क्या राव नरबीर के सुझाव से तीन साल पीछे चला जाएगा गुरुग्राम मेट्रो प्रोजेक्ट, जानें पूरा मामला
गुरुग्राम मेट्रो एक्सटेंशन प्रोजेक्ट में राव नरबीर सिंह के अंडरग्राउंड प्रस्ताव से नया विवाद खड़ा हो गया है। लागत 600 करोड़ प्रति किमी तक बढ़ सकती है और प्रोजेक्ट तीन साल तक लटक सकता है।
➤ गुरुग्राम मेट्रो एक्सटेंशन प्रोजेक्ट में नया पेंच
➤ राव नरबीर के अंडरग्राउंड सुझाव से काम फिलहाल रोका गया
➤ लागत और समय दोनों में भारी बढ़ोतरी की आशंका
गुरुग्राम में लंबे समय से प्रतीक्षित मेट्रो एक्सटेंशन प्रोजेक्ट एक बार फिर विवाद और देरी के घेरे में आ गया है। कैबिनेट मंत्री राव नरबीर सिंह द्वारा फेज-2 के तहत सेक्टर-9 से साइबर सिटी तक की लाइन को अंडरग्राउंड बनाने का सुझाव दिए जाने के बाद गुरुग्राम मेट्रो रेल लिमिटेड (GMRL) ने प्रोजेक्ट को फिलहाल होल्ड पर रख दिया है।
तकनीकी और वित्तीय रिपोर्ट के अनुसार, यदि इस बदलाव को मंजूरी दी जाती है तो प्रोजेक्ट को पूरा होने में तीन साल की अतिरिक्त देरी हो सकती है और लागत 350 करोड़ प्रति किलोमीटर से बढ़कर 600-650 करोड़ रुपये प्रति किलोमीटर तक पहुंच जाएगी। जीएमआरएल के अधिकारियों ने चेताया है कि इस बदलाव से न केवल टेंडर और डिजाइन प्रक्रिया प्रभावित होगी, बल्कि अनुमोदन और फंडिंग में भी देरी संभव है।
राव नरबीर सिंह की ओर से भेजी गई चिट्ठी में तीन अहम बिंदु हैं
1️⃣ घनी आबादी एरिया: सेक्टर-9 से साइबर सिटी के बीच क्षेत्र बेहद घनी आबादी वाला है और सड़कों की चौड़ाई सीमित है, इसलिए इस हिस्से को दिल्ली की तरह अंडरग्राउंड बनाया जाए।
2️⃣ भविष्य की जरूरतें: अंडरग्राउंड लाइन से भविष्य में किसी भी तरह के फ्लाईओवर या ट्रैफिक समाधान कार्य में बाधा नहीं आएगी।
3️⃣ पर्यावरण संरक्षण: एलिवेटेड लाइन में बड़े पैमाने पर पेड़ काटने पड़ेंगे, जबकि अंडरग्राउंड विकल्प से पर्यावरण को नुकसान नहीं होगा।
सरकार को अब जीएमआरएल की नई रिपोर्ट सौंपी जाएगी, जिसके बाद राज्य कैबिनेट यह तय करेगी कि अतिरिक्त लागत कैसे वहन की जाए।
इससे पहले भूमि पूजन कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल और कैबिनेट मंत्री राव नरबीर सिंह एक साथ मौजूद थे। इस मौके पर प्रोजेक्ट को समय पर पूरा करने का भरोसा दिया गया था। मगर अब मामला फिर उलझता नजर आ रहा है।
गुरुग्राम मेट्रो प्रोजेक्ट का खाका
केंद्र सरकार ने जून 2023 में इस प्रोजेक्ट को मंजूरी दी थी। मिलेनियम सिटी सेंटर से साइबर सिटी तक यह लाइन 28.5 किलोमीटर लंबी होगी। पहले चरण में 27 एलिवेटेड स्टेशन बनाए जा रहे हैं और इसका ठेका दिलीप बिल्डकॉन लिमिटेड तथा रंजीत बिल्डकॉन लिमिटेड को मिला है। निर्माण कार्य के लिए नाहरपुर रूपा गांव में कास्टिंग यार्ड स्थापित किया गया है।
फेज-2 में सेक्टर-9 से डीएलएफ साइबर सिटी तक 14 स्टेशन होंगे। नई डीपीआर में रेलवे स्टेशन को भी शामिल किया गया है और इसे शहरी आवास मंत्रालय को मंजूरी के लिए भेजा जा चुका है।
मेक इन इंडिया पहल के तहत इस प्रोजेक्ट में भारतीय तकनीक, उपकरण और संसाधनों के अधिकतम उपयोग पर ज़ोर दिया गया है। यह मेट्रो लाइन पूरी तरह से स्वतंत्र कॉरिडोर के रूप में विकसित होगी, जो वर्तमान रैपिड मेट्रो से नहीं जुड़ेगी।
राव इंद्रजीत बनाम राव नरबीर विवाद
इस परियोजना को लेकर पहले भी दो प्रमुख नेताओं में मतभेद रहे हैं।
राव इंद्रजीत सिंह ने देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की थी, जबकि राव नरबीर सिंह ने इसे टेक्निकल कन्फ्यूजन बताते हुए किसी व्यक्ति पर आरोप नहीं लगाया। अब, अंडरग्राउंड लाइन के नए प्रस्ताव से एक बार फिर परियोजना की समयसीमा और लागत पर सवाल खड़े हो गए हैं।
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