने की प्रेरणा उन्हें स्वयं मां भद्रकाली ने सपने में दी।
जज स्नेहिल शर्मा, जो कि मंदिर के पीठाध्यक्ष सतपाल शर्मा के पुत्र भी हैं, ने बताया कि 22 अगस्त की रात उन्हें सपने में माता के दर्शन हुए और उसी दिन उन्होंने आरती के नए लिरिक्स और कॉन्सेप्ट तैयार करना शुरू किया। इस आरती में कुल 52 वाद्ययंत्रों का प्रयोग किया गया है और इसे म्यूजिक और वीडियो के साथ 11 मिनट 42 सेकेंड में तैयार किया गया है। म्यूजिक डायरेक्टर डॉ. अमित जोशी, सिंगर लवली रामपाल शर्मा और नीतू शर्मा ने आरती के संगीत व गायन को तैयार किया, जबकि डायरेक्टर राजू मलिकपुर ने इसे शूट और प्रोड्यूस किया।
नई आरती पारंपरिक और आधुनिक तत्वों का मिश्रण है। इसमें मां भद्रकाली के आठ नाम और उनके अलग-अलग स्वरूपों का वर्णन किया गया है। आरती के माध्यम से मंदिर का महत्व, ऐतिहासिक विवरण और यहां आयोजित होने वाले मुख्य कार्यक्रमों की जानकारी भी श्रद्धालुओं तक पहुंचाई जाएगी। आरती की शुरुआत मंदिर के पीठाध्यक्ष पंडित सतपाल शर्मा द्वारा की जाएगी, जो आरती का अर्थ और महत्व श्रद्धालुओं को बताएंगे। इस नई आरती में कुल 18 अंतरे हैं, जिन्हें 3-3 के गैप में रखा गया है ताकि हर शब्द श्रद्धालु आसानी से समझ सकें।
इतिहास के अनुसार, यह मंदिर देवी सती की देह के दाहिने टखने के गिरने की जगह पर स्थापित हुआ था। मंदिर परिसर में स्थित पवित्र कुआं उसी स्थान पर है, जिसे चारों ओर से सुरक्षा के दृष्टिकोण से कवर किया गया है। इसके अलावा, महाभारत काल से जुड़ी परंपरा के अनुसार पांडवों ने युद्ध से पहले यहां मां भद्रकाली से जीत की मन्नत मांगी और विजय के बाद सुंदर घोड़े अर्पित किए। आज भी श्रद्धालु मन्नत पूरी होने पर सोने, चांदी, संगमरमर या मिट्टी के घोड़े अर्पित करते हैं।
मां भद्रकाली यदुवंशियों की कुलदेवी मानी जाती हैं। द्वापर काल में भगवान श्री कृष्ण और उनके भाई बलराम का मुंडन संस्कार यहीं हुआ था। समय-समय पर इस शक्तिपीठ में अनेक धर्मगुरु, संत-महात्मा और समाजिक हस्तियां जैसे शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती, राम मंदिर ट्रस्ट अयोध्या के महंत नृत्य गोपाल दास, संत मुरारी बापू, श्री श्री रविशंकर, अवधूत स्वामी शिवानंद और स्वामी अवधेशानंद यहां आए और पूजा-अर्चना की।
कुरुक्षेत्र के थानेसर क्षेत्र में 4 कूपों का वर्णन मिलता है – चंद्र कूप, रूद्र कूप, विष्णु कूप और देवी कूप। भद्रकाली मंदिर में देवी कूप स्थित है। पिछले साल ही सन्निहित सरोवर के पास लक्ष्मी-नारायण मंदिर में खुदाई के दौरान विष्णु कूप मिला था।
इस बार शारदीय नवरात्र 30 सितंबर तक आयोजित होंगे। मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा किया है। मुख्य मेले के दौरान 500 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात रहेंगे। अतिरिक्त 40 पुलिसकर्मी पहले ही ड्यूटी पर हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पार्किंग और सफाई व्यवस्था की गई है। बच्चों के मुंडन संस्कार के लिए अलग से स्थान बनाया गया है। प्लास्टिक की थैलियों के प्रयोग पर रोक लगाई गई है।
भक्तजन इस नवरात्र में नई आरती का अनुभव लेने के लिए उत्साहित हैं। यह आरती न केवल माता भद्रकाली की महिमा का बखान करेगी, बल्कि नए पीढ़ी को आधुनिक अंदाज में मंदिर की परंपराओं और महत्व से भी परिचित कराएगी।