₹415 करोड़ की अवैध कमाई! अल फलाह चेयरमैन ED के शिकंजे में, विवि से 10 लोग लापता—खौफ बढ़ा, जांच तेज
ED ने अल फलाह चेयरमैन जवाद सिद्दीकी को 415 करोड़ की अवैध कमाई के आरोप में गिरफ्तार किया। यूनिवर्सिटी से 10 लोग लापता, जिनमें 3 कश्मीरी शामिल। जांच जारी।
• ED का दावा—अल-फलाह चेयरमैन जवाद सिद्दीकी ने ₹415.10 करोड़ अवैध कमाए
• सिद्दीकी विदेश भागने की फिराक में था, 13 दिन की रिमांड
• यूनिवर्सिटी से 10 लोग लापता, इनमें 3 कश्मीरी, पुलिस टीमें तलाश में
फरीदाबाद की अल फलाह यूनिवर्सिटी पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई लगातार बढ़ती जा रही है। जांच एजेंसी ने बुधवार को यूनिवर्सिटी के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी को साकेत कोर्ट में पेश किया। कोर्ट ने दलीलें सुनने के बाद सिद्दीकी को 13 दिन की रिमांड पर ED को सौंप दिया।
ED ने कोर्ट को बताया कि सिद्दीकी ने यूनिवर्सिटी को मान्यता प्राप्त संस्थान बताकर छात्रों और उनके माता-पिता को गुमराह किया। इस दौरान ₹415.10 करोड़ की अवैध कमाई की गई। जांच में सामने आया है कि सिद्दीकी का परिवार खाड़ी देशों में रहता है और वह भी विदेश भागने की तैयारी में था। एजेंसी ने दावा किया कि अगर उसे समय पर गिरफ्तार न किया जाता तो वह सबूत मिटाकर देश से फरार हो सकता था।
ED के अनुसार 1990 के दशक के बाद अल फलाह ग्रुप ने तेज़ी से विस्तार किया। लेकिन ग्रुप की वित्तीय स्थिति और संपत्तियों के बीच भारी अंतर मिलने से कई गंभीर शंकाएँ उठ रही हैं।
दूसरी ओर, खुफिया सूत्रों ने बड़ा खुलासा किया है कि अल फलाह यूनिवर्सिटी में काम करने या पढ़ने वाले 10 लोग लापता हैं। इनमें 3 कश्मीरी युवा भी शामिल हैं। इनके मोबाइल फ़ोन बंद हैं और उनसे कोई संपर्क नहीं हो पा रहा है। जम्मू-कश्मीर और हरियाणा पुलिस की संयुक्त टीमें इनकी तलाश में जुटी हैं।
इस आतंकी मॉड्यूल में कई डॉक्टरों पर भी गंभीर आरोप लगे हैं। जानकारी के अनुसार, डॉ. मुजम्मिल शकील रिक्रूटमेंट नेटवर्क संभालता था, जबकि डॉ. शाहीन सईद और डॉ. उमर नबी आर्थिक मदद और ब्रेनवॉश की भूमिका निभाते थे। मरीजों और अस्पताल कर्मचारियों के घर मदद के बहाने जाकर मुजम्मिल नेटवर्क खड़ा करने का काम कर रहा था।
वहीं, वायरल हुए डॉ. उमर के सुसाइड बॉम्बर ट्रेनिंग वीडियो की वॉइस टोन पर भी NIA को शक है। एजेंसी को लगता है कि वीडियो में उपयोग की गई इंग्लिश आर्टिफिशियल टोन में है, जो किसी सामान्य भारतीय, अमेरिकी या ब्रिटिश लहजे जैसी नहीं है। इस लहजे की पहचान के लिए साइबर और लैंग्वेज फॉरेंसिक टीमें जांच कर रही हैं।
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