9 साल पुराने बहुचर्चित सीएलयू घूस सीडी कांड में भुवनेश ऐलावादी बरी
बहुचर्चित सीएलयू घूस सीडी कांड में ADJ कोर्ट ने 9 साल बाद भुवनेश ऐलावादी को बरी किया। वीडियो प्रमाणिक न होने और विरोधाभासी गवाहियों के चलते क्लीन चिट मिली।
• ADJ कोर्ट सौरभ खत्री ने प्रमाणिकता पर सवालों के आधार पर क्लीन चिट दी
• वीडियो सीडी व गवाहियों में विरोधाभास; आईटी एक्ट 65-बी के तहत प्रमाणिकता साबित नहीं
करीब नौ साल पुराने बहुचर्चित सीएलयू घूस सीडी कांड में एक बड़ा मोड़ आया है। हांसी के भाजपा विधायक विनोद भ्याना के करीबी रहे कारोबारी भुवनेश ऐलावादी को अदालत ने बरी कर दिया है। यह फैसला अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (ADJ) सौरभ खत्री की कोर्ट ने सोमवार को सुनाया।
विजिलेंस ब्यूरो ने इस मामले में वर्ष 2016 में एफआईआर दर्ज की थी और इसी एफआईआर के तहत भुवनेश ऐलावादी को हांसी की गांधी कॉलोनी स्थित उनके घर से गिरफ्तार किया गया था। विजिलेंस ने पूछताछ के लिए उन्हें एक दिन के रिमांड पर भी लिया था और वॉइस सैंपल लिए गए थे।
यह मामला वर्ष 2013-14 के दौरान सामने आया था, जब प्रदेश में कांग्रेस सरकार थी। उस समय हांसी के मौजूदा भाजपा विधायक विनोद भ्याना मुख्य संसदीय सचिव थे। एक स्टिंग ऑपरेशन में भुवनेश ऐलावादी को सीएलयू (चेंज ऑफ लैंड यूज) के बदले घूस मांगते दिखाया गया था, जिसे इनेलो नेता अभय चौटाला ने सार्वजनिक किया था।
इसी सीडी के आधार पर शिकायत में 2016 में एफआईआर दर्ज हुई थी। हाईकोर्ट ने उस समय वीडियो में नजर आ रहे विधायकों की गिरफ्तारी पर रोक लगा रखी थी, लेकिन भुवनेश की गिरफ्तारी से यह कांड फिर सुर्खियों में आया।
वकील अमित परुथी के अनुसार, अदालत ने कहा कि सीडी व पेन ड्राइव की प्रामाणिकता सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 65-बी के तहत प्रमाणित नहीं की गई। न तो मूल मेमोरी चिप जब्त की गई और न ही रिकॉर्डिंग प्रक्रिया का स्पष्ट विवरण अदालत में दिया गया।
गवाह धर्मेंद्र भी स्टिंग की तारीख और वर्ष को लेकर विरोधाभासी बयान देता रहा। अदालत ने माना कि अप्रमाणिक वीडियो और विरोधाभासी गवाही के आधार पर दोष सिद्ध नहीं किया जा सकता। इन्हीं आधारों पर भुवनेश ऐलावादी को क्लीन चिट दी गई।
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