रेप की झूठी FIR करवाने वाली एयर-होस्टेस अरेस्ट
गुरुग्राम में रेप का झूठा केस दर्ज कर ब्लैकमेलिंग करने के आरोप में एयरलाइन की केबिन क्रू गिरफ्तार। तकनीकी जांच में साजिश उजागर, पुलिस कार्रवाई जारी।
➤ रेप का फर्जी केस दर्ज कर पैसे ऐंठने की साजिश
➤ तकनीकी जांच में फंसी केबिन क्रू, खुद कबूला जुर्म
➤ साथी जितेंद्र उर्फ बिट्टू फरार, तलाश जारी
गुरुग्राम में रेप की झूठी एफआईआर दर्ज कराकर पैसों की उगाही करने के मामले में पुलिस ने एक एयरलाइन की केबिन क्रू को गिरफ्तार किया है। आरोपी महिला पर आरोप है कि उसने अपने साथी के साथ मिलकर सुनियोजित साजिश के तहत एक निर्दोष व्यक्ति को रेप केस में फंसाने की कोशिश की, ताकि उसे ब्लैकमेल कर रुपए वसूले जा सकें।
पुलिस के अनुसार, आरोपी केबिन क्रू मूल रूप से राजस्थान की रहने वाली है और फिलहाल कापसहेड़ा इलाके में किराए पर रहती थी। जांच में सामने आया है कि वह पहले भी जुलाई 2025 में सेक्टर-14 थाने में एक युवक अभिषेक के खिलाफ रेप का केस दर्ज करवा चुकी है, जिसके चलते वह युवक जेल गया था।
जेल में अभिषेक की मुलाकात जितेंद्र उर्फ बिट्टू से हुई, जो खुद एक रेप केस में जेल जा चुका था। बिट्टू ने बदला लेने के लिए उस महिला के पति को टारगेट करने की योजना बनाई, जिसने उस पर रेप का केस दर्ज कराया था। इसी साजिश के तहत केबिन क्रू को आगे किया गया।
केबिन क्रू ने 11 दिसंबर 2025 को DLF फेज-2 थाने में शिकायत दी कि उसे ऑनलाइन जॉब इंटरव्यू के बहाने MG रोड मेट्रो स्टेशन बुलाया गया और कार में उसके साथ रेप किया गया। शिकायत में MGF मेट्रोपॉलिटन मॉल और आसपास की जगहों का जिक्र किया गया।
पुलिस ने जब मामले की तकनीकी जांच की तो सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, लोकेशन और अन्य साक्ष्यों में शिकायत की कहानी की पुष्टि नहीं हुई। न तो बताई गई गाड़ी मिली और न ही आरोपी की मौजूदगी साबित हुई। इसके उलट साक्ष्यों से यह साफ हो गया कि पूरी कहानी ब्लैकमेलिंग के उद्देश्य से गढ़ी गई थी।
कड़ी पूछताछ में केबिन क्रू ने बिट्टू के साथ मिलकर साजिश रचने की बात स्वीकार कर ली। इसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर रिमांड पर लिया और झूठी एफआईआर हटाकर उसके खिलाफ नई धाराओं में केस दर्ज किया गया।
पुलिस प्रवक्ता संदीप कुमार ने बताया कि आरोपी के साथी जितेंद्र उर्फ बिट्टू की तलाश जारी है। उन्होंने कहा कि झूठे रेप केस दर्ज कराने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी, क्योंकि इससे असली पीड़ितों को न्याय मिलने में दिक्कत आती है।
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